हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान चौतरफा घिरते नजर आ रहे हैं। इस गंभीर धांधली ने देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। इसे लेकर विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
6 जून 2026 को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। विपक्ष दलों की सक्रियता और उनके विरोध के तरीकों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के बयान सामने आ रहे हैं।
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने देश के युवाओं से प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था और किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियाँ और अधिक कठिन होती चली गईं। आज जब नीट पेपर में हुई धांधली से लाखों छात्र सड़कों पर हैं, वहीं विपक्ष सरकार पर पूरी तरह हमलावर है।
एक तरफ जहां सत्तापक्ष का यह कहना है कि विपक्ष का यह दबाव केवल राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए है, वहीं दूसरी ओर कुछ तटस्थ जानकारों का मानना है कि विपक्षी नेता इस संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों के साथ उतनी मजबूती से खड़े नहीं दिख रहे हैं, जितनी अपेक्षा की जा रही थी। जानकारों का स्पष्ट तर्क है कि सरकार से सीधी टक्कर लेने के लिए विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं को जमीनी स्तर पर उतरना होगा। केवल सोशल मीडिया का सहारा लेने के बजाय जब तक सड़क पर उतरकर संघर्ष नहीं किया जाएगा, तब तक सरकार पर अपेक्षित दबाव बनाना कठिन होगा। वर्तमान स्थिति यह है कि विपक्ष के बड़े नेता अभी भी जमीनी आंदोलन से कुछ दूरी बनाए हुए हैं, जो छात्रों के बीच असंतोष का विषय बना हुआ है।
भाजपा सरकार की असफलता और पेपर लीक की घटनाओं पर विपक्ष के नेता फिलहाल सोशल मीडिया के माध्यम से ही अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराते नजर आ रहे हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी नीट मुद्दे पर सरकार को सोशल मीडिया पर ही घेरने का प्रयास किया।
आम जनता के बीच से भी यह आवाज उठ रही है कि राहुल गांधी को स्वयं जमीन पर उतरकर छात्रों की इस लड़ाई का नेतृत्व करना चाहिए, क्योंकि डिजिटल प्रदर्शनों का असर जमीनी जन-आंदोलन जितना प्रभावशाली नहीं होता।
हालांकि, कांग्रेस पार्टी के अंतर्गत 'यूथ कांग्रेस' के कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई धांधली के विरोध में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब (Uday Bhanu Chib) के नेतृत्व में देश के 50 से अधिक शहरों में कार्यकर्ता जोरदार आंदोलन कर रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर गुस्सा उबल रहा है।
छात्रों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि यदि राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे प्रमुख नेता स्वयं सड़क पर उतरकर इस्तीफा मांगते और छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते, तो धर्मेंद्र प्रधान पर दबाव कहीं अधिक होता।
छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र के खिलाफ है जो उनकी मेहनत और सपनों को साकार करने में बाधा बने हुए हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या विपक्ष केवल चुनावी मुद्दों के लिए सक्रिय है या वह वास्तव में छात्रों के हक के लिए कोई निर्णायक जमीनी आंदोलन खड़ा कर पाता है। फिलहाल, देशभर में प्रदर्शनों का दौर जारी है और शिक्षा मंत्री पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
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