गणतंत्र दिवस पर स्कूल में “जिन्ना अमर रहे” नारा, शिक्षक गिरफ्तार।
AMU, JNU और जादवपुर यूनिवर्सिटी में देशविरोधी नारों के आरोप।
क्या शिक्षा संस्थान गलत विचारधाराओं का केंद्र बनते जा रहे हैं?
बिहार (Bihar) हमेशा से ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण की भूमि माना जाता रहा है। नालंदा और विक्रमशिला जैसी विश्वविद्यालयों की विरासत ने इसे “शिक्षा का मंदिर” कहा जाने का गौरव दिया, लेकिन जब इसी धरती पर शिक्षा के संस्थानों से देशविरोधी नारों या जिन्ना-पाकिस्तान से जुड़े नामों की गूँज सुनाई दे, तो सवाल जरूर उठेंगे कि क्या शिक्षा के मंदिर में विद्यार्थियों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है।
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के मौके पर बिहार के सुपौल से हैरान कर देने वाली घटना सामने आई। जहाँ देखा गया कि सुपौल के उच्च विद्यालय में गणतंत्र दिवस के अवसर पर शिक्षक मोहम्मद मंसूर आलम बच्चों से जिन्ना अमर रहे का नारा लगवा रहे थे।
मामला जैसे सामने आया, पुलिस ने एक्शन लिया और शिक्षक को गिरफ्तार किया। पुलिस अब इस मामले की जाँच करेगी लेकिन इस घटना ने ये बता दिया है कि भारत में देशविरोधी ताकते फूलने-फलने की ताक में हैं।
दरअसल, बिहार (Bihar) में शिक्षा के मंदिर में जो हुआ, वो इस बात की गवाही देता है कि इस पवित्र स्थान को देशविरोधी मामले के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बिहार छोड़िये, देश के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं, जब शिक्षण संस्थान को देशविरोधी बयान बाजी के लिए इस्तेमाल किया गया है। आज हम आपको ऐसी ही 3 घटनाओं से अवगत करवाएंगे।
ये मामला साल 2018 का है जब अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University) से देश विरोधी नारों की गूँज सुनाई दी थी। मई का महीना था, और उस समय अलीगढ के तत्कालीन बीजेपी सांसद सतीश गौतम ने यूनिवर्सिटी को एक खत लिखा और ये सवाल किया कि स्टूडेंट यूनियन हॉल (Student Union Hall) में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर क्यों लगी है। इसके जवाब में यूनिवर्सिटी ने कहा कि साल 1938 में जिन्ना को स्टूडेंट यूनियन की लाइफटाइम मेंबरशिप (LifeTime Membership) दी गई थी और ये तस्वीर तभी से वहां ऐतिहासिक तौर पर लगी हुई है।
इसके बाद अलीगढ में काफी बवाल मचा। हिन्दू युवा वाहिनी के संगठनों ने यूनिवर्सिटी के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और जिन्ना मुर्दाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस घटना के दौरान सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए जिसमें यह दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी के भीतर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगे। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने इस वीडियो को फर्जी करार दिया था। मामला जब ज्यादा बढ़ा था, तब पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा था, जिसमे 20 विद्यार्थी घायल भी हुए थे।
ये घटना फ़रवरी 2016 की है और ये भारत के सबसे विवादित और चर्चित घटनाओं में से एक है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawahar Lal Nehru) से देश विरोधी नारे गूंजे थे। 9 फ़रवरी 2016 को जेएनयू (JNU) परिसर में अफजल गुरु (जिसने भारत की संसद पर हमला किया था) की फांसी की बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। अफजल गुरु ने भारत की संसद पर हमला पाकिस्तान के इशारे पर किया था।
इस कार्यक्रम का नाम ''The Country Without A Post Office'' रखा गया था। इस दौरान कथित रूप से यहाँ देश विरोधी नारे लगे थे, जो कुछ इस प्रकार हैं :- "भारत तेरे टुकड़े होंगे" और "अफजल हम शर्मिंदा है, तेरे कातिल ज़िंदा हैं"।
घटना सामने आने के बाद देश में आक्रोश का माहौल पनप गया था। दिल्ली पुलिस ने JNUSU अध्यक्ष कन्हैया कुमार, जो अभी कांग्रेस पार्टी से नेता हैं। उमर खालिद जो जेल में बंद हैं और अनिर्बान भट्टाचार्य पर राजद्रोह का मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार किया गया।
अनिर्बान को अगस्त 2016 में ही बेल मिल गई थी। पुलिस ने जब मामले की जाँच की तब यूनिवर्सिटी की ओर से यह कहा गया कि नारे लगाने वाले कॉलेज के बाहर के लोग थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
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ये घटना मार्च 2025 की है जब पश्चिम बंगाल के जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) में देश विरोधी नारे सुनने को मिले। यूनिवर्सिटी परिसर की दीवारों पर आजाद कश्मीर और फ्री फलस्तीन लिखे देखे गए। घटना सामने आने के बाद काफी बवाल मचा था। जब पुलिस सादे कपड़ों में विश्वविद्यालय के परिसर में गई, तो छात्रों और शिक्षकों ने इसका खूब विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश विरोधी नारे पेटिंग बनाकर यूनिवर्सिटी के गेट नंबर तीन के पास लिखे गए थे। यहाँ यह भी लिखा गया था की फासिस्ट ताकतों (तानाशाही सोच) को खत्म किया जाना चाहिए।
इन नारों के सामने आने के बाद कोलकाता में तनाव का माहौल फ़ैल गया था। राष्ट्रवादी संगठनों ने इसे देश की अखंडता पर हमला बताया था। पुलिस ने इस मामले में 3 छात्रों को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इस बाहरी साजिश बताते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया था।
तो ये थे वो 3 ऐसे मामले जब शिक्षण परिसर से देश विरोधी स्वर सुनाई दी थी।