भारत की दो महान शख़्सियतें: बचपन की दोस्ती से भारत के विकास तक, कहानी शेषन-श्रीधरन की।  X
राष्ट्रीय

भारत की दो महान शख़्सियतें: बचपन की दोस्ती से भारत के विकास तक, कहानी शेषन-श्रीधरन की

टी एन शेषन और डॉ. एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन बचपन से ही बीईएम हाई स्कूल में साथ पढ़े। श्रीधरन ने बताया कि उस दोस्ती का असर आज भी महसूस होता है, उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिस्पर्धा ने उन्हें भी अधिक मेहनत करने और उत्कृष्टता की ओर प्रेरित किया।

Author : Preeti Ojha
  • एक ही स्कूल से निकले दो नाम—एक ने लोकतंत्र को अनुशासन दिया, दूसरे ने देश की रफ्तार को नई दिशा।

  • बचपन की प्रतिस्पर्धा ने दो ऐसे व्यक्तित्व गढ़े, जिन्होंने भारत के चुनाव और परिवहन व्यवस्था को बदल दिया।

  • अलग रास्ते, अलग ज़िम्मेदारियाँ—पर T.N. Seshan और E. Sreedharan दोनों ने देशसेवा को ही अपना उद्देश्य बनाया।

भारत ने अपने विकास और लोकतंत्र के सफर में कई ऐसे शख़्स देखे हैं जिनका नाम आज भी लोगों द्वारा लिया जाता है। कुछ ऐसे लोग जिनके नाम को लोग देश की प्रतिष्ठा से जोड़ कर रखते है, उन्ही में से दो नाम हैं टी एन शेषन और डॉ. एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन — यानी देश के चुनाव सुधारों का जनक और “ मेट्रो मैन ऑफ़ इंडिया (Metro Man of India) ”।

टी एन शेषन (T.N. Seshan) ने अपने कर्तव्य और ईमानदारी से भारतीय चुनावी व्यवस्था में गहरे सुधार लाये और चुनाव आयुक्त (Election Commission) को एक सशक्त संवैधानिक संस्था बनाया। उनके कार्यकाल में उन्होंने Model Code of Conduct को लागू करते हुए ईवीएम और वोटर आईडी कार्ड के ज़रिये चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया और भ्रष्ट प्रथाओं को कड़ी नज़र में रखा। 

दूसरी तरफ़ डॉ. एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन (Dr. E. Sreedharan), जिन्हें “Metro Man of India” कहा जाता है, उन्होंने देश की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को आधुनिक रूप दिया। दिल्ली मेट्रो, कोंकण रेलवे जैसे प्रोजेक्ट्स को समय पर और बजट के भीतर सफलतापूर्वक पूरा कर, उन्होंने लाखों लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाया।

इन दो महान शख्सियतों ने न सिर्फ़ अपने-अपने क्षेत्र के क्रांतिकारी बन देश में बदलाव लाये बल्कि दोस्त, प्रतिस्पर्धी, और प्रेरणा के स्रोत भी बने , टी एन शेषन के साथ पढ़े साथी श्रीधरन ने सन 2019  में खुद अपने एक लेख में साझा किया थाकी दोनों ही एक साथ एक ही स्कूल और एक ही कक्षा में साथ पढ़े हुए हैं। 

बचपन से ही साथ पढ़े – श्रीधरन और शेषन की दोस्ती

टी एन शेषन और डॉ. एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन बचपन से ही बीईएम हाई स्कूल (BEM High School, Palakkad, Kerala)  में साथ पढ़े। एक तरफ़ शेषन सबसे ज़्यादा पढ़ने में तेज़ और किताबों के प्रति समर्पित, वहीं श्रीधरन खेलकूद और पढ़ाई दोनों में संतुलन रखते थे। उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा थी और यही प्रतिस्पर्धा बाद में उनकी ज़िंदगी में बड़ी उपलब्धियों का कारण बनी। 

श्रीधरन ने बताया कि शेषन बेंच के सामने बैठते थे क्योंकि वे कद में छोटे थे, जबकि वह खुद पीछे बैठते थे। SSLC (school leaving) परीक्षा में शेषन ने 452 अंक के साथ पहला स्थान प्राप्त किया, और श्रीधरन मात्र एक अंक से पीछे — 451 के साथ दूसरे स्थान पर आया। यह छोटी सी लड़ाई ही बाद में जीवन में बड़ी उपलब्धियों की नींव बनी।

