एपस्टीन फाइल में अरविंद केजरीवाल का नाम सामने आया है, लेकिन इसमें उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं बल्कि सिर्फ अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़ा उनका राजनीतिक सफर दर्ज है। AI Generated
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एपस्टीन फाइल में क्यों दर्ज है अरविंद केजरीवाल का नाम? जानिए अन्ना आंदोलन से कनेक्शन

एपस्टीन फ़ाइल्स (Epstein Files) में EFTA00871522.pdf - DataSet 9 नामक एक फाइल है और इसी में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नाम का जिक्र किया गया है।

Author : Mayank Kumar
Reviewed By : Ritik Singh

  • एपस्टीन फाइल्स में कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय नामचीन हस्तियों का जिक्र सामने आया है, जिससे दुनियाभर में हलचल मची हुई है।

  • एपस्टीन फाइल्स के एक PDF में अरविंद केजरीवाल का नाम जरूर दर्ज है, लेकिन उसमें उनके खिलाफ कोई नकारात्मक या आपत्तिजनक जानकारी नहीं है।

  • केजरीवाल ने अन्ना हजारे के आंदोलन से राजनीतिक पहचान बनाई, आम आदमी पार्टी की स्थापना की और मुख्यमंत्री बने, लेकिन बाद में उन पर और उनकी पार्टी पर कई भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे।

एपस्टीन फाइल (Epstein Files) इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। आए दिन इसमें से कोई ना कोई खबर निकलकर सामने आती ही रहती है। खबर भी ऐसी कि जिसे देखने और सुनने के बाद हर किसी की आँखें फटी की फटी रह जा रही हैं। इस फाइल से कई ऐसी महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें सामने आईं है, जिसने समाज का कुकर्मी चेहरा सबके सामने रख दिया है।

उम्र में बड़ी महिलाओं को छोड़िये, इसमें कई छोटी बच्चियों की भी तस्वीर और वीडियों हैं, जिसमें उनके साथ बदसलूकी हुई है। बिल गेट्स, स्टीफेन हॉकिंग, बिल क्लिंटन से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक की आपत्तिजनक बातें निकलकर सामने आई हैं।

एपस्टीन फाइल (Epstein Files) ने ना सिर्फ विश्व पटल पर हंगामा मचाया है, बल्कि भारत में भी ये चर्चा का विषय बन गया है। भारत के भी कई नामचीन हस्तियों के नाम का इसमें जिक्र है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गाँधी से लेकर हरदीप सिंह पूरी के नाम का भी जिक्र है। हालांकि, अभी तक भारत के किसी भी नामचीन हस्ती या नेता का जेफ्री एपस्टीन से सीधा संबंध रखने के मामले की पुष्टि नहीं हुई है।

हालांकि, इतना बवाल मचा ही था कि भारत से एक और नेता का नाम इसमें सामने आ गया है, ये कोई और नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) हैं। आइये जानते हैं, उनके बारे में क्या कुछ लिखा हुआ है?

एपस्टीन फाइल में अरविंद केजरीवाल का भी नाम!

एपस्टीन फ़ाइल्स (Epstein Files) को एक आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड माना है, जिसमें अमेरिकी अरबपति और सेक्स-ट्रैफिकिंग के अपराधों में घिरे जेफ्री एपस्टीन तथा उससे जुड़े नेटवर्क से संबंधित कई अहम जानकारियाँ दर्ज हैं। बता दें कि जेफ्री एपस्टीन की मौत 10 अगस्त 2019 को हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक, एपस्टीन ने जेल की कोठरी में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत की वजह आत्महत्या ही बताई गई।

वहीं,19 दिसंबर 2025 को जब इस फाइल को सार्वजानिक की गई, तो पता चला कि इसमें अदालत से जुड़े काग़ज़ात, कई गवाहों के बयान, उड़ानों का ब्योरा, तस्वीरें और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।

इस फाइल के सामने आने के बाद अब आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के नाम का भी इसमें जिक्र देखने को मिला है। केजरीवाल का नाम देखने के बाद राजनीति की दुनिया में एक बार फिर भूचाल मचा हुआ है।

क्या लिखा है केजरीवाल के बारे में?

