मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव का निधन हो गया है, जिससे सैफई परिवार में शोक है। राजनीति से दूर प्रतीक रियल एस्टेट और जिम बिजनेस में सक्रिय थे। वे अपनी महंगी कारों और अपर्णा यादव से विवाह को लेकर चर्चा में रहे। संपत्ति और कारोबार से जुड़े विवादों के बावजूद अखिलेश यादव ने हमेशा उनका पक्ष लिया। मुख्यमंत्री योगी ने भी शोक जताया है।
भारत के पूर्व रक्षामंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव का निधन हो गया है। 13 मई 2026 यह को यह खबर जैसे ही सार्वजनिक हुई है, पूरे सैफई परिवार में सन्नाटा पसरा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने इस मामले पर कहा है कि कानून और परिवार की जो राय होगी, उसी के हिसाब से आगे का निर्णय लिया जाएगा। प्रतीक के बड़े भाई अखिलेश यादव ने कहा है कि वह पिछले कई दिनों से बिजनेस को लेकर काफी चिंतित नजर आ रहे थे। आइए जानते हैं कि प्रतीक के जीवन में किस-किस तरीके के विवाद रहे हैं।
प्रतीक यादव का राजनीति से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। पिता मुलायम सिंह यादव के निधन हो जाने पर परिवार में थोड़ी-बहुत कलह भी देखने को मिली। उनकी पत्नी ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। कुछ समय पहले साल 2025 में ही प्रतीक ने रियल एस्टेट से जुड़े एक कारोबारी पर FIR दर्ज कराई थी। गौतमपल्ली थाने में रियल एस्टेट कारोबारी कृष्णानंद पांडेय, उनकी पत्नी वंदना पांडेय और पिता अशोक पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी, रंगदारी (Extortion) और आपराधिक धमकी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए उन्होंने कहा था कि 2015 में कृष्णानंद पांडेय के साथ मिलकर रियल एस्टेट का कारोबार शुरू किया था, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी कंपनी को अपने नाम कर लिया। प्रतीक का कहना था कि कृष्णानंद पांडेय और उनके परिवारवालों ने उन्हें धोखा दिया है।
प्रतीक और अपर्णा स्कूल के समय से दोस्त रहे हैं। 4 दिसंबर 2011 को प्रतीक और अपर्णा यादव की शादी हुई थी। काफी समय बाद दोनों के बीच कुछ समय के लिए विवाद देखने को मिला। साल 2025 में प्रतीक यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी पत्नी और परिवार को लेकर बातें साझा की थीं। उस समय ऐसा लगा था कि दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। कुछ समय के लिए अपर्णा और प्रतीक के तलाक को लेकर खबरें प्रकाशित होने लगी थीं। बाद में उन्होंने यह बात स्पष्ट की थी कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर लिया गया था। इसके बाद उन्होंने पारिवारिक कलह वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया और बताया था कि सबकुछ ठीक है।
साल 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा चुनाव लड़ रही थी। उस समय मोदी ने प्रतीक को निशाने पर लेते हुए कहा था कि मुलायम सिंह यादव के बेटे इतनी महंगी कार कहाँ से लाते हैं? समाजवाद के नाम पर मुलायम परिवार लोगों को गुमराह कर रहा है। इस मामले पर प्रतीक से जब पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह कार उनकी अपनी मेहनत की कमाई है। उन्होंने लेम्बोर्गिनी कार को लोन पर लिया था। दरअसल, प्रतीक को राजनीति में बिल्कुल रुचि नहीं थी। उनका पूरा ध्यान बिजनेस में लगा रहता था। जिम करना, महंगी कार आदि चीजों का वह काफी शौक रखते थे।
प्रतीक शुरू से ही बिजनेस में रुचि रखते थे। इसलिए वह जो काम भी शुरू करते थे, यह आरोप लगाया जाता था कि उनके बिजनेस को राजनीतिक शरण मिलती है। यही वजह है कि कभी-कभी सैफई परिवार पर यह आरोप लगता था कि प्रतीक के बिजनेस की आड़ में पैसे का सारा खेल किया जा रहा है। लेकिन प्रतीक इस बात से साफ इनकार करते रहे कि उन्होंने कोई अनैतिक रास्ते से बिजनेस किया है और न ही कभी कोई ऐसा मामला सामने आया जिसमें सीधे तौर पर प्रतीक गैर-कानूनी काम करते पकड़े गए हों।
प्रतीक के पिता मुलायम सिंह यादव का निधन साल 2022 में हो गया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय यह कयास लगाए जा रहे थे कि अखिलेश यादव और प्रतीक के बीच पैतृक संपत्ति के बंटवारे में विवाद खड़ा हो सकता है लेकिन पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद वाली खबरों पर विराम लगाते हुए प्रतीक को अपना भाई बताया और उनके साथ खड़े रहने की बात बताई। प्रतीक की संपत्ति को लेकर समय-समय पर विरोधी दलों के नेता कटाक्ष करते रहते थे कि समाजवादी परिवार में इतनी अधिक संपत्ति कहाँ से आती है। हालांकि प्रतीक ने इस बात से हमेशा इनकार किया है कि उनके पास अवैध संपत्ति है। उन्होंने हमेशा यही बताने का प्रयास किया कि उनके पास जो भी संपत्ति है वह वैध है। प्रतीक के निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है। बता दें कि प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव भाजपा में सक्रिय महिला नेता हैं।