भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के पहले चरण और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव सही ढंग से संपन्न कराए हैं। आयोग ने शनिवार को जानकारी दी कि फॉर्म 17ए और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद किसी भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई।
निर्वाचन आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों के प्रथम चरण और तमिलनाडु में सभी सीटों पर हुए मतदान के बाद फॉर्म 17ए सहित मतदान से जुड़े दस्तावेजों की जांच पूरी कर ली है। यह प्रक्रिया शुक्रवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
आयोग ने पारदर्शिता को मजबूत करने, मतदान केंद्रों पर किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर दोबारा मतदान की सिफारिश करने के लिए फॉर्म 17ए और मतदान के दिन के अन्य दस्तावेजों व रिकॉर्ड की जांच के संबंध में निर्देश जारी किए थे। इसके तहत, पश्चिम बंगाल (प्रथम चरण) के उन सभी 152 विधानसभा क्षेत्रों में दस्तावेजों की जांच सुचारू रूप से संपन्न हुई, जहां मतदान हुआ था। यह जांच रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) की ओर से सामान्य पर्यवेक्षकों और 600 से अधिक उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की गई।
पहले चरण के सभी 1,478 उम्मीदवारों को जांच प्रक्रिया में भाग लेने के लिए जांच की तारीख, समय और स्थान के बारे में सूचित किया गया था। चुनाव आयोग ने जानकारी दी कि जांच के बाद 23 अप्रैल को जिन 44,376 मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ था, उनमें से किसी पर भी दोबारा मतदान की सिफारिश नहीं की गई।
इसी तरह, तमिलनाडु में 234 विधानसभा क्षेत्रों के 75,064 मतदान केंद्रों की जांच भी शांतिपूर्वक पूरी हुई। यहां भी 4,023 उम्मीदवारों को पूर्व सूचना दी गई थी और 1,825 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में प्रक्रिया संपन्न हुई। यहां भी किसी भी स्थान पर पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पाई गई।
चुनाव आयोग ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और जांच के बाद सभी दस्तावेज फिर से सुरक्षित रूप से सील कर दिए गए हैं। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत डबल-लॉक सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और 24 घंटे सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
चुनाव आयोग ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन में दो बार स्ट्रांग रूम का दौरा करें और वहां के इंतजामों की जांच करें, जबकि डीईओ मुख्यालय स्थित स्ट्रांग रूम का दौरा दिन में एक बार करेंगे, और मुख्यालय से बाहर स्थित स्ट्रांग रूम का दौरा हर 3-4 दिनों में एक बार करेंगे। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी निगरानी के लिए वहां शिविर लगाने की अनुमति दी गई है। (MK)
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)