DGP रामचंद्र राव का वीडियो वायरल, सरकार ने सस्पेंड किया; राव ने AI-फर्जी कहा।
सिद्धारमैया बोले: दोषी कोई भी हो, कार्रवाई होगी।
पुराने मामलों का हवाला देकर पुलिस सिस्टम पर सवाल उठे।
कर्नाटक में डीजीपी रैंक के अधिकारी रामचंद्र राव के मामले ने देश के अंदर सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फ़िर से लोगों को सोचने पर मज़बूर कर दिया है। रामचंद्र राव से सम्बंधित वीडियो में जिस तरीके से एक अधिकारी के द्वारा वर्दी पहनकर उसके मूल्यों को क्षीण करते हुए देखा गया, उसने लोगों के ज़हन में पुलिस के भरोसे के प्रति शंका खड़ा कर दिया है। आरोप लगने के पश्चात् राव ने इस मामले से पल्ला झड़ते हुए इसे एआई (AI) से प्रभावित वीडियो बताया और मामले से अनभिज्ञ होने का बयान दिया है।
बता दें कि कर्नाटक के डीज़ीपी (DGP) रामचंद्र राव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में रामचंद्र राव कुछ महिलाओं के साथ अपने ऑफिस (Office) में ही अश्लील हरकतें करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए कर्नाटक सरकार ने रामचंद्र राव को निलंबित कर दिया है। वहीं रामचंद्र राव ने अपने बचाव में कहा है कि ये वीडियो एआई (AI) से प्रभावित है। उन्होंने कहा है कि इस तरीके की कोई घटना उनके साथ हुई है ,ऐसी उनको बिल्कुल ख़बर नहीं है। यह वीडियो फ़र्ज़ी है। मामले की जांच गम्भीरता से कराई जानी चाहिए।
रामचंद्र राव सन 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। लम्बे समय तक कार्य करने के पश्चात् साल 2023 में डीजीपी (DGP) रैंक के अधिकारी के रूप में उनकी नियुक्ति की गयी थी और रामचंद्र राव साल 2026 में सेवानिवृत होने वाले थे। लेकिन इस तरीके की घटना ने पुलिस महकमा में उनके द्वारा दी गयी सेवा को धूमिल कर दिया है। हालांकि मामले से सम्बंधित बातचीत हेतु रामचंद्र राव फ़िलहाल सिद्धारमैया (Siddaramaiah) सरकार से संपर्क में हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) से मामले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा है कि कोई भी पुलिस अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। फ़िलहाल रामचंद्र राव को उनके पद से निलंबित किया जा चुका है।
बता दें कि इससे पहले रामचंद्र राव की सौतेली बेटी रान्या राव को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 14.8 किलोग्राम सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। राजस्व खुफिया निदेशालय ने रान्या राव के ऊपर 102 करोड़ का जुर्माना लगाया और एक साल की सजा भी सुनाई गयी।
बता दें कि रामचंद्र राव (Ramchandra Rao) का यह मामला पहला मामला नहीं है जब किसी अधिकारी को इस तरीके की घटना में संलिप्त पाया गया है। इसके पहले राजस्थान में भी इस तरीके की घटना में आईपीएस (IPS) अधिकारी को संलिप्त पाया गया और नौकरी ख़त्म कर दी गयी। साल 2009 बैच के अधिकारी पंकज चौधरी को अपनी पत्नी होने के बावजूद किसी दूसरी महिला के साथ सम्बन्ध बनाने के मामले में दोषी पाया गया था और साल 2019 में ही उनको अखिल भारतीय सेवा नियमावली के उल्लंघन के आधार पर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
वहीं दूसरी घटना पंजाब के पूर्व डीजीपी (DGP) रहे के.पी.एस. गिल(K. P. S. Gill) के ऊपर साल 1988 में एक महिला के द्वारा आरोप लगाए जा चुका था। इस मामले ने उस समय के शीर्ष अधिकारियों के ऊपर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया था। के पी एस (K. P. S. Gill) गिल ने चंडीगढ़ के एक पार्टी में आईएएस अधिकारी रूपन देओल बजाज (Rupan Deol Bajaj) के साथ अनैतिक व्यवहार किया। रुपन देओल ने गिल के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज़ कराई। साल 1996 में निचली अदालत ने के पी एस गिल को दोषी ठहराया। वहीँ जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो 2005 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भी गिल को पूर्ण रूप से दोषी ठहराया।
साल 2018 में कर्नाटक में ही बेंगलुरु ग्रामीण के एस पी रहे भीमाशंकर गुलेड का वीडियो वायरल हुआ था। उस समय भी प्रशासन के ऊपर प्रश्न चिन्ह खड़े हो चुके थे। आईपीएस गुलेड के ऊपर आरोप लगा था कि उन्होंने एक महिला के मोबाइल पर आपत्तिजनक वीडियो भेजकर उनके साथ गलत व्यवहार करने का प्रयास किया। महिला के पति ने आईपीएस (IPS) गुलेड के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज़ कराई थी।
हाल ही में ओडिसा में भी इस तरीके की घटना देखने को मिली थी। जगतपुरसिंह में पुलिस निरीक्षक तपन कुमार नाहक के ऊपर आरोप लगा कि नाहक ने एक महिला होमगार्ड को शादी का झूठा वादा किया और फिर उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध भी बनाए थे। बाद में डी जी पी (DGP) ने उसको निलम्बित कर दिया। उसके ऊपर अवैध गांजा में सम्मिलित होने का आरोप भी पहले लग चुका था।
बता दें कि इस तरीके की घटनाएं समाज में पुलिस के नकारात्मक छवि को गढ़ती हैं, जिससे समाज में सुरक्षा व्यवस्था के ऊपर से लोगों का भरोसा डगमगाने लगता है।
UPSC CSE के सिलेबस (Syllabus) में एथिक्स (Ethics) पढ़कर परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों के नैतिकता पर सवाल बनता है कि इतना गहन अध्ययन करने के पश्चात् भी अधिकारियों के अंदर नैतिकता का सृजन नहीं हो पा रहा है।
LBSNAA (Lal Bahadur Shastri National Academy Of Administration) मसूरी में और SVPNPA (Sardar Vallabhbhai Patel National Police Academy) हैदराबाद में इतनी सारी ट्रेनिंग के बाद भी इतनी सारी घटनाओं में पुलिस अधिकारियों को संलिप्त पाया जाना निराशाजनक है और जनता के मन में पुलिस के प्रति संदेह भरा प्रश्न खड़ा करता है।
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