सोशल मीडिया के फैलाव के साथ “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर फ्रॉड तेज़ी से बढ़े हैं, जहाँ डर दिखाकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते हैं।
ग्रेटर कैलाश में फर्जी TRAI/IPS बनकर बुजुर्ग दंपती को 24 दिसंबर 2025 से डराया गया और 10 जनवरी 2026 को शिकायत में करीब ₹14.85 करोड़ की ठगी सामने आई।
इसी पैटर्न पर ग्रेटर कैलाश (₹7 करोड़), हैदराबाद (₹2.58 करोड़) और दिल्ली मुनिरका जैसे मामलों में भी बुजुर्गों को निशाना बनाया गया।
विश्वभर में सोशल मीडिया (Social Media) का विस्तार जितनी तेजी से हुआ है, उतनी ही तेजी से सोशल मीडिया से जुड़े अपराध और साइबर क्राइम के तरीके भी बढ़ते जा रहे हैं। रोज़ किसी न किसी ठगी की खबर दिल दहला देती है—कहीं “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर डराया जाता है, कहीं अश्लील वीडियो या बातों का झूठा आरोप लगाकर फँसाने की धमकी दी जाती है, तो कहीं पुलिस–सीबीआई–ईडी का नाम लेकर लोगों से पैसे ऐंठे जाते हैं। लोगों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करना तो आ गया है, लेकिन सोशल मीडिया और कॉल/व्हाट्सप्प के जरिए होने वाले साइबर अपराध से निपटना आज भी एक बड़ा चैलेंज बना हुआ है। ऐसी ही एक घटना सामने आई है, आइये उसे समझते हैं।
दिल्ली (Delhi) के ग्रेटर कैलाश (Greater Kailash) से ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक बुजुर्ग दंपती से करीब 14 करोड़ 85 लाख रुपये ठग लिए गए। खबर 10 जनवरी 2026 की बताई जा रही है, जब बुजुर्ग दंपती पुलिस थाने पहुँचे और अपनी आपबीती सुनाकर सबको हैरान कर दिया।
दंपती ने थाने में SHO से कहा—“कॉल पर IPS अफसर हैं, आप इनसे बात कर लीजिए।” SHO को पहले तो कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जैसे ही उन्होंने कॉल पर मौजूद “IPS अफसर” से बात की, सामने वाला बदतमीजी करने लगा। बातचीत से साफ हो गया कि ये कोई असली IPS नहीं, बल्कि फर्जी व्यक्ति है जो अफसर बनकर लोगों को फँसा रहा है। यह सुनते ही दंपती को बड़ा झटका लगा।
पूछताछ में दंपती ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को उन्हें भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नाम पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि आपके नंबर से “अश्लील बातें और वीडियो” वाली शिकायतें आई हैं। इतना ही नहीं, उसने यह भी जोड़ दिया कि आपके सिम से “देशद्रोह” जैसी बातें भी जुड़ी हुई बताई जा रही हैं।
इस पर बुजुर्ग महिला इंदिरा तनेजा ने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। जवाब में ठगों ने और डर बढ़ाते हुए कहा—“आपके नंबर के खिलाफ 26 शिकायतें हैं।” फिर इसी डर को हथियार बनाकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की बात कही गई—यानि वीडियो कॉल पर निगरानी में रखकर, किसी से बात न करने की हिदायत देकर, और “जांच/वेरिफिकेशन” के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया गया। इसी पूरे खेल में दंपती से 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हो गई।
सिर्फ ग्रेटर कैलाश (Greater Kailash) ही नहीं—इसी तरह की “डिजिटल अरेस्ट” और व्हाट्सप्प ठगी की घटनाएँ देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार सामने आ रही हैं:
1) ग्रेटर कैलाश (Greater Kailash): 70 वर्षीय महिला से 7 करोड़ की ठगी
ठीक इसी तरह का एक और केस हाल-फिलहाल ग्रेटर कैलाश से सुनने को मिला, जहाँ 70 साल की महिला को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर करीब 7 करोड़ रुपये से ठगा गया। तरीका वही—सरकारी एजेंसी/अधिकारी बनकर धमकी, केस का डर, और फिर पैसे ट्रांसफर।
2) हैदराबाद: व्हाट्सप्प (Whatsapp) के जरिए 2.58 करोड़ की ठगी
हैदराबाद में भी एक मामला सामने आया जहाँ WhatsApp के जरिए ठगी की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक पूर्व IPS/सीनियर अधिकारी की पत्नी को WhatsApp के माध्यम से जाल में फँसाकर 2.58 करोड़ रुपये ठग लिए गए। यहाँ भी भरोसा जीतने, “इन्वेस्टमेंट/जांच/वेरिफिकेशन” जैसे बहानों से रकम निकलवाई गई।
3) दिल्ली (Delhi), मुनिरका: बुजुर्ग विधवा पेंशनभोगी के साथ डिजिटल फ्रॉड
दिल्ली के मुनिरका से भी इसी प्रकार की खबर सामने आई। पीड़िता एक बुजुर्ग विधवा पेंशनभोगी हैं, जिनके साथ डिजिटल फ्रॉड हुआ। यह केस पहले दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के पास था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिसंबर 2025 में यह मामला CBI को सौंप दिया गया।
4) हैदराबाद, हुमायूँ नगर: 68 वर्षीय महिला डिजिटल फ्रॉड का शिकार
हैदराबाद के हुमायूँ नगर इलाके से भी ऐसी ही खबर आई, जहाँ 68 वर्षीय महिला को डिजिटल फ्रॉड का शिकार बनाया गया। स्क्रिप्ट वही—डर, दबाव, और “अधिकारी” बनकर पैसे ट्रांसफर कराना।
इस फ्रॉड में सबसे खतरनाक चीज़ होती है डर। ठग पुलिस, TRAI-भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण, CBI-Central Bureau of Investigation, ED- Enforcement Directorate, कोर्ट—किसी का भी नाम लेकर सामने वाले को मानसिक दबाव में ले आते हैं। क्या बुजुर्गों को खासतौर पर इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे जल्दी घबरा जाते हैं, और उनके पास जीवनभर की जमा पूंजी होती है?
(PO)