बहुत दिनों से राजनीतिक गलियारों में चल रहे कानाफूसी पर विराम लगाते हुए राघव चड्ढा अब आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा दे दिए हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। इस पूरे मामले पर डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने राघव चड्ढा पर तंज़ कसते हुए कहा “ये राघव चड्ढा हो या आम आदमी पार्टी का अरविन्द केजरीवाल, ये सब केवल हावबाजी करने वाले नेता हैं। दोनों चोर-चोर मौसेरे भाई हैं। राघव चड्ढा का आम जनता से कोई लेना-देना नहीं है।” X
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AAP के राघव ने BJP का थामा दामन ! दूध के धुले नहीं हैं राघव, अन्ना आंदोलन के सिपाही डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने किया कटाक्ष, यहाँ समझिए पूरी कहानी

बहुत दिनों से राजनीतिक गलियारों में चल रहे कानाफूसी पर विराम लगाते हुए राघव चड्ढा अब आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा दे दिए हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।

Author : Pradeep Yadav

बहुत दिनों से राजनीतिक गलियारों में चल रहे कानाफूसी पर विराम लगाते हुए राघव चड्ढा अब आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा दे दिए हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक भी थे। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने मिठाई खिलाकर सभी का स्वागत किया।

राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (आप) के दो-तिहाई से अधिक सांसदों की टोली का भाजपा में विलय कर लिया गया है। सात सांसदों ने उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे राज्यसभा के अध्यक्ष को सौंपा गया था।

अन्ना आंदोलन के सिपाही डॉ रायज़ादा ने कहा कि अन्ना आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल खड़ा किया गया। पारदर्शिता और अच्छी व्यवस्था की उम्मीद से दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को विकल्प के रूप में देखा था और ऐतिहासिक बहुतमत से जनता ने आम आदमी पार्टी को चुना था, लेकिन भ्रष्टाचार के दलदल में आम आदमी पार्टी फंसती चली गई। अब इस पार्टी को राजनीतिक अभिशाप है कि यह कभी उभर नहीं सकती क्योंकि सिद्धांतों से हमेशा के लिए भटक चुकी है।

डॉ रायज़ादा ने राघव और केजरीवाल दोनों पर किया कटाक्ष !

इस पूरे प्रकरण पर भारतीय लिबरल पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और अन्ना आंदोलन में भागीदार रहे डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने न्यूज़ग्राम से बातचीत के दौरान केजरीवाल और राघव चड्ढा दोनों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि 2015 में  दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बनने पर राघव चड्ढा को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया। साल 2016 में पार्टी से चंदे का हिसाब राघव चड्ढा एवं अन्य द्वारा हटा दिया गया। 

2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में बनी। मुनीश रायज़ादा के अनुसार, पंजाब में ड्रग माफियाओं को खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी की तरफ से नाटक किया गया। साल 2021 में पूर्व आईपीएस कुँवर विजय प्रताप सिंह ने अरविन्द केजरीवाल का हाथ पकड़ा था। विजय 2022 में आम आदमी पार्टी से पंजाब के अमृतसर से विधायक बने। इसके बाद विजय प्रताप ने अपनी ही पार्टी की सरकार पर यह आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर ड्रग माफिया लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 

मुनीश कुमार रायज़ादा ने राघव चड्ढा पर तंज़ कसते हुए कहा “ये राघव चड्ढा हो या आम आदमी पार्टी का अरविन्द केजरीवाल, ये सब केवल हावबाजी करने वाले नेता हैं। जो हाल-फिलहाल का झगड़ा शुरू हुआ है ये महज एक नाटक है क्योंकि दोनों चोर-चोर मौसेरे भाई हैं। राघव चड्ढा का जनता से कोई मतलब नहीं है।”

मुनीश कुमार रायज़ादा ने न्यूज़ग्राम से बातचीत में कहा कि बिना सिद्धांत के राजनीति करना उसी तरीके से पाप है जैसे बिना ज्ञान के हथियार उठाना पाप है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी हमेशा यह बात कहते थे कि राजनीति में सिद्धांत का होना अनिवार्य है।

