NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर 'चलो संसद मार्च' आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की रिहाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग कर रहे हैं। पुलिस लाठीचार्ज और जेपी नड्डा से आश्वासन के बाद दीपके ने अनशन तो खत्म कर दिया है, लेकिन मांगें पूरी होने तक मंगलवार को भी प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है।
दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने से हालात तनावपूर्ण हो गए। दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने उग्र और हिंसक व्यवहार किया, जिसके चलते 118 से अधिक पुलिस अधिकारी और जवान घायल हो गए। करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से बार-बार चेतावनी और कानूनी निर्देश दिए गए, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया और लागू निषेधाज्ञा का जानबूझकर उल्लंघन किया।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और अन्य वस्तुओं से हमला किया। उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पुलिस और अन्य सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा हुई, जिससे कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया।
घायलों में स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं। कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुई हैं।
पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना है। घायल पुलिसकर्मियों का मेडिकल-लीगल परीक्षण (एमएलसी) कराया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिंसक भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया। घटना में 15 से 20 सरकारी वाहनों समेत अन्य सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई।
पुलिस ने अब तक लगभग 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। उनके खिलाफ दंगा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य अपराधों के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा अन्य संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हिंसा और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कार्रवाई के समय एक 15 वर्षीय लड़की के साथ एक पुरुष पुलिसकर्मी ने बेरहमी से मारपीट की।
दिपके ने कहा, "पुलिस ने बेहद बर्बरता दिखाई है। यहां प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों के सिर फट गए हैं। यहां तक कि एक 15 वर्षीय लड़की को भी एक पुरुष पुलिसकर्मी ने बेरहमी से पीटा।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया, "एक पुरुष पुलिसकर्मी ने सोनम वांगचुक की पत्नी श्रीमती गीतांजलि वांगचुक के बाल पकड़ने की भी कोशिश की। इतना ही नहीं, उन पर लाठीचार्ज करने का प्रयास किया गया और उन्हें टेंपो से जबरन बाहर खींचने की कोशिश भी की गई।"
हालांकि, इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल टीम और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की ओर से नियुक्त डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे कल दोपहर 12:30 बजे तक अपनी-अपनी मेडिकल रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनम वांगचुक के मेडिकल परीक्षण की वीडियोग्राफी किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और दिल्ली पुलिस से सवाल किया, "उनके मेडिकल टेस्ट की वीडियोग्राफी क्यों की जा रही है?"
यह निर्देश जंतर-मंतर पर चल रहे युवा और जलवायु आंदोलन से जुड़े मामलों की संयुक्त सुनवाई के दौरान दिया गया। आइशे घोष की ओर से पेश अधिवक्ता सुभाष चंद्रन केआर ने बताया कि उनकी जनहित याचिका (PIL) दिल्ली पुलिस द्वारा कथित अवैध निगरानी (Illegal Surveillance) से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या सोनम वांगचुक मेडिकल जांच में सहयोग कर रहे हैं। अदालत में मौजूद डॉक्टर ने बताया कि जब उनकी मेडिकल जांच की वीडियोग्राफी की जा रही थी, तब उन्होंने सहयोग नहीं किया। इस पर पीठ ने पूछा कि मेडिकल परीक्षण की रिकॉर्डिंग करने की आवश्यकता क्या है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सफदरजंग अस्पताल और सोनम वांगचुक दोनों पक्ष अपनी-अपनी मेडिकल रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें।
वहीं, आइशे घोष से जुड़े मामले में अदालत ने भारत के सॉलिसिटर जनरल को निजता (Privacy) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का अध्ययन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि निजता के अधिकार से जुड़े इस मामले और सोनम वांगचुक की याचिका पर कल दोपहर 12:30 बजे एक साथ सुनवाई की जाएगी।
इस मामले के बाद प्रदर्शनकारियों की निगरानी और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कानूनी बहस और तेज हो गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि जब तक सांसद CJP के नेताओं से मुलाकात नहीं करते, तब तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी।
भूख हड़ताल के 23वें दिन वांगचुक ने कहा कि वह NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की अपनी मांग पर अडिग हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने हस्तलिखित संदेश में वांगचुक ने कहा कि छात्रों को अपनी आवाज संसद तक पहुंचाने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि छात्रों को संसद के सामने अपनी बात रखने की अनुमति दी जाए ताकि उनकी समस्याओं और मांगों को जनप्रतिनिधियों के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जा सके।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने PTI से बातचीत में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "पुलिस ने बेहद बर्बरता की है। यहां प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों के सिर फट गए हैं। यहां तक कि एक 15 वर्षीय लड़की की भी एक पुरुष पुलिसकर्मी ने बेरहमी से पिटाई की।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया, "एक पुरुष पुलिसकर्मी ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि वांगचुक के बाल पकड़ने की भी कोशिश की। इतना ही नहीं, उन पर लाठीचार्ज करने का प्रयास किया गया और उन्हें टेंपो से जबरन बाहर खींचने की भी कोशिश की गई।"
हालांकि, इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया, तो उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके साथ ही कई स्थानों पर हल्का बल प्रयोग भी किया गया।
घटना के बाद नई दिल्ली के हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। संसद, शास्त्री भवन और जंतर-मंतर के आसपास अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। एहतियात के तौर पर कुछ प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश एवं निकास को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (Additional Commissioner of Police) राजीव रंजन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा, "दिल्ली पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों से अपील करती है कि वे संयम बरतें और शांति तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें। सभी प्रदर्शनकारी अपना प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से करें। वे किसी भी गैरकानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल न हों और ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए वैधानिक निर्देशों का पालन करें।"
