जदयू नेता हरि नारायण सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में मतदाताओं को रोका और पीटा जाता है। इसलिए चुनाव सही ढंग से हों, यह निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया के बीच अधिकारियों के ट्रांसफर पर ममता बनर्जी की ओर से सवाल उठाए जाने पर हरि नारायण सिंह ने कहा, "ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनके राज में किस तरह चुनाव हुए, यह सबने देखा है। मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल का चुनाव पूरे देश के मुकाबले बिल्कुल अलग है। वहां का शासन प्रशासन इस तरह का है कि वह चुनाव के समय में मतदाताओं को रोक देता है और मारपीट करा देता है। पुलिस की मदद से लोगों को घरों में पीट दिया जाता है। इसलिए चुनाव सही ढंग से हों, यह निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।"
उन्होंने आगे कहा, "किसी भी राज्य में आचार संहिता लागू होने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार चुनाव आयोग के पास होते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। यह नियम है और इसी अधिकार के तहत आयोग ने बंगाल में अपने ट्रांसफर किए। आयोग को लगता है कि इस अधिकारी के नेतृत्व में चुनाव सही ढंग से नहीं होंगे, तो वह उसका ट्रांसफर करता है। यह सिर्फ पश्चिम बंगाल में नहीं होता है, बल्कि दूसरे राज्यों में भी होता है।"
सीएम योगी के 'रामराज्य' वाले बयान पर जदयू नेता ने कहा, "यह बिल्कुल सही है। 10 से 15 दिन अभी युद्ध की चपेट में हैं। वहां कई तरह के संकट पैदा हो चुके हैं। भारत सरकार की सफलता और दूरदृष्टि के कारण अभी देश में रामराज्य है। देश में किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं है।"
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बयान पर हरि नारायण सिंह ने कहा, "शशि थरूर का यह कहना कि संसद या विधानसभा जनता और देश के विषयों पर चर्चा और बहस का स्थान है, न कि हंगामा करने की जगह है। उनके
इस बयान से मैं सहमत हूं। कभी-कभी होता है कि सदन में हंगामा हो, लेकिन वर्तमान में देखा जा रहा है कि सदन का समय हंगामे में ही जा रहा है।"
राज्यसभा चुनाव के बाद राजद-कांग्रेस में घमासान पर जदयू नेता ने कहा कि यह महागठबंधन के अंदर की बात है। इस विषय पर वे खुद जवाब दे सकते हैं। मेरा मानना है कि प्रजातंत्र में हर कोई अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है।
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)