नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ सेंटर में सामने आया यौन उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न का मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहाँ महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।  AI Generated
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'देवी-देवताओं को गाली देते थे, हमारे ब्रेस्ट छूते थे...', TCS में हुए कांड का पीड़िता ने रोकर बयां किया कॉरपोरेट जगत का खौफनाक सच

नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ सेंटर में सामने आया यौन उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न का मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहाँ महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

Author : Vikas Tiwari

नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ सेंटर में सामने आया यौन उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न का मामला इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहाँ महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 

TCS नासिक मामला: उत्पीड़न और अपमान की दास्तां:

नासिक के टीसीएस (Nasik TCS) बीपीओ में कार्यरत एक महिला कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) में जो बातें सामने आई हैं, वे न केवल डराने वाली हैं बल्कि कार्यस्थल की सुरक्षा पर भी बड़े सवाल उठाती हैं। पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि जून 2025 में टीसीएस ज्वाइन करने के बाद से ही उसे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप:

महिला के अनुसार, शाहरुख कुरैशी और रजा मेमन जैसे टीम लीडर्स ने उसे लंबे समय तक परेशान किया। शिकायत में कहा गया है कि रजा मेमन बिना किसी काम के ट्रेनिंग रूम में आता था और भद्दे कमेंट्स करता था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे कई बार गलत तरीके से छुआ गया और उसे प्लेयर जैसे आपत्तिजनक उपनामों से संबोधित किया जाता था। महिला का कहना है कि जब उसने विरोध किया, तो उसे करियर खराब करने की धमकी दी गई।

धार्मिक भावनाओं को ठेस और धर्मांतरण का दबाव:

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू धार्मिक प्रताड़ना से जुड़ा है। पीड़िता ने बताया कि आरोपी उसे अपने धर्म के रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर करते थे। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने हिंदू देवी-देवताओं के प्रति अभद्र टिप्पणी की और उसे अपमानित किया। उसे मांसाहारी भोजन खाने के लिए मजबूर किया गया और यह कहा गया कि यदि वह सुरक्षित रहना चाहती है, तो उसे अपनी वेशभूषा और जीवनशैली बदलनी होगी।

इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की हैं और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। टीसीएस ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू कर दी है।

नागपुर का ताजा घटनाक्रम: एनजीओ संचालक की गिरफ्तारी

टीसीएस नासिक का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि महाराष्ट्र के ही नागपुर से लगभग वैसा ही एक और मामला सामने आया है। नागपुर पुलिस ने एक एनजीओ चलाने वाले शख्स, रियाज काजी को गिरफ्तार किया है। यह मामला टीसीएस केस से काफी मिलता-जुलता है, जिसके कारण महाराष्ट्र एटीएस (ATS) भी इस जांच में शामिल हो गई है।

एनजीओ की आड़ में धर्मांतरण का खेल:

रियाज काजी (Riyaz Kaji) 'फिकर फाउंडेशन' और 'पढ़े हम, पढ़ाए हम' नाम से एनजीओ चलाता था। आरोप है कि वह अपने एनजीओ (Nagpur NGO) में काम करने वाली युवतियों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाता था। पीड़ित महिलाओं ने पुलिस को बताया कि काजी उन्हें इस्लामिक ड्रेस कोड (हिजाब/बुर्का) पहनने के लिए मजबूर करता था और उन्हें हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काता था।

छेड़छाड़ और साइबर उत्पीड़न:

काजी पर न केवल धार्मिक जबरदस्ती बल्कि छेड़छाड़ और साइबर उत्पीड़न के भी आरोप लगे हैं। मानकापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी महिलाओं के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार करता था और मना करने पर उन्हें बदनाम करने की धमकी देता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या नासिक और नागपुर के इन दोनों मामलों के पीछे कोई संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है। 

प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई:

नासिक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि टीसीएस के मानव संसाधन (HR) विभाग ने पीड़िता की शिकायतों को नजरअंदाज किया था। इसी लापरवाही के कारण पुलिस ने एचआर के एक सहायक महाप्रबंधक (AGM) को भी गिरफ्तार किया है, क्योंकि उन्होंने 'POSH' (Prevention of Sexual Harassment) नियमों का पालन नहीं किया था।

वहीं नागपुर मामले में पुलिस आयुक्त ने साफ किया है कि एनजीओ की फंडिंग और अन्य संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। एटीएस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन घटनाओं के पीछे कोई विदेशी फंडिंग या सोची-समझी साजिश तो नहीं है।

टीसीएस जैसी प्रतिष्ठित कंपनी और समाज सेवा के नाम पर चल रहे एनजीओ में इस तरह की घटनाओं का होना कॉर्पोरेट जगत और सामाजिक संस्थाओं के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' है। यह मामले न केवल महिला सुरक्षा की पोल खोलते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि कैसे कार्यस्थल पर धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में, दोनों ही मामलों में कानूनी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। नासिक की पीड़ित महिलाओं ने साहस दिखाते हुए जिस तरह अपनी आवाज उठाई है, उसने कई अन्य पीड़ितों को भी सामने आने के लिए प्रेरित किया है। सरकार और पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी कार्यस्थल पर इस तरह के घिनौने कृत्य करने का साहस न कर सके।

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