रायज़ादा आगे कहते हैं कि अन्ना आंदोलन के माध्यम से पूरे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल खड़ा किया गया। पारदर्शिता और अच्छी व्यवस्था की उम्मीद से दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को विकल्प के रूप में देखा था ऐतिहासिक बहुतमत से जनता ने आम आदमी पार्टी को चुना था, लेकिन भ्रष्टाचार के दलदल में आम आदमी पार्टी फंसती चली गई। अब इस पार्टी को राजनीतिक अभिशाप है कि यह कभी उभर नहीं सकती क्योंकि सिद्धांतों से हमेशा के लिए भटक चुकी है। 

डॉ रायज़ादा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से अपनी बात साझा करते हुए लिखा, “ AAP के राघव चड्ढा ने राज्यसभा के 6 अन्य सदस्यों के साथ मिलकर BJP में शामिल होकर दल-बदल विरोधी कानून से खुद को बचा लिया है। यह केजरीवाल के मुँह पर एक तमाचा है। अब इस धूर्त आदमी (यानी अरविंद केजरीवाल) को समझ आ गया होगा कि कुटिल राजनीति (Machiavellian politics) सिर्फ़ एकतरफ़ा नहीं होती ! केजरीवाल ने खुद ही एक नागरिक समाज आंदोलन—अन्ना आंदोलन—की हत्या कर दी, और 'व्यवस्था परिवर्तन' (सिस्टम में आमूल-चूल बदलाव) का वादा करके 'आम आदमी पार्टी' की शुरुआत की। लोगों ने उन्हें भारी जनादेश दिया, यह सोचकर कि वे कुछ क्रांतिकारी काम करेंगे। लेकिन बदले में, इस ठग ने राज्यसभा के टिकट बेचकर और अन्य तमाम तरह की हेरा-फेरी (शराब घोटाला, आदि) करके पैसे बटोरना शुरू कर दिया और मलाई खाना शुरू कर दिया एवं शासन-प्रशासन की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए लोगों को हल्के में लेना शुरू कर दिया।

चलिए, बात साफ़ करते हैं। राघव चड्ढा कोई संत नहीं हैं। वे केजरीवाल के साथ मिलकर सारी वित्तीय गड़बड़ियाँ करने में पूरी तरह से शामिल थे और AAP के जिन कई राज्यसभा सदस्यों ने आज पार्टी छोड़कर BJP का दामन थामा है, वे महज़ 'पैसे वाले' लोग हैं। उनका पार्टी की विचारधारा या लोगों के हितों से कोई लेना-देना नहीं है।”

डॉ रायज़ादा ने राज्यसभा के बारे में कहा कि भारतीय संविधान निर्माताओं ने राज्यसभा को इसलिए बनाया कि इसमें बौद्धिक लोग आएंगे और देश हित में चर्चा करके सटीक नीति का निर्माण करने में दिशा निर्देशक की भूमिका निभाएंगे इसलिए राज्यसभा को ‘प्रबुद्ध वर्ग की सभा’ बोला गया। परंतु बड़े दुख की बात है कि आज राज्यसभा धनाढ्य बाहुबलियों, चापलूसों और सत्ता के दलालों का अड्डा बनकर रह गया है। 

वहीं पंजाब की राजनीति पर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग AAP के शासन में खराब शासन-प्रशासन, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और लचर बुनियादी ढाँचे की मार झेलने को मजबूर हैं, जबकि उनके चुने हुए प्रतिनिधि लगातार सिस्टम के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

उन्होंने पंजाब में आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं की तरफ इशारा करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब में भी टूटकर बिखर सकती है क्योंकि वहाँ के नेता केजरीवाल से नाराज हैं।

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आम आदमी पार्टी का बयान !

वहीं, आम आदमी पार्टी ने इसे भाजपा का 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाकर आप के नेताओं को तोड़ने की साजिश रची गई है। 

आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन लोटस' के माध्यम से भाजपा पंजाब की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह पंजाब और पंजाब के लोगों के साथ धोखा है। पंजाब की जनता इसको कभी नहीं भूलेगी।