एपस्टीन फाइल विवाद: जनवरी 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा दस्तावेज़ जारी होने के बाद एक ई-मेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सामने आया, जिसे लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय ने इसे निराधार, अर्थहीन और एक दोषी अपराधी की बकवास बताते हुए खारिज कर दिया।
सरकारी पक्ष और सफाई: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि ई-मेल में सिर्फ प्रधानमंत्री की जुलाई 2017 की आधिकारिक इज़राइल यात्रा का संदर्भ है, इसके अलावा किसी भी तरह का आरोप या प्रमाण नहीं है। पीएम मोदी ने स्वयं इस पर कोई बयान नहीं दिया है।
राजनीतिक घमासान: कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मोदी से जवाब माँगा और आरोप लगाए, जबकि अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि फाइल में कई बड़े नाम जरूर हैं, लेकिन पर्याप्त सबूत न होने के कारण किसी के खिलाफ सीधी कार्रवाई संभव नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम जब से एपस्टीन फाइल में आया है। कांग्रेस पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सवालों की बरसात कर दी है। नरेंद्र मोदी को चारों तरफ से घेरने की पूरी कोशिश विपक्ष के द्वारा की जा रही है। हालांकि मोदी ने खुद सामने आकर इसपर कोई बयान नहीं दिया है। वहीं शनिवार को विदेश मंत्रालय की तरफ से मामले को अर्थहीन और बकवास करार दिया गया है। यह मामला अब तूल पकड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के प्रवक्ता रनणधीर जायसवाल ने मीडिया के सामने आकर कहा, "हमें तथाकथित एपस्टीन फ़ाइलों से एक ईमेल मैसेज की रिपोर्ट मिली है। इसमें प्रधानमंत्री और उनकी इज़रायल यात्रा का ज़िक्र है। जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इज़रायल की आधिकारिक यात्रा के अलावा ई-मेल में बाकी बातें एक दोषी अपराधी की बेकार की बकवास से ज़्यादा कुछ नहीं हैं, जिन्हें पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर देना चाहिए।"
19 दिसंबर 2025 को एपस्टीन (Epstein) फाइल सार्वजनिक की गईं। जब ये फाइल सार्वजनिक हुई, तो इसमें कई मशहूर और ताक़तवर लोगों के नामों का ज़िक्र मिला, जिससे यह तो साफ़ हुआ कि एपस्टीन के संपर्क बहुत ऊँचे स्तर तक थे। इसमें सबसे चर्चित नाम डोनाल्ड ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का था। एपस्टीन को ट्रंप काफी पहले से जानते थे और जो फाइल रिलीज हुई उसमे ट्रंप की तस्वीर भी थी। हालांकि, उनकी कोई गलत तस्वीर सामने नहीं आई। इसलिए उनपर सीधा आपराधिक आरोप सामने नहीं आया है।
दूसरी तरफ जो व्यक्ति सबसे ज्यादा चर्चा में रहा उनका नाम बिल क्लिंटन था, जो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति थे। इस फाइल में उनका एपस्टीन के निजी विमान से यात्रा करने का ज़िक्र मिलता है, साथ ही कई महिलाओं के साथ उनकी तस्वीर भी सामने आई। एक तस्वीर में वो स्विमिंग पुल में नहाते दिखे और आस पास कई महिलाएं भी थी। एक तस्वीर में तो क्लिंटन महिलाओं के कपड़े में नज़र आ रहे थे लेकिन कोई ऐसा अपराध सिद्ध नहीं हुआ, जो उन्हें अदालत के कटघरे में खड़ा करता हो।
इसके साथ ही ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू की भी तस्वीर दिखी, जिनपर एक पीड़िता ने सीधे तौर पर उन पर शोषण का आरोप लगाया था। बाद में उन्होंने क़ानूनी समझौता भी किया।
वहीं, इसमें एपस्टीन की सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल की तस्वीर दिखी, जिसे अदालत ने पहले ही 20 साल की सजा सुनाई है। मैक्सवेल पर नाबालिग लड़कियों को फँसाने और शोषण में मदद करने का आरोप था।
