देश में हाइपरलूप, एयर टैक्सी और पॉड टैक्सी जैसे हाईटेक परिवहन प्रोजेक्ट्स बड़े-बड़े वादों के बावजूद धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। मोदी सरकार ने 2020 में हाइपरलूप का सपना दिखाया, आईआईटी मद्रास में टेस्ट ट्रैक और ICF चेन्नई में विकास की घोषणाएं भी हुईं, पर ठोस प्रगति नहीं दिखी। अधूरे वादों से जनता का भरोसा डगमगाने लगा है।
देश में सरकारों द्वारा बहुत सारे वादे किए जाते हैं, लेकिन वे समय पर पूरे नहीं हो पाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला हाइपरलूप टेक्नोलॉजी, एयर टैक्सी और पॉड टैक्सी से जुड़ा है, जो आम जनता के लिए अभी तक सिर्फ एक सपना बनी हुई हैं और धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। सरकारें अपने-अपने वादों से जब मुकरती हैं, तो जनता द्वारा उसे 'जुमला' की संज्ञा दी जाती है। गौरतलब है कि देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बाकायदा ट्वीट करके इन बड़े प्रोजेक्ट्स की जानकारी समय-समय पर देश के सामने रखी थी।
दरअसल, साल 2020 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह आधिकारिक जानकारी दी थी कि भारत में हाइपरलूप टेक्नोलॉजी का विकास किया जाएगा। उस समय यह दावा किया गया था कि इसकी रफ्तार लगभग 1127 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जिस हिसाब से दिल्ली और मुंबई के बीच के लंबे सफर को महज डेढ़ घंटे में तय किया जा सकता था। लेकिन समय बीतने के साथ यह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में जाने लगा और अंततः साल 2023 में सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर एक तरह से विराम लगा दिया।
हालांकि, इसके बाद दिसंबर 2024 को भारत के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक ट्वीट करके जानकारी दी कि भारत का पहला हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक आईआईटी-मद्रास (IIT-Madras) के तैयूर कैंपस में तैयार किया गया है। उन्होंने बताया था कि यह सफल ट्रायल आईआईटी-मद्रास की निगरानी में हुआ था। इसके बाद मार्च 2025 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुनः बताया कि अब हाइपरलूप प्रोजेक्ट को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई में विकसित किया जाएगा। लेकिन इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट अभी तक धरातल पर उतरता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है।
इसी तरीके से देश में 'एयर टैक्सी' चलाने की बात भी जोर-शोर से कही गई थी। शुरुआती चरण में एयर टैक्सी को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में चलाने की बात कही गई थी। हालांकि, अभी तक यह पूरा मामला सिर्फ प्लानिंग फेज में ही अटका हुआ है। नवंबर 2023 में इस प्रोजेक्ट की आधिकारिक घोषणा हुई थी, लेकिन अभी तक इसमें कोई खास सफलता हासिल नहीं हो सकी है। इस प्रोजेक्ट के ब्लूप्रिंट में बताया गया था कि एयर टैक्सी के माध्यम से गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर एयरपोर्ट को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों के कीमती समय को बचाया जा सके।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के नोएडा फिल्म सिटी और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास 'पॉड टैक्सी' चलाने का वादा किया गया था। इस पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट के तहत यह निर्धारित हुआ था कि छोटी-छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक विशेष एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा और ये गाड़ियां उसी ट्रैक पर चलेंगी। इस अत्याधुनिक प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र में भी मंजूरी मिल चुकी है। मुंबई में पॉड टैक्सी प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद महाराष्ट्र के कुर्ला और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) के बीच इसका निर्माण होना तय हुआ है, लेकिन जमीन पर इसका काम अभी भी कछुआ गति से चल रहा है।
लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच का पुल 'भरोसा' होता है। जब बार-बार बड़े-बड़े वादे करके उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, तो आम नागरिकों पर इसका बुरा असर पड़ता है और पूरी राजनीतिक व्यवस्था एवं प्रशासनिक तंत्र से भरोसा उठने लगता है। हालांकि देखना यह है कि जो वादे किए गए थे वे कभी पूरे होंगे या अधूरे ही रह जाएंगे।
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