होली मिलन समारोह के दौरान मनोज सिंह पर एक महिला पार्टी कार्यकर्ता के साथ जबरदस्ती रंग लगाने और अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा।
अमित शाह के करीबी सुनील कुमार पिंटू का कथित वीडियो विवाद, शेखपुरा के भाजपा जिलाध्यक्ष दारो बिंद का फोन पर अमर्यादित बातचीत का मामला, और अन्य नेताओं द्वारा महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान आ चुका है।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार 2023 में बिहार में महिलाओं के खिलाफ 22,952 अपराध दर्ज हुए, जिनमें 902 बलात्कार और 14,371 अपहरण के मामले शामिल हैं। साथ ही 11 जनवरी 2026 को पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत से भी महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
बिहार में सियासी कोहराम के बीच भाजपा नताओं के कारनामें भी काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं, भाजपा के नेता अपनी अश्लील मानसिकता वाली हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में आय दिन कुछ न कुछ सुनने को मिलता रहता है। इसी क्रम में बिहार में भाजपा के पूर्णिया जिलाध्यक्ष ने अपने कारनामें से पूरे सियासत के अखाड़े में भाजपा के ऊपर एक और दाग लगाया है।
दरअसल, बिहार में भाजपा एक तरफ सत्ता के प्रमुख नीतीश कुमार की विदाई का पूरा प्लान बना रही है, इसी बीच पूर्णिया के भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज सिंह ने एक एक महिला के साथ जबरदस्ती छेड़छाड़ किया और महिला के साथ गलत व्यवहार किया। बात उस समय की है जब बिहार में होली मनाई जा रही थी।
भाजपा कार्यालय में होली मिलन समारोह आयोजित था। सभी नेताओं का जमावड़ा था। कार्यालय में अश्लील भोजपूरी गानों की गूंज थी। सब लोग इन अश्लील गानों पर नाचने में व्यस्त थे। इसी बीच भाजपा की एक महिला नेत्री ने पूर्णिया जिलाध्यक्ष के साथ एक साझा तस्वीर अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश की और उनके पास गई। अचानक भाजपा नेता मनोज सिंह अपना आपा खो बैठे और महिला नेत्री को जबरदस्ती फूहड़ तरीके से पकड़कर रंग लगाने लगे। इस बीच महिला अपने आपको थोड़ी असहज महसूस करती है। नेताजी तो ठहरे नेताजी! उन्होंने अपने आपको यहीं पर नहीं रोका और उन्होंने महिला को रंग गलत जगहों पर भी लगाया।
भाजपा के जिलाध्यक्ष मनोज सिंह का मामला जैसे ही पार्टी के अन्य शीर्षस्तरीय नेताओं तक पहुंचा, पार्टी ने अनैतिक आचरण के आधार पर मनोज सिंह को जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया है, ताकि पार्टी की छवि धूमिल न हो। इसके बदले में भाजपा ने नए जिलाध्यक्ष को नियुक्त किया है, जिनका नाम संजीव सिंह बताया जा रहा है।
एक तरफ यह कार्रवाई हुई है, लेकिन इसकी क्या गारंटी है कि मनोज सिंह पार्टी में आगे किसी दूसरे बड़े पद पर नियुक्त नहीं होगा। अगर भविष्य में मनोज सिंह को भाजपा किसी दूसरे बड़े पद पर तैनात करती है तो मनोज सिंह के हौसले फिर से बुलंद होंगे और वह इससे भी बड़ा कोई अपराध कर सकता है।
यह भी पढ़ें : भ्रष्टाचारियों का गढ़ बन रहा बिहार, दो महीने में 28 भ्रष्ट लोकसेवक दबोचे गए, इतने लाख रुपये जब्त किये गए
बिहार (Bihar) में महिलाओं के खिलाफ यह पहला अमर्यादित और अनैतिक कृत्य नहीं है। इसके पहले भी बहुत सारे मामले सामने आए हैं जिनमें महिला को अपमानित करने की कोशिश की गई है।
साल 2025 में भाजपा के विधायक प्रत्याशी रहे सुनील कुमार पिंटू नाम के शख्स का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें महिला के साथ अश्लील हरकतें करते हुए दिखाई दे रहे थे।
भाजपा ने इतना सबकुछ होने के बावजूद पिंटू को साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी से टिकट दिया और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं सीतामढ़ी जाकर सुनील कुमार पिंटू के लिए जनता से वोट की अपील करते हैं और सुनील कुमार पिंटू को चुनाव में सफलता भी हासिल होती है।
वहीं दूसरी तरफ, बिहार के शेखपुरा जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष, दारो बिंद ने भी बीजेपी महिला नेत्री के साथ फोन पर अमर्यादित तरीके से बात किया था। दारो बिन्द के बारे में जानकारी में मिलने पर संजय जायसवाल ने कार्रवाई करते हुए उसको जिलाध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया।
सीतामढ़ी में भी एक भाजपा के प्रदेश स्तरीय संगठन प्रमुख ने सीतामढ़ी में कार्यरत बीजेपी महिला महामंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था। महिला ने इसके खिलाफ स्थानीय थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी।
दरभंगा में भाजपा नेता ने महिला के खिलाफ बयान देते हुए उसका चरित्र हनन करने की कोशिश किया था। यह बात जब सभी जगह फैलने लगी, तो भाजपा नेता ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
लगभग 20 साल से भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार (BJP-JDU coalition government) में महिलाएं बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। सत्ताधारी पार्टी के भीतर ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। इस तरीके के मामले जब भाजपा कार्यालय से ही निकालकर आते हैं, तो फिर सत्ताधारी दलों से महिलाएं कैसे एक सुरक्षित माहौल की उम्मीद रख सकती हैं।
एक तरफ बिहार में सीता मंदिर और रामायण मंदिर बनाने का काम चल रहा है, तो दूसरी तरफ बिहार में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था ही खतरे में है, जो सीता जीवित हैं, उनकी कोई कद्र नहीं है, इससे भाजपा सरकार का दोहरा चरित्र उजागर होता है।
साल 2023 के एनसीईआरबी (NCERB) आंकड़ों (जो साल 2025 में प्रकाशित हुआ) के मुताबिक , बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध की संख्या 22952 दर्ज पाई गई। इन दर्ज मामलों में से बलात्कार के 902 और अपहरण के 14371 मामले सामने आए। ये सिर्फ आँकड़े नहीं हैं, बल्कि ये आँकड़े बताते हैं कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरीके से चरमरा चुकी है।
11 जनवरी 2026 को पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा (पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में) ने अंत में बिहार की ध्वस्त कानून व्यवस्था के सामने दम तोड़ दिया और उसकी मौत हो गई। महिलाओं के खिलाफ अपराध का सिलसिला अभी तक नहीं रुका है, यह बढ़ता जा रहा है।
यह भी देखें :