गौरतलब है कि एपस्टीन फ़ाइल्स (Epstein Files) जिसे 19 दिसंबर 2025 को रिलीज किया गया था, इसमें EFTA00871522.pdf - DataSet 9 नामक एक फाइल है और इसी में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नाम का जिक्र किया गया है। इस PDF में YouGov द्वारा द टाइम्स के लिए कराया गया एक वैश्विक सर्वे देखने को मिलता है।

PDF में केजरीवाल के बारे में कोई नकारात्मक बात या कोई बहुत बड़ा खुलासा करने जैसा कुछ नहीं है लेकिन उनके बारे में इतना जरूर लिखा, ''अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने अन्ना हजारे के साथ काम किया है।" इस फाइल की तारीख 13 जनवरी 2014 बताई गई है और तब केजरीवाल दिल्ली के सीएम थे।

अन्ना आंदोलन से केजरीवाल ने चमकाई राजनीति

अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने अपनी राजनीति की शुरुआत अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से की। साल 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में लोकपाल कानून (Lokpal Act) की मांग को लेकर देशभर में आंदोलन हुआ, जिसमें केजरीवाल एक अहम रणनीतिकार और चेहरा बनकर उभरे।

वह लगातार मीडिया के सामने सरकार की आलोचना करते दिखे, जिससे उन्हें पहचान मिली। इसके बाद 2012 में उन्होंने अन्ना आंदोलन से अलग होकर आम आदमी पार्टी (AAP) बनाई। केजरीवाल ने खुद को “आम आदमी” का प्रतिनिधि बताया और भ्रष्टाचार, महंगाई और बिजली-पानी जैसे मुद्दों को उठाया और दिल्ली के सीएम बने।

हालांकि, कौन जानता था कि जो केजरीवाल भ्रष्टाचार खत्म करने के इरादे से राजनीति में आए थे, उनपर और उनकी पार्टी पर भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हो जाएंगे। बता दें कि केजरीवाल और उनकी पार्टी पर अब तक दिल्ली आबकारी नीति (Delhi Excise Policy), हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग (Hawala and Money Laundering), दिल्ली वक्फ बोर्ड घोटाला ( Delhi Waqf Board Scam), मोहल्ला क्लिनिक 'फर्जी टेस्ट' मामला ( Mohalla Clinic 'Fake Test' Case ) और शीश महल घोटाला (Sheesh Mahal Scam) जैसे आरोप लग चुके हैं।

मयंक गाँधी ने खोली केजरीवाल की पोल

मयंक गाँधी (Mayank Gandhi) केजरीवाल के पुराने सहयोगी थे, जिन्होंने साल 2015 में आम आदमी पार्टी से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर "तानाशाही रवैया" अपनाने और केवल वफादारों को साथ रखने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सीएम बनते ही केजरीवाल के भीतर का नायक मर चुका था।

भारतीय लिबरल पार्टी के अध्यक्ष डॉ मुनीश रायज़ादा एक समय पर आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे। डॉ रायज़ादा ने 2019 में “Transparency: पारदर्शिता” वेब सीरीज बनाई जिसमें उन्होंने अन्ना आंदोलन और आम आदमी पार्टी के शुरुवाती दिनों की अनसुनी कहानियों का विवरण दिया है।

इसी सीरीज में मयंक गाँधी ने केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के बारे में बात करते हुए कहा है कि मैंने पहले मना किया था कि मैं राजनीति में नहीं आऊंगा लेकिन जुलाई 2012 में केजरीवाल अनशन पर बैठ गए। गाँधी ने यह भी बताया कि जब मंच से केजरीवाल ने यह कहा कि मेरा अनशन तोड़ने के लिए उन्होंने आइवी डाला तो मैं निकालकर फेंक दूंगा। मैं और वहां मौजूद लोग सब रोने लगे लेकिन मुझे नहीं पता था कि ये सब नाटक है।

तो ये थे अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) जिनके नाम का जिक्र एपस्टीन फाइल में भी है और वो भी सिर्फ अन्ना आंदोलन के कारण।