'धीरे-धीरे असली चेहरा सामने आया...', प्रशांत भूषण ने खोली केजरीवाल की पोल, बताया कैसे भ्रष्ट पार्टी बनी 'AAP'? wikimedia commons
राष्ट्रीय

'धीरे-धीरे असली चेहरा सामने आया...', प्रशांत भूषण ने खोली केजरीवाल की पोल, बताया कैसे भ्रष्ट पार्टी बनी 'AAP'?

प्रशांत भूषण जी ने एक इंटरव्यू में इस बात का ज़िक्र किया कि अन्ना आंदोलन के पश्चात् अरविंद केजरीवाल का असली चेहरा बहुत बाद में पहचान में आया

Author : न्यूज़ग्राम डेस्क

5 अप्रैल 2011…यह तारीख़ भारत के राजनीतिक इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ गया। यह वही तारीख़ है, जिस दिन अन्ना हज़ारे दिल्ली के रामलीला मैदान में देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ सहित ख़त्म करने के लिए जन लोकपाल बिल की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे। देश के हित में कुछ करने की आस में केवल भारत ही नहीं देश के बाहर रह रहे तमाम लोग, एक आह्वान मात्र पर भारत एक उम्मीद लेकर आए थे। हर किसी के मन में यही उम्मीद थी कि अब व्यवस्था में काफी कुछ सुधार हो सकता है। आंदोलन में शामिल अन्ना के समर्थकों ने अंततः एक पार्टी की स्थापना की।

देश से भ्रष्टाचार को जड़ सहित ख़त्म करना और पारदर्शिता इस पार्टी का अहम् मुद्दा था। बता दें कि इस पार्टी की स्थापना पर देश के प्रबुद्ध वर्ग के तमाम लोगों ने अपना समर्थन दिया और पार्टी में सक्रिय भूमिका भी निभा रहे थे जिसमें, सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ,ख्याति प्राप्त राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ,कुमार विश्वास, ,मुनीश कुमार रायज़ादा, अरविन्द केजरीवाल जैसे तमाम शख्शियत थे , जो पूरी तन्मयता से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए पार्टी के लिए योगदान दे रहे थे।

धीरे-धीरे यह पार्टी कुछ लोगों के हाथ की कठपुतली होती गयी और नाराज़ होकर  इस पार्टी से कुछ प्रबुद्ध जनों ने इस्तीफ़ा देना शुरू किया। प्रशांत भूषण ,योगेंद्र यादव ,कुमार विश्वास ,मुनीश कुमार रायज़ादा सहित तमाम ऐसे लोग, जो भारत की भ्रष्ट व्यवस्था को बदल देने की क्षमता रखते थे ,सभी पार्टी से अलग कर दिए गए।

पार्टी का नाम है आम आदमी पार्टी 'आप ', यह पार्टी भ्रष्टाचार को खत्म करने और पारदर्शिता के नाम पर बनी थी, परन्तु धीरे-धीरे यह पार्टी भी अन्य दलों की तरह भ्रष्टाचार और धनबल बाहुबल का केंद्र बनता गया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि ये सभी पार्टी से अलग कर दिए गए।

यह बात फिर से एक खबर बनकर सामने आया है, जब प्रशांत भूषण जी ने एक इंटरव्यू में इस बात का ज़िक्र किया कि अन्ना आंदोलन के पश्चात् अरविंद केजरीवाल का असली चेहरा बहुत बाद में पहचान में आया, जब झूठे आरोप के आधार पर कार्यकर्ताओं को निकाला जाने लगा और भ्रष्ट लोगों को शामिल किया जाने लगा। 

कौन हैं प्रशांत भूषण और किस बात से अतीत की खबरें पुनः जाग उठीं हैं? 

प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया (Supreme Court of India) के जाने माने वकील हैं।  प्रशांत भूषण उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के रहने वाले हैं ,इलाहबाद विश्वविद्यालय(University of Allahabad) के विधि संकाय (Faculty Of Law) के छात्र रहे और बाद में प्रिंसटोन विश्वविद्यालय (Princeton University) के छात्र रह चुके हैं । अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में जन लोकपाल बिल के लिए हुए अंदोलन में इनकी सक्रिय भूमिका थी। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल से मतभेद होने पर कापसहेड़ा की घटना के पश्चात् पार्टी से अलग कर दिए गए।

बता दें कि नरेश यादव के कापसहेड़ा (Kapashera) के रिसोर्ट में मीटिंग के दौरान रमजान चौधरी, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, कपिल मिश्रा और डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा मौजूद थे। इस रिसोर्ट में कथित रूप से अरविंद केजरीवाल ने उन लोगों को बाउंसर से पिटवाया, जो कभी उनके करीबी हुआ करते थे।

हाल ही में सत्य हिंदी के एक इंटरव्यू में प्रशांत भूषण ने कहा कि जब अरविन्द केजरीवाल ने गलत तरीके से आवाम (आम आदमी पार्टी वालंटियर एक्शन मंच ) के एक वालंटियर लीडर करण सिंह (Karan Singh) को यह कहकर निकाला कि, उस वालंटियर के माध्यम से दल के अंदर यह खबर फ़ैली कि सभी को भाजपा की सदस्यता स्वीकार करनी चाहिए। प्रशांत भूषण जी से पूछे जाने पर उस समय उन्होंने कहा कि यह खबर तो उनके माध्यम से फैलाने को नहीं कही गयी है। इस बात से धीरे-धीरे अरविंद केजरीवाल का असली चेहरा नज़र आने लगा लगा।

