मणिपुर की राजधानी इंफाल जून 2029 तक राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ने वाला पूर्वोत्तर क्षेत्र का पांचवां राजधानी शहर बन जाएगा। इसके लिए जिरीबाम-इंफाल नई रेलवे लाइन परियोजना पर काम चल रहा है। इसके जून 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिरीबाम को इंफाल से जोड़ने वाली 111 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना लगभग 22,000 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है। जिरीबाम मणिपुर में स्थित है और दक्षिणी असम के कछार जिले की सीमा से लगा है।
वर्तमान में असम की राजधानी दिसपुर (गुवाहाटी के पास), त्रिपुरा की राजधानी अगरतला, अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर और मिजोरम की राजधानी आइजोल भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को आइजोल में बैराबी-सैरांग रेलखंड का उद्घाटन किया था। यह 51.38 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग मिजोरम की राजधानी को रेलवे नेटवर्क से जोड़ता है।
अधिकारी ने बताया कि जिरीबाम-इंफाल नई रेलवे लाइन परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र की सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह रेलमार्ग पहाड़ी और कठिन इलाकों से होकर गुजरता है, जिसके कारण इसमें बड़े पैमाने पर सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है।
हाल ही में एनएफआर (निर्माण) के महाप्रबंधक आशीष बंसल ने परियोजना के जिरीबाम-खोंगसांग, खोंगसांग-आवांगखुल और आवांगखुल-इंफाल खंडों का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण रेलवे ढांचे का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने टनल नंबर 28 और टनल नंबर 12 का भी दौरा किया और सुरंग निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
अधिकारी के अनुसार, रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) अक्टूबर 2026 में खोंगसांग-आवांगखुल खंड का निरीक्षण कर सकते हैं।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल सुरंग नेटवर्क है। पूरी परियोजना में 54 सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 66.47 किलोमीटर होगी।
इनमें टनल नंबर 12 भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग होगी। इसकी लंबाई 11.55 किलोमीटर होगी, जो जम्मू-कश्मीर की बनिहाल-काजीगुंड रेल लाइन पर स्थित प्रसिद्ध पीर पंजाल सुरंग से भी लंबी होगी।
अधिकारी ने कहा कि कठिन भूगर्भीय और पहाड़ी परिस्थितियों में इन सुरंगों का निर्माण इंजीनियरिंग का एक बड़ा उदाहरण है। इसके लिए उन्नत तकनीक, कड़े सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
परियोजना में 15 बड़े और 116 छोटे पुलों का भी निर्माण किया जा रहा है। इनमें नोनी जिले में स्थित पुल संख्या 164 विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस पुल में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्तंभ (पियर) बनाया जा रहा है, जिसकी ऊंचाई 141 मीटर है और इसका निर्माण अंतिम चरण में है।
पुलों का निर्माण ट्रेनों और सड़क यातायात की सुरक्षित एवं निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। जिरीबाम-इंफाल नई रेलवे लाइन पर कुल 11 रेलवे स्टेशन होंगे। इनमें जिरीबाम, वांगाइचुंगपाओ, कंबिरोन हॉल्ट, थिंगौ, खोंगसांग, आवांगखुल, नोनी, तुपुल, हाओचोंग रोड हॉल्ट और इंफाल शामिल हैं।
ये स्टेशन आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराएंगे और यात्री एवं माल परिवहन के महत्वपूर्ण केंद्र बनेंगे।
निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक आशीष बंसल ने सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता और समय पर कार्य पूरा करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्माण कार्यों की लगातार निगरानी और समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए।
अधिकारी ने बताया कि जिरीबाम-इंफाल रेल लाइन बनने से मणिपुर की देश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी काफी बेहतर होगी। इससे यात्रियों को तेज और भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिलेगी, साथ ही आवश्यक वस्तुओं और सामान की आवाजाही भी आसान होगी। यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति देगी।
111 किलोमीटर लंबी जिरीबाम-इंफाल ब्रॉडगेज रेलवे परियोजना की शुरुआत वर्ष 2008 में की गई थी। इसके महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया था।
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पहले कहा था कि उनकी सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना को समय पर पूरा कराने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी, ताकि राज्य की राजधानी देशव्यापी रेलवे नेटवर्क से जुड़ सके।(VR)
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)