पीएम मोदी को दांत काटने वाली थीं महिला सांसद, कांग्रेस ने की थी हमले की प्लानिंग, संसद की इनसाइड स्टोरी आई सामने AI Generated and wikimedia
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पीएम मोदी को दांत काटने वाली थीं महिला सांसद, कांग्रेस ने की थी हमले की प्लानिंग, संसद की इनसाइड स्टोरी आई सामने

बजट सत्र के सातवें दिन प्रधानमंत्री के अभिभाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण हंगामे की भेंट चढ़ गया।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • बजट सत्र के सातवें दिन कांग्रेस सांसदों के हंगामे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद भाषण नहीं हो सका और बिना अभिभाषण के ही प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

  • भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री पर सुनियोजित साजिश बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने सरकार पर सवालों से भागने और दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

  • इस पूरे घटनाक्रम ने संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

बजट सत्र के सातवें दिन प्रधानमंत्री के अभिभाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण हंगामे की भेंट चढ़ गया। इसी बीच तेलुगुदेशम पार्टी की नेता ने एक निजी चैनल (TIMES NOW) पर इंटरव्यू में बताया है कि कुछ महिलाएं प्रधानमंत्री की तरफ बढ़ रही थी। वो महिलाएं प्रधानमंत्री को दांत से काट भी सकती थी। उनलोगों की पूरी तयारी थी कि योजनाबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाषण देने से रोकना है। इसी योजना के तहत प्रधानमंत्री की तरफ बढ़ते हुए कुछ महिलाओं की उनको दांत से काटने की मंशा थी।

क्या है पूरा मामला

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) बजट सत्र के सातवें दिन अपना धन्यवाद भाषण पढ़ने हेतु तैयार थे। बजट सत्र का भाषण देने हेतु प्रधानमंत्री जैसे ही सदन में पहुंचने वाले थे, शाम 5 बजे के समय, कांग्रेस की महिला सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया था। महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचकर उनका विरोध किया और प्रधानमंत्री को घेरने का प्रयास किया। 8 महिला सांसदों के एक समूह द्वारा प्रधानमंत्री को घेरने की योजना थी। इन महिला सांसदों का नेतृत्व कांग्रेस की महिला सांसद वर्षा गायकवाड़ कर रही थी। विरोध के क्रम में महिला सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे का भी घेराव किया। महिला सांसदों ने निशिकांत दुबे पर कार्रवाई की मांग की। संसदीय कार्य (Parliamentary Affairs) मंत्री किरण रिजुजू से भी महिला सांसदों की तीखी बहस हुई थी।

भाजपा और राजग की तरफ से प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कई सांसदों ने इस तरीके के कृत्य को आपत्तिजनक बताया। भाजपा के सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि यह प्रधानमंत्री ऊपर सुनियोजित तरीके से हमला करने की साजिश थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मात्र कुछ ही देर में आने वाले थे। मगर इस तरीके की साजिश अगर रची जाएगी तो फिर वो कैसे सदन में आ सकते हैं।

वहीं भाजपा (BJP) के सांसद और मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि कांग्रेस के लोग सत्ता को अपनी बपौती समझते हैं। कांग्रेस (Congress) को यह सहन नहीं होता है कि एक गरीब समाज का पिछड़ा व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बना हुआ है।

तेलुगुदेशम पार्टी (TDP) की नेता ने तो यहां तक बताया कि महिला सांसद वहां प्रधानमंत्री को दांत से काटने की तयारी में थी।

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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस (Congress) की राष्ट्रीय महासचिव और सांसद प्रियंका गाँधी ने कहा है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सवालों से डरते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के रेलमंत्री और निशिकांत दुबे महिलाओं का सामना नहीं कर सके और बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से भाग गए। प्रियंका गाँधी आगे कहती हैं कि एक तरफ देश के विपक्ष के नेता, राहुल गाँधी (Rahul Gandhi)को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है, वहीं दूसरे तरफ निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) को सदन में किताबों को पढ़ने की पूरी छूट दी जा रही है। यह दोहरा बर्ताव सदन में नहीं होने दिया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि मैंने पहले ही कहा था कि सदन में प्रधानमंत्री नहीं आएँगे। प्रधानमंत्री मोदी सवालों से डरते हैं। राहुल गाँधी ने आगे कहा अगर प्रधानमंत्री सदन में आते तो मैं उनको जनरल नरवणे की किताब उनको पढ़ने के लिए देता, जिस किताब को मुझे पढ़ने नहीं दिया गया और सदन में बोलने नहीं दिया गया।

क्या संसदीय गरिमा अब संसद से ख़त्म हो रही है ?

उक्त घटना पर भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने कहा कि इस तरीके की हरकतें संसद में पहली बार हुई। कई बार ऐसे मौके आए हैं जब सत्तापक्ष और विपक्ष के बहुत सारे सांसदों ने अलग-अलग घटना पर यह कहा है कि संसद की गरिमा अब धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। बता दें कि भारतीय संसदीय शासन प्रणाली ( Parliamentary System of Government) में लोकतंत्र (Democracy) को मजबूत बनाये रखने के लिए सत्तापक्ष के साथ देश में एक मजबूत विपक्ष को आवश्यक बताया गया है। कभी सांसदों के निलंबन पर विपक्ष यह आरोप लगाता है भाजपा संसदीय गरिमा को खत्म कर रही है, तो कभी तीखे सवाल पूछने पर सत्तापक्ष यही आरोप विपक्ष पर लगाता है।

संसद (Parliament) में बहस, विरोध या अपनी बात रखने की गरिमा होती है । देश में कभी नेहरू और डॉ राम मनोहर लोहिया (Dr. Ram Manohar Lohia) के बीच भी बहस होती थी, अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर (Chandrashekhar Singh) के बीच भी बहस होती थी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) के बीच बहस होती थी, परन्तु संसदीय गरिमा (Parliamentary Values) का ख्याल रखा जाता था। सांसदों के शब्दों में अलंकार के साथ धार होते थे, जिनके माध्यम से सत्तपक्ष पर प्रहार तो किया जाता था परन्तु संसदीय गरिमा बरकरार रहती थी। लेकिन धीरे-धीरे बहुत कुछ बदलता जा रहा है। नेता अब एक दूसरे पर व्यक्तिगत हमले करने लगे हैं और इससे देश की जनता के असली मुद्दे सदन से गायब होते जा रहे हैं, जिनकी चर्चा के लिए जनता इन सांसदों को सदन में भेजती है।