भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल कॉमर्स सेक्टर को एक साझा मंच देने के उद्देश्य से इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) ने 'ई-कॉमर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ईसीसीआई)' की शुरुआत की है। यह देश का अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय मंच है, जो सरकार, उद्योग और अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाकर भारत के 120 अरब डॉलर (120 बिलियन डॉलर) के डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम को मजबूत करने का काम करेगा।
नई परिषद का उद्देश्य नीति निर्माण, शोध, नवाचार और उद्योग-सरकार के बीच बेहतर संवाद के जरिए डिजिटल कारोबार के लिए अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी माहौल तैयार करना है।
लॉन्च कार्यक्रम में मुख्य वक्ता और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. लवीश भंडारी ने कहा कि भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र की अगली विकास यात्रा केवल नवाचार से नहीं, बल्कि उद्योग के आपसी सहयोग से तय होगी।
उन्होंने कहा, "ई-कॉमर्स उद्योग को महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर एक साझा आवाज के साथ सामने आना होगा। इससे बेहतर नीति निर्माण, नियामकीय स्पष्टता और ऐसा कारोबारी वातावरण तैयार होगा, जो उपभोक्ताओं, विक्रेताओं और पूरी अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित होगा।"
आईएएमएआई के अनुसार, भारत का डिजिटल कॉमर्स अब केवल ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं है। इसमें अब ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, सर्विस प्लेटफॉर्म, मोबिलिटी, ट्रैवल टेक, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, डिजिटल पेमेंट, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (डीटूसी) ब्रांड, निर्यात, क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कॉमर्स जैसे कई क्षेत्र शामिल हो चुके हैं।
इसी तेजी से बदलते परिदृश्य को देखते हुए एक ऐसे मंच की आवश्यकता महसूस की गई, जो उद्योग और सरकार के बीच नियमित संवाद, शोध और बेहतर नीतियों को बढ़ावा दे सके।
ईसीसीआई के साथ देश और दुनिया की कई बड़ी डिजिटल कंपनियां जुड़ी हैं। इनमें अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्विगी, इटरनल, इंडियामार्ट, मेकमाईट्रिप, इक्सिगो, उबर, रैपिडो, शिपरॉकेट, ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (टीसीआईएल), ईबे, मीशो और टाटा 1एमजी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
ई-कॉमर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ईसीसीआई) डिजिटल कॉमर्स के भविष्य से जुड़े कई रणनीतिक क्षेत्रों पर काम करेगी। इनमें सर्विस और प्रोडक्ट ई-कॉमर्स, क्रॉस-बॉर्डर ई-कॉमर्स एवं डिजिटल व्यापार, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और फुलफिलमेंट, मोबिलिटी सेवाएं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को डिजिटल बाजार से जोड़ना, ट्रैवल टेक्नोलॉजी, उपभोक्ता विश्वास, डिजिटल भुगतान और जिम्मेदार कारोबार को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा परिषद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य के डिजिटल कॉमर्स से जुड़े विषयों पर भी उद्योग और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करेगी।
आईएएमएआई के अध्यक्ष डॉ. शुभो रे ने कहा कि डिजिटल कॉमर्स भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक बन चुका है।
उन्होंने कहा, "डिजिटल कॉमर्स कारोबार करने के तरीके, उपभोक्ताओं तक उत्पाद और सेवाएं पहुंचाने तथा भारतीय कंपनियों को घरेलू और वैश्विक बाजारों से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसकी अगली विकास यात्रा उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी पर निर्भर करेगी। ईसीसीआई इसी उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया है।"
उन्होंने बताया कि यह परिषद नीति निर्माताओं के साथ संवाद, शोध, सर्वोत्तम कारोबारी मानकों के विकास और डिजिटल कॉमर्स से जुड़ी नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ईसीसीआई ने अपने दीर्घकालिक रोडमैप के तहत 'इंडियन ई-कॉमर्स समिट' आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इस वार्षिक सम्मेलन में सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और वैश्विक डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर डिजिटल व्यापार के भविष्य पर चर्चा की जाएगी।
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) की स्थापना वर्ष 2004 में हुई थी। यह एक गैर-लाभकारी उद्योग संगठन है, जिसके 800 से अधिक सदस्य हैं। इनमें भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप भी शामिल हैं। संगठन का उद्देश्य डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना, बेहतर नीतियों की वकालत करना, स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना और उपभोक्ता विश्वास एवं सुरक्षा को मजबूत करना है। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)