प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के द्वारा दिए इस बयान की बहुत जांच-पड़ताल के पश्चात् यह पता चला है कि जो झूठी ख़बर फैलाई गई थी वो अरविन्द केजरीवाल के कहने पर केजरीवाल के करीबी रहे दिलीप पाण्डेय के द्वारा फैलाई गई थी। ख़बर को इसलिए फ़ैलाया गया कि केजरीवाल सबको पार्टी से निकालने के बहाने का आधार बना सके और पार्टी केवल केजरीवाल के हाथ में रहे।

यह बात उनके बहुत सारे करीबियों ने कहा है, जिनमे से एक, डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने भी कहा जो कि आम आदमी पार्टी के सक्रीय नेताओं में से एक रह चुके हैं। बता दें कि मुनीश कुमार रायज़ादा उन लोगों में से एक हैं जो अन्ना आंदोलन को समर्थन देने के लिए विदेश से भारत आए और अन्ना आंदोलन सहित आम आदमी पार्टी के लिए बहुत कुछ इस उम्मीद से किया कि देश की व्यवस्था में सुधार हो परन्तु ऐसा नहीं हो पाया। वहीं देश की व्यवस्था में केजरीवाल के सहारे भ्रष्टाचार ने अपनी जड़ें और मजबूत कर ली हैं। 

कैसे भ्रष्ट हो गयी आम आदमी पार्टी और कहाँ चली गयी पारदर्शिता ?

बता दें आम आदमी पार्टी से निकले लोगों ने आरोप लगाया था कि पार्टी में में न ही पारदर्शिता बची और न ही इसमें नियमों कानूनों को तवज्जो दिया गया।  योगेंद्र यादव (Yogendra Yadav) ने एक इंटरव्यू में यह कहा है कि आम आदमी पार्टी एक मंदिर की तरह पार्टी थी, जिसे धीरे-धीरे व्यापार और भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया गया। देश के लोगों ने एक वैकल्पिक राजनीति के रूप में आम आदमी पार्टी को देखना शुरू किया था और यह भ्रष्टाचार के दलदल में फंसती चली गयी। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह पार्टी अब केवल केजरीवाल के व्यक्तिगत आकांछाओं को पूरा करने का माधयम भर रह गयी है

बता दें कि करण सिंह (Karan Singh) ने आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की सदस्यता 2012 में एक वालंटियर के रूप में ली थी। साल 2014 के लोक सभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के वाराणसी से चुनाव लड़ने के दौरान वाराणसी में अरविंद केजरीवाल के लिए काम भी किया था। उन्होंने कहा कि पार्टी को लेकर अरविन्द केजरीवाल को चिट्ठी लिखने वाले थे कि पार्टी में गलत लोगों को लाया जा रहा है और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही है। यह वो करने ही वाले थे कि भ्रामक सन्देश फ़ैलाने के मामले में उनको पार्टी से केजरीवाल ने निष्कासित कर दिया। यह झूठा आरोप उनके ऊपर अरविन्द केजरीवाल के द्वारा लगाया गया और निष्कासित किया गया। यह बात उन्होंने ट्रांसपेरेसी पारदर्शिता (Transparency Pardarshita ) वेब सीरीज़ के एक इंटरव्यू में कहा था

क्या अपना राजनीतिक अस्तित्व बचा पाएंगे अरविंद केजरीवाल?

अरविन्द केजरीवाल (Arvind Kejriwal) सहित आम आदमी पार्टी की जबसे 2025 के दिल्ली विधानसभा में करारी हार हुई है, यह हार धीरे-धीरे अरविन्द केजरीवाल के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न खड़ा कर रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि केजरीवाल ने जनता के साथ धोखा किया है। वहीं आंदोलन में साथ रहे कुमार विश्वास सहित अन्य साथियों ने कहा है कि केजरीवाल को अन्ना आंदोलन के पश्चात् जो ज़िम्मेदारी सौंपा गया था, वो उस रस्ते से भटक चुके हैं।

विधान सभा चुनाव में खुद की सीट हारने के बाद केजरीवाल पंजाब में ज्यादा नज़र आते हैं। इस पर कुमार विश्वास ने कहा है कि केजरीवाल खुद पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे हांलाकि वहां की जनता केजरीवाल को कभी भी स्वीकार नहीं करेगी।

पिछले 2025 विधान सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को दिल्ली (Delhi) में बुरी तरीके से हार का सामना करना पड़ा। यह हार ऐसी कि अरविन्द केजरीवाल और शिक्षा में सुधार का राग अलापने वाले मनीष सिसोदिया अपनी सीट भी हार गए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी सत्ता के शिखर तक जीतनी जल्दी पहुंची थी ,उतनी ही शीघ्र अब ये पार्टी भारतीय राजनीति से समाप्त होते हुए दिखाई दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह भी सवाल बना हुआ है कि केजरीवाल से अलग हुए उनके साथियों की बात में सच्चाई है, तो अन्ना आंदोलन के नाम से बनी कोई पार्टी जब जनता को धोखा देती है तो व्यवस्था में व्याप्त जड़ता को अगर कभी भविष्य में फिर से आंदोलन के माध्यम से ख़त्म करने की कोशिश की जाएगी तो आम जनता, फिर से किसी आंदोलन पर भरोसा करके उसमे शामिल हो सकती है या फिर नहीं।

[Rh/PY]