संयुक्त राज्य अमेरिका (America) की न्याय विभाग द्वारा 30 जनवरी 2026 को 3 मिलियन से अधिक दस्तावेज़ जारी किए गए। इन दस्तावेज़ों में एक ई-मेल का हवाला दिया गया, जिसमें कथित रूप से मोदी का जिक्र उनके 2017 के इज़राइल दौरे के संदर्भ में आया था। जब से मोदी का नाम एपस्टीन के साथ उजागर हुआ है तब से बवाल मचा हुआ है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 तक इज़रायल के दौरे पर गए थे। यह दौरा इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बुलावे पर हुआ था। यह पहली बार था जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री इज़रायल गए थे।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बेंजामिन नेतन्याहू से दोनों देशों के रिश्तों और सहयोग पर बात की। उन्होंने राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन से भी मुलाकात की। हाइफा में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और तेल अवीव में भारतीय समुदाय को संबोधित किया था। यह दौरा भारत-इजराइल संबंध के लिए महत्वपूर्ण माना गया। प्रधानमंत्री पर इसी समय एपस्टीन के साथ बातचीत का मामला विवाद का विषय बना हुआ है।
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एपस्टीन (Epstein) के उजागर इ-मेल में कुछ इस तरीके से मोदी के बारे में विवरण है,"भारतीय पीएम मोदी ने सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फ़ायदे के लिए इसराइल में डांस किया और गाना गाया। वो कुछ हफ्ते पहले मिले थे। ये काम कर गया।"
इस पर कांग्रेस ने कहा है, "एपस्टीन का साफ़ कहना है कि मोदी ने मुझसे सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फ़ायदे के लिए इज़रायल में जाकर नाचे और गाए। यह भी कहा कि ये काम कर गया। याद रहे- पीएम मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इज़रायल दौरे पर थे। इसके तीन दिन बाद एपस्टीन ने यह मेल लिखा है। इज़रायल दौरे से ठीक पहले 25-26 जून 2017 को मोदी, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे। जेफ़री एपस्टीन के मेल की कड़ियों को जोड़ें तो समझ आता है कि मोदी, जून 2017 में अमेरिका गए और वहां एपस्टीन से सलाह ली।
इसके एक हफ्ते बाद (4 से 6 जुलाई 2017) मोदी इज़रायल पहुंचे और सलाह के मुताबिक- वहां नाचे और गाए और काम हो गया। अब साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी का जेफ़री एपस्टीन से बहुत ही गहरा और पुराना नाता है, जो भारत के लिए शर्मनाक है। यह मामला राष्ट्रीय गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का है, जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना चाहिए."
कांग्रेस (Congress) की तरफ से पवन खेड़ा ने पूछा है, "नरेंद्र मोदी, जेफ़री एपस्टीन से कैसी सलाह ले रहे थे? मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस फायदे के लिए इज़रायल में नाच और गा रहे थे? एपस्टीन ने लिखा है- 'इट वर्क्ड'...तो इसका क्या मतलब है? नरेंद्र मोदी जी देश जवाब मांग रहा है। सीरियल रेपिस्ट एपस्टीन से आपका क्या रिश्ता है?"
अमेरिका (America) के न्याय विभाग का कहना है कि इस फाइल में बहुत बड़े-बड़े लोगों के नाम हैं। इन बड़े नेताओं में नरेंद्र मोदी समेत डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump), ब्रिटेन प्रिंस एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर, एलन मस्क, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन (Bill Clinton) और पूर्व इज़रायल प्रधानमंत्री एहुद बराक जैसे लोगों के नाम हैं, परन्तु कार्रवाई के लिए जिस तरीके के पर्याप्त सबूतों की आवश्यकता है उन सबूतों का अभाव है। इसलिए सबूतों के अभाव में सीधी कार्रवाई कर पाना मुश्किल है।
न्याय विभाग (Justice Department) के अधिकारी टॉड ब्लेंच ने अपने बयान में कहा है कि फाइल में बहुत सारी तस्वीरें और नाम होना ही काफी नहीं है। नए लोगों के नामों का खुलासा तो हुआ है, पर उनके खिलाफ पर्याप्त सबूतों के अभाव में कार्रवाई नहीं की जा सकती है। वहीं कुछ राजनेताओं का आरोप है कि फाइलों को सार्वजनिक करने में बहुत सारे नियमों कानूनों को दरकिनार किया गया है।