दिल्ली में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग ) में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में ट्रिपल इंजन की सरकार है।  X
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रेन वाटर हार्वेस्टिंग का घोटाला आया सामने ! कटघरे में दिल्ली सरकार, जानें क्या है पूरा मामला

वर्षा जल संचयन में भ्रष्टाचार, खराब टैंकों और एनजीटी आदेशों की अनदेखी से दिल्ली का भूजलस्तर बिगड़ा, ट्रिपल इंजन सरकार की जल प्रबंधन नीतियों पर गंभीर सवाल

Author : Pradeep Yadav

  • दिल्ली में ट्रिपल इंजन सरकार के बावजूद जल प्रबंधन, सीवर और यमुना सफाई जैसे मुद्दों पर अव्यवस्था गहराती दिख रही है। वर्षा जल संचयन में भ्रष्टाचार, दिल्ली जल बोर्ड में अनियमितता और लापरवाही के आरोपों के बीच आम आदमी पार्टी और भाजपा दोनों की सरकारों की नाकामी पर सवाल उठ रहे हैं। 20 मई 2026 को मामले की अगली सुनवाई तय है।

दिल्ली सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप उजागर हो रहे हैं। सरकारी खजाने का दुरुपयोग वर्तमान सरकार में आम बात हो गया है। दिल्ली में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग ) में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली में ट्रिपल इंजन की सरकार है। 

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, दिल्ली में वर्षा जल संचयन में लापरवाही को लेकर एक याचिका 2021 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर की गई थी। यह सामने निकलकर आया कि वर्षा जल संचयन में लापरवाही हो रही है। लापरवाही का खामियाजा दिल्ली के अलग-अलग सोसाइटी को भुगतना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता महेश चंद्र सक्सेना का कहना है, दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर टैंक खराब हो चुके हैं और गंदे पड़े हैं जिस कारण से दिल्ली के भू-जलस्तर पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा है। इस मामले पर अधिकारियों को फटकार  लगी थी। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। 

महेश चंद्र सक्सेना ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीईओ को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने यह शिकायत किया है कि द्वारका की ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में जल संचयन की सख्त आवश्यकता है। इसके लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली को को बेहतर करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पूरे दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के नियमों और आदेशों की अनदेखी हो रही है। सरकार को इसपर निगाह दौड़ाने की आवश्यकता है। बेलगाम हो चुके अधिकारियों पर नकेल कसने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि पूरे दिल्ली में व्यवस्था चरमरा गई है। इसके मरम्मत की सख्त जरूरत है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 को सुनिश्चित है।

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बदहाल व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन ?

दिल्ली की व्यवस्था में खामियों को लेकर लगातार सवाल खड़े किये जा रहे हैं। यमुना नदी को साफ करने वाले वादे अब ठंडे बस्ते में जा चुके हैं। जल बोर्ड में अनियमितता, भ्रष्टाचार और लापरवाही का असर दिल्ली के आवाम पर पड़ रहा है। दिल्ली में भाजपा की सरकार बने लगभग 1 साल पूरे हो चुके हैं। सरकार के काम जमीन पर नहीं दिखाई दे रहे हैं। सीवर की समस्या लेकर पीने के पानी तक हर जगह सरकारी व्यवस्था ने हाथ खड़े कर दिए हैं। किराड़ी जैसे इलाकों में लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार में जो लापरवाही हुई थी उसकी पुनरावृत्ति दिल्ली की भाजपा सरकार में जारी है। 

सवाल यह है कि दिल्ली में बदहाल व्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है। आम आदमी पार्टी ने व्यवस्था में परिवर्तन का रास्ता चुना था। लेकिन जब मौका मिला तो केजरीवाल सरकार ने जो काम किया वह केवल कागजों पर था धरातल से सारे काम गायब नजर आए। साल 2025 में दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हुआ। जनता ने बीजेपी को वोट देकर चुना। भाजपा की सरकार में व्यवस्था आज भी जर्जर है। रेखा गुप्ता और आतिशी के बीच जुबानी जंग दिल्ली के सियासी गलियारों में चलता रहता है लेकिन इन दोनों में से कोई भी सही तरीके से जवाब देने के लिए तैयार नहीं है। 

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