दिल्ली के 9 मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने पर करीब ₹4.05 करोड़ खर्च आने का अनुमान है। X
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रेखा गुप्ता के एक फैसले से दिल्ली वालों की कमाई के करोड़ों स्वाहा, 9 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने में आएगा इतना खर्च!

22 फ़रवरी 2026 को एक खबर सामने आई कि दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की कैबिनेट ने यह फैसला किया है कि दिल्ली मेट्रो के एक या दो नहीं बल्कि 9 मेट्रो स्टेशन के नाम बदले जाएंगे।

Author : Mayank Kumar
Reviewed By : Ritik Singh

  • दिल्ली सरकार ने 9 मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने का फैसला किया, जिनमें 7 नाम संशोधित और 2 पूरी तरह बदले जाएंगे।

  • नाम बदलने की बहस सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के हिंदी नाम को लेकर दायर याचिका से तेज हुई।

  • एक स्टेशन का नाम बदलने में लगभग ₹45 लाख खर्च होता है, इसलिए 9 स्टेशनों पर करीब ₹4.05 करोड़ खर्च हो सकता है।

"अगला स्टेशन...राजीव चौक...है" अगर आप दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) में सफर करते हैं, शमी नारंग की ये आवाज आपने जरूर सुनी होगी। जी हाँ आज बात DMRC की होगी, जो दुनिया में मेट्रो नेटवर्क के मामले में छठे स्थान पर काबिज है। हम बात उस DMRC की करने जा रहे हैं, जो मात्र 6 स्टेशन के साथ शुरू हुई थी और आज वर्तमान समय में दिल्ली-एनसीआर में कुल 285 से 290 मेट्रो स्टेशन सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

आज इन्हीं में से 9 मेट्रो स्टेशन का नाम बदल दिया जाएगा। ये फैसला वर्तमान की रेखा गुप्ता की सरकार ने लिया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन 9 स्टेशन का नाम बदलने में कितना खर्च आएगा। आइये पूरा गणित समझते हैं।

किन-किन मेट्रो स्टेशन का नाम बदला जाएगा?

22 फ़रवरी 2026 को एक खबर सामने आई कि दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) की कैबिनेट ने यह फैसला किया है कि दिल्ली मेट्रो के एक या दो नहीं बल्कि 9 मेट्रो स्टेशन के नाम बदले जाएंगे। राज्य नाम प्राधिकरण (SNA) की चेयरमैन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया है।

सीएम के मुताबिक मेट्रो स्टेशन सिर्फ आने-जाने की जगह नहीं होते, इससे उस इलाके की पहचान और सांस्कृतिक के महत्व का भी पता चलता है। इसलिए यह फैसला सोच समझकर लिया गया है। इस चर्चा में 21 मेट्रो स्टेशन के नाम बदलने के प्रस्तावों पर विचार हुआ था लेकिन 12 में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय हुआ। वहीं, 7 नामों के संशोधन पर फैसला हुआ जबकि 2 के नाम को पूरी तरह बदला जाएगा।

संशोधित होने वाले मेट्रो स्टेशन के नाम कुछ इस प्रकार हैं :-

श्री राम मंदिर मयूर विहार (पहले मयूर विहार पॉकेट 1), जगतपुर-वजीराबाद (पहले जगतपुर), नानकसर-सोनिया विहार (पहले सोनिया विहार), खानपुर-वायुसैनाबाद (पहले खानपुर), मंगोलपुर कलां-पश्चिम एन्क्लेव (पहले पश्चिम एन्क्लेव), उत्तरी पीतमपुरा-प्रशांत विहार (पहले प्रशांत विहार), नानक प्याऊ-डेरावल नगर (पहले डेरावल नगर)

पूरी तरह बदले गए मेट्रो स्टेशन के नाम कुछ इस प्रकार हैं:-

हैदरपुर गांव (पहले: नार्थ पीतमपुरा) और मधुबन चौक (पहले: पीतमपुरा)

सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से शुरू हुआ मामला

दरअसल, नाम बदलने का मामला सुप्रीम कोर्ट से शुरू हुआ। 19 फ़रवरी 2026 को एक मामला सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई कि सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘सर्वोच्च न्यायालय' कर दिया जाए। दलील यह दी गई कि सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशन का हिंदी नाम "केंद्रीय सचिवालय" लिखा जाता है, तो यहाँ भी हिंदी नाम का ही इस्तेमाल हो।

अपने दलील में याचिकाकर्ता ने आधिकारिक भाषा अधिनियम का हवाला देते हुए यह भी बताया कि केंद्र सरकार से जुड़े साइनेज, नेमप्लेट और डॉक्यूमेंट्स अंग्रेजी और हिंदी दोनों में देवनागरी लिपि में होने चाहिए। यहाँ तक कि वेबसाइट पर भी सुप्रीम कोर्ट का हिंदी नाम "भारत का सर्वोच्च न्यायालय" लिखा हुआ है।

नाम बदलने में कितना खर्च आएगा?

वहीं, मामले ने जब तूल पकड़ा, तो DMRC को इसकी तरफ से जवाब भी देना पड़ा। दिल्ली मेट्रो ने कोर्ट को बताया कि अगर मेट्रो स्टेशन का नाम बदला जाता है, तो इसका खर्च करीब 45 लाख के करीब आएगा और इसका हवाला देकर कई याचिकाएं आ सकती हैं। अब ऐसे में यहाँ प्रश्न यह खड़ा होता है कि एक सुप्रीम कोर्ट का नाम बदलने में 45 लाख का खर्च आएगा, तो इसकी गणना हम करें पूरे 9 मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने का खर्च 4 करोड़ 5 लाख रुपये के आसपास हो सकता है।

बता दें कि मेट्रो स्टेशनों का नाम बदलने का खर्च मुख्य रूप से दिल्ली सरकार द्वारा उठाया जाता है, क्योंकि जनवरी 2026 से स्टेशनों के नामकरण और पुनर्मानामकरण का पूर्ण अधिकार दिल्ली सरकार की स्टेट नेम्स अथॉरिटी (SNA) को मिला हुआ है।