उत्तर पूर्व एक बार पुनः हिंसात्मक आग की चपेट में आ चुका है। मणिपुर के उखरुल जिले के लिटान के आस-पास के गांवों में उग्रवादियों ने रात भर में कई घरों में आग लगा दिया।  AI Generated
राष्ट्रीय

मणिपुर में फिर क्यों भड़की हिंसा? 5 दिन के लिए इंटरनेट बैन, जानें क्या है कुकी-नागा की लड़ाई?

उत्तर पूर्व एक बार पुनः हिंसात्मक आग की चपेट में आ चुका है। मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए है। मणिपुर के उखरुल जिले के लिटान के आसपास के गांवों में उग्रवादियों ने रात भर में कई घरों में आग लगा दिया।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • उखरुल जिले में हिंसा और प्रशासनिक कदम: मणिपुर के उखरुल जिले के लिटान क्षेत्र में सामुदायिक तनाव के बाद रात में आगजनी और गोलीबारी हुई, जिसमें करीब 30 घर जला दिए गए। हालात काबू में करने के लिए प्रशासन ने पूरे जिले में कर्फ्यू लगाया और 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं।

  • हिंसा की वजह और घटनाक्रम: 8 फरवरी 2026 को एक तांगखुल नगा व्यक्ति पर कथित हमले के बाद तनाव बढ़ा। बातचीत विफल होने पर दोनों समुदायों के बीच जवाबी हिंसा शुरू हुई, कुकी समुदाय की आवाजाही पर पाबंदी लगी और मामला सामूहिक हिंसक संघर्ष में बदल गया, जिससे बड़े पैमाने पर पलायन हुआ।

  • राजनीतिक पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ: राष्ट्रपति शासन हटने (4 फरवरी 2026) के तुरंत बाद यह हिंसा भड़की। नगा–कुकी संघर्ष की जड़ें पहाड़ी इलाकों की सामुदायिक भूमि और पहचान के पुराने विवादों में हैं, जो समय-समय पर हिंसक रूप लेता रहा है और जिसमें कई संगठनों की भूमिका रही है।

उत्तर पूर्व एक बार पुनः हिंसात्मक आग की चपेट में आ चुका है। मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए है। मणिपुर के उखरुल जिले के लिटान के आस-पास के गांवों में उग्रवादियों ने रात भर में कई घरों में आग लगा दिया। हालात पर नियंत्रण पाने के लिए मणिपुर की नई सरकार ने 5 दिनों तक इंटरनेट बंद कर दिया है जिससे किसी भी प्रकार के अफवाह को रोका जा सके। साथ ही प्रशासन ने पूरे जिले में कर्फ्यू लगा दिया है। जानकारी के अनुसार, अभी तक 30 घरों में आग लगाई गई है और आगजनी के साथ ही ताबड़तोड़ गोलीबारी भी हुई है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल मणिपुर (Manipur) में सामुदायिक टकराव काफी लम्बे समय से चला आ रहा है। कुकी-जो समुदाय और नागा समुदाय के बीच काफी लम्बे समय से संघर्ष देखने को मिलते रहे हैं। 8 फरवरी 2026 को एक तांगखुल नागा व्यक्ति पर कथित हमला हुआ। प्रशासन के मुताबिक, लिटन गांव में सात-आठ लोगों द्वारा तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। शुरुआती तौर पर उम्मीद जताई जा रही थी कि मामला बातचीत से सुलझ जाएगा, लेकिन रविवार को प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी।

इसके बाद सोमवार आधी रात को हालात बिगड़ गए। कुछ बदमाशों ने लीटन सारेइखोंग गांव में तांगखुल नागा समुदाय के घरों को आग के हवाले कर दिया। फलस्वरूप दूसरे समुदाय की ओर से भी प्रतिक्रिया में दूसरे समुदाय के घरों को निशाना बनाए गया। हमले के पश्चात् मामला काफी गर्म हो चुका था। मामले को लेकर नागा गांवों के लोग पास के एक कुकी गांव के मुखिया के पास पहुंचे और कथित हमलावरों को उनके सामने पेश करने की मांग की। इसके बाद स्थिति थोड़ी अनियंत्रित होते दिखाई पड़ी थी।