उन्होंने आगे कहा कि आम जनता किसी भी तरह की अफवाह, भ्रामक जानकारी या अपुष्ट सूचना पर विश्वास न करे और न ही उसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा करे।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से केवल विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करने तथा राजधानी में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील की है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, "हम आज करीब 12 बजे नड्डा जी के आवास पहुंचे थे। लगभग 2:15 बजे उनसे मुलाकात हुई। इस दौरान हमने उनके सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।"
उन्होंने बताया कि पहली मांग सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा करने और उन्हें वीडियो संदेश के माध्यम से देश की जनता को संबोधित करने की अनुमति देने की थी।
दूसरी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर थी। रांका ने कहा कि उनकी पार्टी उन्हें अयोग्य शिक्षा मंत्री मानती है, इसलिए उन्हें तत्काल पद से हटाया जाए या उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए।
तीसरी मांग NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की थी।
रांका ने बताया कि इस मुद्दे पर दो दौर की बातचीत हुई। पहला दौर करीब 2 बजे और दूसरा दौर करीब 4 बजे हुआ। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया है कि वह इन मांगों पर पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा करेंगे और जो भी निर्णय होगा, उसकी जानकारी जल्द ही उन्हें दे दी जाएगी।
जब उनसे पूछा गया कि नड्डा की ओर से उन्हें क्या आश्वासन मिला, तो रांका ने कहा, "मुझे केवल यही आश्वासन मिला है कि वह इस मामले पर वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा करेंगे और जो भी फैसला होगा, उसकी जानकारी हमें जल्द दे दी जाएगी।"
जंतर-मंतर पर भारी हंगामे के बीच CJP नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मंत्री को अपनी मांगों का एक आधिकारिक पत्र सौंपा, जिसमें NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और बेरोजगारी पर ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। इस बैठक को गतिरोध तोड़ने की कोशिश माना जा रहा है।
संसद मार्च के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया कि पुलिस ने उनके संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया है। पार्टी ने आज से शुरू हो रहे मानसून सत्र के बीच सभी सांसदों (MPs) से भावुक अपील की है कि वे संसद के अंदर छात्रों की आवाज उठाएं और इस आंदोलन को अपना पूरा समर्थन दें।
दिल्ली के संसद मार्ग पर CJP का प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें एक सब-इंस्पेक्टर घायल हो गए हैं। वे प्रदर्शनकारियों को संसद की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड्स पर तैनात थे। घायल अधिकारी ने ANI को बताया कि भीड़ ने अचानक उन पर पथराव कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए सुरक्षा बल लगातार मुस्तैद हैं।
20 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के पहले दिन, नीट पेपर लीक के विरोध में CJP का 'संसद चलो' मार्च हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस की मनाही और धारा 163 के बावजूद करीब 8,000 प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे। एहतियातन संसद के सभी गेट बंद कर सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात करने गए थे। इसके बाद अभिजीत दीपके ने अपना अनशन खत्म कर दिया।
संसद मार्च की कोशिश कर रहे CJP कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस और RAF ने बर्बरता से लाठीचार्ज कर दिया है। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने संसद की तरफ बढ़ने के लिए बैरिकेड्स तोड़े, पुलिस ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, जिसमें कई छात्र घायल हुए हैं। तनाव के बीच चंद्रशेखर आज़ाद और महुआ मोइत्रा भी मौके पर पहुंचे हैं। सुरक्षा के चलते केंद्रीय सचिवालय और राजीव चौक सहित 5 बड़े मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो भी जंतर-मंतर पहुंच चुकी हैं। जंतर-मंतर पर संसद मार्च की तैयारी में सुबह से ही हजारों छात्र और प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। गीतांजलि के वहां पहुंचने से प्रदर्शनकारियों का हौसला और बढ़ गया है।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो भी जंतर-मंतर पहुंच चुकी हैं। जंतर-मंतर पर संसद मार्च की तैयारी में सुबह से ही हजारों छात्र और प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं। गीतांजलि के वहां पहुंचने से प्रदर्शनकारियों का हौसला और बढ़ गया है।
CJP Protest Live: दिल्ली इस समय छावनी में तब्दील हो चुकी है। कॉकरोच जनता पार्टी के 'चलो संसद' मार्च को लेकर सुबह से ही करीब 10,000 छात्र, युवा और उनके माता-पिता यहां जुट चुके हैं। 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, जिसे देखते हुए प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक और देश में बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं। जंतर-मंतर पर माहौल बेहद तनावपूर्ण है। कुछ ही देर पहले गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पहले घेरे के बैरिकेड्स को तोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों को स्थिति पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी है।
दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को गैर-कानूनी घोषित कर दिया है क्योंकि इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। पूरी नई दिल्ली और संसद मार्ग के आस-पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, यानी 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है। चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों (CAPF) की 25 बटालियन और दिल्ली पुलिस के 5000 से ज्यादा जवान तैनात हैं। ड्रोन से पूरी भीड़ पर नजर रखी जा रही है। साथ ही नई दिल्ली के आस पास के मेट्रो स्टेशन को भी अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।
इस आंदोलन को बड़ा मोड़ तब मिला जब दो दिन पहले हिरासत में लिए गए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने सफदरजंग अस्पताल से अपना संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि वे खुद को वहां 'कैद' महसूस कर रहे हैं और अपना अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने 3 कड़ी शर्तें रखी हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP Protest Live) के प्रमुख अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) भी वांगचुक के समर्थन में अनशन पर अड़े हैं। प्रदर्शनकारी साफ कह रहे हैं कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते और NEET धांधली की निष्पक्ष जांच नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे। संसद की तरफ बढ़ने वाले हर रास्ते को सील कर दिया गया है।