मध्य प्रदेश में जमीन के मामले में सरकारी अधिकारियों के नाम पर बड़ा खुलासा हुआ है। आईएएस और आईपीएस स्तर के अधिकारियों ने जमीन को सस्ते दामों में किसानों से खरीद लिया और बाद में इसी जमीन का दाम बढ़कर कई गुना ज्यादा हो गया है। ऐसे में अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठने लगा है। Files
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मध्यप्रदेश: 50 IAS-IPS अफसरों ने मिलकर किया 'लैंड स्कैम'! जहाँ खरीदी जमीन वहीं से निकला बायपास, रातों-रात 5 करोड़ बन गए 65 करोड़

मध्य प्रदेश का 'गराड़ी घाट जमीन प्रकरण' नौकरशाही में 'इनसाइडर ट्रेडिंग' का गंभीर मामला है। यहाँ 50 IAS-IPS अधिकारियों ने गोपनीय सूचना का लाभ उठाकर वेस्टर्न बायपास की घोषणा से ठीक पहले किसानों से कौड़ियों के दाम जमीन खरीदी।

Author : Pradeep Yadav

  • मध्य प्रदेश का 'गराड़ी घाट जमीन प्रकरण' नौकरशाही में 'इनसाइडर ट्रेडिंग' का गंभीर मामला है। यहाँ 50 IAS-IPS अधिकारियों ने गोपनीय सूचना का लाभ उठाकर वेस्टर्न बायपास की घोषणा से ठीक पहले किसानों से कौड़ियों के दाम जमीन खरीदी। मात्र 16 महीनों में जमीन की कीमत 11 गुना बढ़ गई, जो नीतिगत मिलीभगत और भ्रष्टाचार के संगठित स्वरूप को दर्शाता है।

लोकतंत्र में सिविल सेवा के अधिकारियों को समाज का रक्षक और विकास का संवाहक माना जाता है। लेकिन जब सत्ता और सूचना का अधिकार रखने वाले ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारी निजी लाभ के लिए सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने लगें, तो यह पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। मध्य प्रदेश से सामने आया 'गराड़ी घाट जमीन प्रकरण' केवल भूमि की खरीद-बिक्री का मामला नहीं है, बल्कि यह 'इनसाइडर ट्रेडिंग' और हितों के टकराव (Conflict of Interest) का एक ज्वलंत उदाहरण है।

अक्सर यह देखा गया है कि नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में शामिल अधिकारियों को पहले से पता होता है कि भविष्य में विकास योजनाएं कहाँ से गुजरेंगी। जब इस गोपनीय सूचना का उपयोग व्यक्तिगत निवेश के लिए किया जाता है, तो यह न केवल नैतिक पतन है, बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।

मध्य प्रदेश में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा

मध्य प्रदेश में जमीन के मामले में सरकारी अधिकारियों के नाम पर बड़ा खुलासा हुआ है। आईएएस और आईपीएस स्तर के अधिकारियों ने जमीन को सस्ते दामों में किसानों से खरीद लिया और बाद में इसी जमीन का दाम बढ़कर कई गुना ज्यादा हो गया है। ऐसे में अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठने लगा है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का है। राजधानी में वैसे ही जमीन की कीमत में उछाल बना रहता है, लेकिन आईएएस और आईपीएस स्तर के अधिकारियों ने पूरे सूबे की नींद उड़ा दी है। साल 2022 में भोपाल के गराड़ी घाट गांव में किसानों से जमीन खरीदी गई। यह जमीन देश के अलग-अलग हिस्से में कार्यरत लगभग 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने एक ही दिन खरीदी। जमीन खरीदने के मात्र 16 महीने बाद यहाँ से वेस्टर्न बायपास निकाला गया है, जिसकी वजह से इसकी कीमत में भारी उछाल देखने को मिला है।

कैसे जारी रहा खेल?

दरअसल, जमीन खरीदने का मामला 2022 का है, लेकिन कहानी में असली मोड़ 2024 में आया। जानकारी के मुताबिक, जमीन की रजिस्ट्री 5 करोड़ 50 लाख रुपए में हुई थी, जबकि इसकी वास्तविक बाजार कीमत 7 करोड़ 78 लाख रुपए थी। 31 अगस्त 2023 को मध्य प्रदेश की सरकार ने यहाँ से वेस्टर्न बायपास निकालने की अनुमति दे दी। बताया जा रहा है कि वेस्टर्न बायपास लगभग 3200 करोड़ रुपए का है।

बायपास निकालने के पीछे अधिकारियों की मिलीभगत बतायी जा रही है। इसके बाद साल 2024 में कृषि भूमि को आवासीय भूमि में तब्दील कर दिया गया। कृषि भूमि को आवासीय भूमि में आसानी से कैसे बदला गया, इसके बारे में भी अब जाँच की मांग उठ रही है।

मात्र 16 महीने में 11 गुना फायदा कैसे?

जमीन खरीदने के समय इसकी कीमत 82 रुपये प्रति वर्ग फुट बतायी गई थी। जमीन खरीदने के मात्र 16 महीने बाद इसकी कीमत 557 रुपये प्रति वर्ग फुट बतायी जा रही है। सर्कल रेट बढ़ने की वजह से आसपास की जमीनों की कीमत भी बढ़ गई है। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इलाके की जमीनों की कीमत लगभग 2,500 रुपये से 3,000 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है। इस हिसाब से जिस जमीन को अधिकारियों ने खरीदा था, उसकी वास्तविक कीमत लगभग 55 से 65 करोड़ रुपए के बीच हो गई है।

इस मामले से अधिकारियों के नैतिकता पर सवाल खड़े होते जा रहे हैं। यह मामला यह स्पष्ट करता है कि भ्रष्टाचार अब केवल सीधे लेनदेन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी योजनाओं के जानकारी का दुरुपयोग कर संपत्ति बनाना भ्रष्टाचार का नया और खतरनाक स्वरूप है। गराड़ी घाट में 50 अधिकारियों का एक साथ जमीन खरीदना यह दर्शाता है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित संगठित नेटवर्क था।

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