कैग की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा जीएसटी से संबंधित है, जहाँ लगभग 2,606 करोड़ रुपये की वित्तीय विसंगतियाँ पाई गई हैं।
यह रिपोर्ट उस गुजरात मॉडल की विश्वसनीयता पर प्रहार करती है, जिसे 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रतीक के रूप में पेश किया गया था।
चुनाव से पहले इन तथ्यों का सामने आना भाजपा के तीन दशक पुराने शासन की जवाबदेही और चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है।
कैग की रिपोर्ट में गुजरात सरकार के वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जीएसटी से संबंधित 2,606 करोड़ रुपए के मामले में अनियमितता सामने आने से गुजरात सरकार एक बार फिर चर्चे में है। विधान सभा में जब से कैग की रिपोर्ट रखी गई है इस मामले को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है।
दरअसल, 25 मार्च 2026 को गुजरात विधानसभा में कैग की रिपोर्ट को पटल पर रखा गया। रिपोर्ट के सामने आने पर बहुत सारे सवाल उठने लगे। इस रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में बहुत सारी खामियां हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी से संबंधित लगभग 2,606 करोड़ रुपए को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया है।
जांच में यह सामने आया है कि जीएसटी रिटर्न और वित्तीय रिकार्ड के बीच अंतर पाया गया है। बहुत सारे ऐसे मामले हैं जिसमें सिर्फ पैसे के स्थानांतरण को ही खर्च माँ लिया गया लेकिन कहानी इससे उलट है। पैसे तो स्थानांतरित हुए लेकिन खर्च नहीं हुए हैं। इस बात से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि पैसे की हेराफेरी बड़े पैमाने पर हुई है। ऐसे में सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं कि जो पैसे जिन विभागों को स्थानांतरित किए गए थे उनका इस्तेमाल सही तरीके से हुआ है या नहीं हुआ है।
यह भी पढ़ें : दिल्ली में ‘क्रूज’ कांड! 6.2 करोड़ के टेंडर से कटघरे में दिल्ली की ट्रिपल इंजन सरकार, विवाद के बाद 2 अधिकारी सस्पेंड
साल 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सरकार केंद्र में बनी। इसके पीछे बहुत बड़ी कहानी रची गई थी। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हीरो की तरह प्रस्तुत किया गया था। वहीं गुजरात माडल की चर्चा पूरे देश में हो रही थी। पूरे देश को ऐसा लगता था कि गुजरात भारत का सबसे अच्छा प्रदेश है जहां शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार के दो अंग हैं। धीरे-धीरे गुजरात की असलियत सामने आने लगी है।
आज हालत यह हो गई है कि जीएसटी के रिकार्ड में ही अनियमितता आ रही है। कैग की रिपोर्ट में जिस तरीके से सरकार के तरफ से लापरवाही को दिखाया गया है ऐसा लगता है सरकार के भीतर बहुत बड़ा सड़यंत्र रचा जा रहा है जो जनता के आकांक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है। जो कहानी साल 2013-14 में बनाई गई थी शायद वह काल्पनिक कहानी थी कि गुजरात के एक मॉडल है क्योंकि लगभग 30 वर्षों से भाजपा वहाँ शासन कर रही है, पारदर्शिता का एक तिनका भी वहां नजर नहीं आता है।
लगभग एक साल बाद 2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव होने वाला है। राजनीतिक दलों ने कमर कसना शुरू कर दिया है। इस तरीके से सरकार की लापरवाही उजागर होने से चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है। पिछले तीस वर्षों के शासन में बीजेपी ने गुजरात को जो दिया है उसका हिसाब इस चुनाव में होना बाकी है। इसके पहले कैग की रिपोर्ट में जो बात सामने निकलकर आई है सरकार की जवाबदेही बनती है।
यह भी देखें :