2026 के चुनावों में धुरंधर और द केरल स्टोरी 2 जैसी फिल्मों के प्रभाव का परीक्षण होना है। जहाँ असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे जीत का पैमाना बताया , वहीं तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भाजपा के लिए राह कठिन है। AI Generated
राष्ट्रीय

कश्मीर फाइल्स से धुरंधर तक: फिल्में तय करेंगी असम, केरल और तमिलनाडु का चुनावी परिणाम !

फिल्मों द्वारा बनाया गया शोर हमेशा वोट में तब्दील नहीं होता। उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं। अयोध्या (फैजाबाद) में भाजपा की हार यह साबित करती है कि जमीनी मुद्दे और जातीय समीकरण अक्सर फिल्मी नैरेटिव पर भारी पड़ते हैं।

Author : Pradeep Yadav

  • भारत में एनटीआर और जयललिता के दौर से शुरू हुई फिल्मी छवि की राजनीति अब विचारधारात्मक फिल्मों (जैसे द कश्मीर फाइल्स, द केरल स्टोरी, धुरंधर) तक पहुँच गई है।

  • आंकड़े बताते हैं कि फिल्मों द्वारा बनाया गया शोर हमेशा वोट में तब्दील नहीं होता। उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं। अयोध्या (फैजाबाद) में भाजपा की हार यह साबित करती है कि जमीनी मुद्दे और जातीय समीकरण अक्सर फिल्मी नैरेटिव पर भारी पड़ते हैं।

  • 2026 के चुनावों में धुरंधर और द केरल स्टोरी 2 जैसी फिल्मों के प्रभाव का परीक्षण होना है। जहाँ असम में हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे जीत का पैमाना बताया , वहीं तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भाजपा के लिए राह कठिन है।

धुरंधर मूवी की चर्चा चारों तरफ चल रही है। इस मूवी को लेकर दो पक्ष आमने-सामने हुए हैं। इसी बीच आलोचकों द्वारा यह बात कही जा रही है कि इस फिल्म के माध्यम से आज की मोदी सरकार के गलत करतूतों को सही बताने की कोशिश की गई है और समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाया गया है। देश के पांच राज्यों में चुनाव होने ही वाला है। ऐसे में चुनावों पर फिल्म का कितना असर पड़ता है आइए इसको समझते हैं

फिल्म का चुनावों से क्या है रिश्ता 

एक बहुत अच्छी कहावत है कि अभिनेता परदे का कलाकार होता है और नेता हकीकत का कलाकार होता है। भारत में वोट की राजनीति का इतिहास बहुत लंबा है। समय-समय पर राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाए गए हैं।

राजनीति को फिल्म के माध्यम से प्रभावित करने की प्रथा बहुत पहले से चली आ रही है। एन टी रामाराव और जयललिता को फिल्म जगत में बहुत प्रसिद्धि हासिल हो चुकी थी। पर्दे वाली छवि को राजनीति में लाने की कला यहीं से शुरू होती है। ये शख्सियत थे जिन्होंने खुद को फिल्म की दुनिया से बाहर निकालकर राजनीति को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया।

हाल के दिनों में द कश्मीर फाइल्स (2022), द केरल स्टोरी (2023), द साबरमती रिपोर्ट (2024) फिल्मों की बहुत चर्चा हो रही। यह अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा ने ध्रुवीकरण के लिए नया हथियार इजात किया है। राजनीति में जो प्रभाव बहुत सारी रैलियां करने से नहीं बनता है, उस प्रभाव को जमाने का काम तीन घंटे के फिल्म कर देते हैं।

यह भी पढ़ें : बंगाल चुनाव से पहले BJP ने कर दिया खेला, रेप पीड़िता की मां को इस सीट से दिया चुनाव का टिकट

चुनावी सफलता में फिल्मों का किरदार 

द कश्मीर फाइल्स (2022) फिल्म को लेकर चर्चा काफी हुई थी। एक तरफ तो इस बात में कोई शक नहीं है कि कश्मीर फाइल्स मूवी से बहुत सारे लोगों के दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ा। साल 2023 में द केरल स्टोरी फिल्म रिलीज हुई थी। उसके ठीक बाद कर्नाटक का चुनाव था। चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने फिल्म का जिक्र अपने भाषणों में किया था लेकिन कर्नाटक चुनाव में भाजपा को हार का समान करना पड़ा। 

वहीं साल 2024 में लोकसभा का चुनाव हुआ था। इस चुनाव में भाजपा पहले के मुकाबले कमजोर साबित हुई। यहाँ तक कि अयोध्या की सीट जो फैजाबाद के नाम से जाना जाता है, वह सीट भी भाजपा हार गई। अयोध्या के फैजाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी के दलित नेता अवधेश प्रसाद ने बीजेपी के लल्लू सिंह को पराजय के भवसागर में धकेल दिया।

बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 71 सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2019 में 62 और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में 80 सीट में से केवल 33 सीट ही जीत सकी। उत्तर प्रदेश के आंकड़ों पर बात इसलिए की जा रही है क्योंकि वहाँ बीजेपी की डबल इंजन वाली सरकार है और लोकसभा चुनाव पर बीजेपी समर्थित फिल्मों का असर शून्य के बराबर रहा।

यह भी पढ़ें : केरल का पहला चुनाव, पूरी दुनिया में बना एक मिसाल ! महज 28 महीने बाद बर्खास्त हुई पहली गैर-कांग्रेसी सरकार

राज्यों के चुनाव पर कैसे पड़ेगा फिल्म का प्रभाव 

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि धुरंधर फिल्म अगर सफल हो रही है तो इसका मतलब बीजेपी चुनाव में जीत रही है। वहीं  27 फरवरी 2026 को द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड (The Kerala Story 2: Goes Beyond) फिल्म रिलीज हुई। यह फिल्म ऐसे समय आई है जब देश के पांच राज्यों में चुनाव सर पर है। अनुमान यह लगाया जा रहा है कि इस फिल्म का प्रभाव चुनाव पर पड़ेगा। साल 2022 से अब तक फिल्मों का आकलन करने पर यही नजर आता है कि खास किस्म की विचारधारा से प्रेरित फिल्में राजनीतिक हथियार के तौर पर उतनी सफलता नहीं दे सकी हैं जितनी उम्मीद लगाई गई थी।

यह निश्चित तौर पर कहना बहुत मुश्किल है कि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के चुनावी समर में भाजपा के लिए ये फिल्में चुनावी सफलता का आधार बनेंगी। तमिलनाडु जैसे राज्यों में आज भी द्रविड़ आंदोलन और तमिल अस्मिता का प्रभाव है जो बीजेपी या अन्य विपक्षी दलों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। वहीं केरल में यूडीएफ बनाम एलडीएफ की लड़ाई में भाजपा के लिए यह चुनाव आसान है या मुश्किल, इसका फैसला 4 मई 2026 को हो जाएगा।

यह भी देखें :