सिख धर्मगुरुओं के अपमान से जुड़े एक कथित वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए '10 लाख रुपये की डील' का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने वीडियो बदलने का दबाव बनाया था। 2027 चुनाव से पहले इस खुलासे ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और विपक्ष के बीच सियासी घमासान बढ़ा दिया है। IANS
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पंजाब में सियासी भूचाल, भगवंत मान के वीडियो को 'AI' साबित करने के लिए दी गई ₹10 लाख की रिश्वत?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भगवंत मान के ऊपर आरोप लगे थे कि उन्होंने शराब के माध्यम से सिख धर्मगुरुओं को अपमानित करने का प्रयास किया।

Author : Pradeep Yadav

पंजाब में आम आदमी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भगवंत मान के ऊपर आरोप लगे थे कि उन्होंने शराब के माध्यम से सिख धर्मगुरुओं को अपमानित करने का प्रयास किया। भगवंत मान ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया था और उसे फर्जी बताया था, लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है।

पंजाब में चुनाव और भगवंत की सरकार पर संकट

पंजाब में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव धीरे-धीरे सर पर आ रहे हैं। इधर सीएम भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। हाल ही में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था जिसमें एक शख्स सिख धर्मगुरुओं पर शराब की बूंदें छिड़कते दिखाई दे रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस वीडियो में भगवंत मान हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

इसके बाद जांच शुरू हुई तो यह कहा गया कि वीडियो में भगवंत मान ही हैं। इसके बाद सच्चाई की जांच हेतु फॉरेंसिक डिपार्टमेंट में इसे भेजा गया। यहाँ मामला कुछ नई दिशा की ओर मुड़ते दिखाई दे गया। आरोप लगाया गया कि मान सरकार के अधिकारियों ने दबाव बनाया कि वीडियो को फर्जी साबित किया जाए। जानकारों का मानना है कि चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है।

नया मामला काफी चौंकाने वाला है

भगवंत मान के ऊपर आरोप लगे थे कि उन्होंने शराब की कुछ बूंदें सिख गुरुओं पर छिड़ककर उनका अपमान किया था। भगवंत मान ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि यह वीडियो सही हो सकता है लेकिन फोटो फर्जी है। इस पूरे मामले की तहकीकात गुरुग्राम पुलिस कर रही थी। इस मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस विभाग के ही एक युवा ने खुलासा करते हुए बताया कि इस वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए 10 लाख रुपए देने का वादा किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, जसप्रीत ने बताया है कि पंजाब के कुछ आला अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया कि वीडियो को फर्जी साबित किया जाए। जसप्रीत ने बताया कि वह धमकियों से डर गए थे जिसकी वजह से अरुण और अंकित नामक व्यक्तियों से संपर्क किया। इसके बाद गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित क्राउन प्लाजा होटल में ले जाकर दबाव बनाया गया और 10 लाख रुपए की डील हुई। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने अंकित और अरुण दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल जारी है कि वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए किस तरीके की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।

पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले में भगवंत मान ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये सुनियोजित तरीके से बदनाम करने की साजिश है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "राजनीतिक तौर पर वे (विपक्षी दल) मुकाबला नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वे जमीनी स्तर पर शून्य हो चुके हैं। इस कारण वे हर रोज कोई न कोई आदेश जारी कराते हैं, ताकि मुझे धार्मिक तौर पर बदनाम किया जा सके।" उन्होंने आगे कहा, "विपक्ष की कोशिश है कि वे मेरी फर्जी वीडियो लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, ताकि लोग मुझसे नफरत करने लगें, मगर यह संभव नहीं है।"

वहीं भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब के मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को कहा कि अपनी सरकार पर लगे गंभीर आरोपों का जवाब देने के बजाय भगवंत मान ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की और ध्यान भटकाने वाले बयान तथा नाटकीय बहाने पेश किए।

ढिल्लों ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री मान जानबूझकर पंजाब से जुड़े सबसे गंभीर सवालों के जवाब देने से बचते रहे। उन्होंने 10 लाख रुपए की रिश्वत, फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट, गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर और पंजाब पुलिस की भूमिका पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। आरोप है कि पुलिस ने एक फर्जी रिपोर्ट के आधार पर सच्चाई को दबाने और शामिल लोगों को बचाने की कोशिश की। ढिल्लों ने आगे कहा कि भगवंत मान को झूठ का नकाब उतार देना चाहिए, क्योंकि पंजाब की जनता सब देख रही है।

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