स्कूल के बाद दोनों Victoria College, Palakkad में भी साथ पढ़े और दोनों को Madras Presidency में इंजीनियरिंग के लिये चयनित किया गया। वहां से उनकी राहें अलग हुईं: शेषन आईएएस (IAS) में गए और श्रीधरन इंजीनियरिंग की ओर। लेकिन दोस्ती और उनमें सीखी सीख हमेशा उनके जीवन का हिस्सा बनी रही। 

श्रीधरन ने बताया कि उस दोस्ती का असर आज भी महसूस होता है — जैसा कि उनके अनुभवों में लिखा है कि प्रतिस्पर्धा ने उन्हें भी अधिक मेहनत करने और उत्कृष्टता की ओर प्रेरित किया। 

टी एन शेषन (15th December 1932 – 10th November 2019)– चुनाव सुधारों का दृढ़ सेनानी

शेषन (T.N. Seshan) को केवल एक उत्कृष्ट प्रशासक नहीं, बल्कि चुनावी प्रणाली के संरक्षक के रूप में याद किया जाता है। 1990 में जब उन्होंने Chief Election Commissioner के रूप में पद संभाला, तब भारतीय चुनावी राजनीति में भ्रष्ट प्रथाएं, पैसों और दबाव का अत्यधिक प्रभाव था। 

शेषन ने दृढ़ निश्चय के साथ चुनाव आयुक्त (Election Commission) की शक्तियों को उपयोग में लाकर Model Code of Conduct को लागू किया। उन्होंने वोटर आईडी कार्डों का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया, उम्मीदवारों के खर्च को सीमित किया,सरकारी मशीनरी और धन का दुरुपयोग रोकने के उपाय किये और चुनावी malpractices जैसे भर्त्सना, धमकी, शराब का वितरण आदि पर कड़ी कार्रवाई की। 

उनके प्रयासों की वजह से 1999 में हजारों उम्मीदवारों को खर्च विवरण न देने या गलत जानकारी देने पर अयोग्य घोषित किया गया। यह भारत के लोकतंत्र की नींव को मज़बूत करने का एक बड़ा कदम था। 

शेषन का मानना था कि “लोकतंत्र तभी मजबूत बन सकता है जब हर मतदाता को निष्पक्ष चुनाव का अधिकार मिले” — और यही सोच आज भी चुनावी मानकों का आधार बनी हुई है। 

डॉ. एल्लाट्टुवलपिल श्रीधरन (12th June 1932 – Present) - परिवहन का मैचप्लान

जब भारत की बड़ी शहरों में ट्रैफिक जाम और यातायात की सुविद्या को लेकर प्रश्न खड़े हो रहे थे तब श्रीधरन ने लोगों की यात्रा को सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य लिया। उन्होंने कोंकण रेलवे (Konkan Railway) परियोजना को समय पर पूरा किया और फिर दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) को भारत के आधुनिक परिवहन का प्रतीक बनाया। 

उनकी नेतृत्व शैली और अनुशासन की वजह से दिल्ली मेट्रो को शुरुआती समय में ही सफल बनाया गया, परियोजनाओं को बजट और समय दोनों में पूरा किया गया, और कई अन्य शहरों में भी Metropolitan Transit Projects के लिये प्रेरणा की नींव रखी गयी। 

उनकी यह सोच थी कि “इंजीनियरिंग सिर्फ़ तकनीक नहीं — बल्कि मन और समाज को बेहतर दिशा देना है।” उनके कार्यों ने न केवल परिवहन के क्षेत्र को बदला, बल्कि करोड़ों लोगों के रोज़मर्रा के जीवन को भी सरल बनाया। 

देखा जाये तो दो महान व्यक्तित्व —T.N. Seshan (लोकतंत्र के संरक्षक) और Dr. E. Sreedharan (परिवहन प्रणाली के सुधारक) देशभक्ति और वीरता की मिसाल बने। दोनों ने अलग-अलग रास्ते चुने, पर देश के प्रति सेवा और समर्पण के मूल्य एक जैसे बनाए रखे।

(PO)