जनवरी-फरवरी 2026 में बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार से जुड़े 28 मामले दर्ज किए, जो पिछले तीन वर्षों (2023-2025) के शुरुआती दो महीनों के कुल 18 मामलों से भी अधिक हैं। इन मामलों में करीब 7.99 लाख रुपये जब्त किए गए।
20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनने के चार महीने के भीतर ही भ्रष्टाचार के बढ़ते आंकड़ों ने “सुशासन” के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई तेज होने से मामलों की संख्या बढ़ी है।
बिहार में अपराध और अव्यवस्था के मुद्दे भी उठाए गए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2023 के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ 22,952 मामले दर्ज हुए। साथ ही, गोपालगंज में निर्माणाधीन पुल गिरने जैसी घटनाओं ने प्रशासन और भ्रष्टाचार पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
बिहार में नई सरकार बने हुए ठीक से महज 4 महीने पूर्ण हुए हैं। 20 नवंबर 2025 को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ नीतीश कुमार ने ली। अभी कुछ समय बीते ही थे कि बिहार में भ्रष्टाचार का नया पिटारा खुल गया है। मात्र दो महीने में ही भ्रष्टाचार की सीमा पार करते हुए नीतीश कुमार की सरकार ने भ्रष्टाचार का नया रिकार्ड बनाया है। सुशासन का ढोल पीटने वाली सरकार का ही पिटारा खुल गया।
दरअसल, बिहार में दो महीने में भ्रष्टाचार से जुड़े 28 मामले दर्ज पाए गए हैं। बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ( Surveillance Investigation Bureau of Bihar) ने इस वर्ष दो महीने में, अर्थात जनवरी और फरवरी में, भ्रष्टाचार से जुड़े 28 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह वर्ष 2024 में जनवरी-फरवरी के दौरान की गई कार्रवाई से 28 गुना और 2025 में हुई कार्रवाई से चार गुना अधिक है।
सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Surveillance Investigation Bureau) के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि वर्ष 2023 के जनवरी-फरवरी में भ्रष्टाचार से जुड़े 10 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, 2024 के जनवरी-फरवरी के एक मामले में और 2025 जनवरी-फरवरी महीनों के दौरान सात भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इस तरह से देखा जाए, तो पिछले वर्ष 2023 से 2025 के बीच यानी तीन वर्षों के शुरुआती दो माह में कुल 18 केस दर्ज किए गए हैं। जबकि अकेले वर्ष 2026 के जनवरी-फरवरी में कुल 28 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों में 7 लाख 99 हजार रुपए जब्त किए गए हैं। इन सभी मामलों में लोक सेवकों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ ट्रैप के साथ ही डीए (आय से अधिक संपत्ति मामले) में पकड़ा गया है।
गंगवार ने बताया कि भ्रष्टाचार (Corruption) के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए निगरानी ब्यूरो पूरी तरह से संकल्पित है। ब्यूरो की टीम पहले से और सशक्त हुई है, जिसकी वजह से कार्रवाई की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
उन्होंने बताया कि अगर करीब ढाई दशक के आंकड़ों पर गौर करें, तो औसतन हर वर्ष 72 मामले दर्ज किए गए हैं, यानी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतिमाह औसतन छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए। वर्ष 2025 में कार्रवाई में तेजी लाई गई, जिसकी वजह से इस वर्ष 122 मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष औसतन हर महीने 10 लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया।
बिहार में पिछले 20 सालों से लगातार नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और भाजपा (BJP) की सरकार बनी हुई है। बिहार अन्य राज्यों की तुलना में विकास की सीढ़ियाँ चढ़ने में अभी तक नाकाम रहा है। बिहार में हर साल कहीं सरकारी पुल गिरने की खबर आती है तो कहीं लूट हत्या की खबर। ये सारी खबरें बिहार के लोगों के लिए आज के समय में सुनना एक आदत बन चुका है।
साल 2023 के एनसीईआरबी (NCERB) के आंकड़ों (जो साल 2025 में प्रकाशित हुआ) के मुतबिक, बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध की संख्या 22952 दर्ज पाई गई। इन दर्ज मामलों में से बलात्कार के 902 और अपहरण के 14371 मामले सामने आए। ये दिखाता है कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरीके से ध्वस्त हो चुकी है।
हाल ही में बिहार के गोपालगंज में बन रहा सरकारी पुल अचानक गिर पड़ा। गोपालगंज में घोघरी नदी पर बन रहे इस पुल की लागत 2.89 करोड़ रुपये बताई गई है। पुल गिरने के पश्चात तैनात इंजीनियरों में से दो को सस्पेंड कर दिया गया। इस तरीके के भ्रष्टाचार में बिहार की सरकार और सरकार के अधिकारी जकड़े हुए हैं।