इसके बाद नागा समुदाय के लोगों ने कुकी समुदाय की आवाजाही पर पाबंदी लगा दी थी। यह मामला उलझता चला गया और सामूहिक हिंसात्मक संघर्ष में तब्दील हो गया। स्थिति को काबू में रखने के लिए प्रशासन ने पूरे उखरुल जिले में कर्फ्यू लगा दिया है। पुलिस के मुताबिक सुरक्षा बलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सुरक्षा बलों से नाराज़गी

स्थानीय लोगों ने जब अपना घर छोड़कर जाना शुरू किया तो उनका कहना है कि सुरक्षा बलों ने स्थिति नियंत्रण नहीं बनाया। सोशल मीडिया पर लोगों ने आगजनी से सम्बंधित तमाम तस्वीरें साझा करते हुए सुरक्षा बलों की नाकामी पर नाराज़गी ज़ाहिर की है। दूसरी तरफ मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने कहा है कि अब तक कम से कम 21 मकानों के जलने की पुष्टि हुई है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। बीते दो दिनों से लिटान सारेइखोंग और आस-पास के कुकी बहुल गांवों से सैकड़ों लोग पलायन कर रहें हैं जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं और ये लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं। वहीं कई परिवारों ने कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के मोटबुंग और सैकुल क्षेत्रों में शरण ली है।

राष्ट्रपति शासन जैसे हटाया हिंसात्मक संघर्ष पुनः प्रारंभ

बता दें कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन (President's Rule) 13 फरवरी 2025 को लागू किया गया था। हाल ही में 4 फरवरी 2026 को यह शासन हटाया गया।

इसके बाद भाजपा (BJP) के नेता युमनाम खेमचंद सिंह को नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया, जिससे लोकतांत्रिक शासन बहाल हुआ। अब प्रशासन इन घटनाओं पर नियंत्रण करने का भरोसा दे रहा है। हालांकि लोगों कि प्रशासन से नाराज़गी भी दिखाई दे रही है। वहीं अगला मणिपुर (Manipur) विधानसभा चुनाव साल 2027 में होना तय है।

एक नज़र मणिपुर में सामुदायिक हिंसा के इतिहास पर

मणिपुर में नागा–कुकी संघर्ष (Naga and Kuki conflict) की जड़ें काफी पुरानी हैं। दरअसल, मणिपुर (Manipur) के पहाड़ी क्षेत्रों में सामुदायिक भूमि को लेकर दोनों के बीच काफी लम्बे समय से संघर्ष होता चला आ रहा है। नागा (Naga) समुदाय के लोगों का कहना है कि कूकी लोग ब्रिटिश काल में उनकी परंपरागत जमीन पर बसाए गए हैं। उनका कहना है कि कुकी समुदाय के लोग बाहरी लोग हैं। पहाड़ी क्षेत्र पर नागा समुदाय ‘ग्रेटर नगालिम’ के नाम से अपना परंपरागत अधिकार बताते हैं।

दूसरी तरफ कुकी (Kuki) समुदाय का कहना है कि कुकी लोग बाहर से नहीं बल्कि परंपरागत रूप से यहीं के हैं। उनका कहना है कि इस इलाके में ऐसी कई सारी बस्तियां हैं जो बहुत सालों से बनी हुईं हैं। इसी आधार बनाकर कुकी लोग खुद को यहाँ का वैध पैतृक निवासी मानते हैं। यह संघर्ष उनके बीच मतभेद को बढ़ाता चला गया और यह मतभेद इन समुदायों के बीच समय-समय पर अलग-अलग कारणों से हिंसात्मक संघर्ष का रूप धारण करते हुए दिखाई पड़ता है। इन समुदायों के आपसी संघर्ष में इनके बहुत सारे संगठनों का योगदान होता है।