15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' और 'परजीवियों' से करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करते हैं। इस विवादित बयान पर घमासान मच गया है। राजद सांसद प्रोफेसर मनोज झा सहित कई नेताओं ने इसे बेरोजगार युवाओं के लिए अपमानजनक और पीड़ादायक बताया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने समाज के प्रबुद्ध वर्ग को झकझोर दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने देश के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की और उन्हें सिस्टम पर हमला करने वाला बताया। जज के इस बयान पर तमाम लोगों और राजनेताओं ने अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था में बैठे जजों की भाषा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने देश के बेरोजगार युवाओं पर तंज कसते हुए कहा है कि वे कॉकरोच की भांति होते हैं और देश की व्यवस्था को समय-समय पर आघात पहुंचाते हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान जज की यह टिप्पणी सामने निकलकर आई।
दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट में सीनियर एडवोकेट अर्थात वरिष्ठ वकील का दर्जा न मिलने से नाराज एक वकील, संजय दुबे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसी मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'कुछ बेरोजगार युवा तिलचट्टों की तरह होते हैं।' कुछ लोग ऐसे होते हैं कि रोजगार या पेशे में जगह न मिलने पर मीडियाकर्मी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर सिस्टम पर हमला करना शुरू कर देते हैं। जज ने यह बयान वकील के मामले की सुनवाई के दौरान दिया।
जज के बयान पर बहस इस बात को लेकर हो रही है कि संवैधानिक पद पर बैठे शख्स की तरफ से दिए गए इस तरीके के बयान समाज को कितना प्रभावित कर सकेंगे। सूर्यकांत की तरफ से पहले भी बहुत सारे ऐसे बयान आ चुके हैं जिन पर बहस हो चुके हैं। फरवरी 2026 में एनसीईआरटी किताब के एक अध्याय में न्यायपालिका में व्याप्त खामियों को उजागर करने पर जज ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। 29 जनवरी 2026 को जज सूर्यकांत ने घरेलू कामगारों के लिए बयान दिया था कि मजदूरी फिक्स कर देने से उनको काम नहीं मिलेगा। ये सब तो ठीक था पर जज ने युवाओं पर जो बयान दिया है, उसका विश्लेषण समय आने पर किया जाएगा, हालांकि बहुत सारे लोगों ने उनके इस बयान पर नाराजगी जाहिर की है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के इस बयान पर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद डॉ. मनोज झा ने तीखा तंज कसते हुए कहा है, “मैं उन करोड़ों भारतीयों में शामिल हूं जिन्हें यह बेहद असहज और पीड़ादायक लगता है कि भारत के बेरोज़गार युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहा जा रहा है और वह भी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो इस कठिन और बेचैन समय में उम्मीद के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन है। क्या यह सच नहीं कि ये युवा एक गहरे आर्थिक और संस्थागत संकट के शिकार हैं, जिसका सामना स्वयं व्यवस्था को ईमानदारी से करना चाहिए?”
उन्होंने तंज भरे लहजे में न्यायाधीश को नसीहत देते हुए आगे कहा, “मी लॉर्ड, सार्वजनिक संस्थाओं विशेषकर संवैधानिक अदालतों से यह अपेक्षा होती है कि वे ऐसी भाषा में संवाद करें जो सार्वजनिक विमर्श को ऊंचा उठाए, न कि उसे और अधिक कठोर और असभ्य बनाए। ऐसे समय में, जब देश पहले ही राजनीतिक संवाद में गिरती शालीनता का साक्षी बन रहा है, न्यायपालिका से यह उम्मीद थी कि वह संवैधानिक संयम और गरिमा की अंतिम शरणस्थली बनी रहेगी।”