6 मार्च 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आंध्र प्रदेश शराब घोटाले में कार्रवाई करते हुए राजशेखर रेड्डी और सहयोगियों से जुड़ी लगभग ₹441.63 करोड़ की संपत्तियां (बैंक बैलेंस, एफडी और जमीन) Prevention of Money Laundering Act के तहत कुर्क कर दीं।
इस मामले की शिकायत 20 सितंबर 2024 को आईएएस अधिकारी मुकेश कुमार मीणा (Mukesh Kumar Meena) ने मामले के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरम हो गई। पूर्व मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी और उनकी पार्टी YSR Congress Party ने आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सरकार जांच को आगे बढ़ा रही है।
आंध्र प्रदेश में साल 2024 में लोकसभा चुनाव के साथ में विधानसभा के चुनाव भी हुए। जगनमोहन रेड्डी को बुरी तरीके से हार का सामना करना पड़ा और चंद्रबाबू नायडू को बड़ी सफलता हाथ लगी। चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। नई सरकार बने लगभग दो वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं, आंध्र प्रदेश में शराब घोटाले के नए मामले ने अब फिर आंध्र प्रदेश की राजनीति को चर्चा का विषय बना दिया है।
दरअसल, आंध्र प्रदेश में ईडी ने 6 मार्च 2026 को छापा मारा। छापेमारी के तहत ईडी ने राजशेखर रेड्डी सहित उनके परिवार के सदस्यों, बूनेटी चाणक्य और डोंथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी से जुड़ी कंपनियों की कुल 441.63 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया है। इनकी पूरी संपत्ति को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कुर्क किया गया है। कुर्क की गई इन संपत्तियों में भारी बैंक बैलेंस के अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बहुत ही कीमती जमीनें भी शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश में चल रहे इस पूरे खेल की शिकायत आईएएस अधिकारी और आंध्र प्रदेश सरकार में सचिव मुकेश कुमार मीणा ने 20 सितंबर 2024 को आंध्र प्रदेश क्राइम इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट में की थी। आंध्र प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव के द्वारा दर्ज कराए गए इस एफआईआर के आधार सीआईडी (CID) द्वारा इस पूरे प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है। एफआईआर में साफ तौर पर बताया गया था कि शराब सिंडिकेट की इस सुनियोजित लूट में सरकारी खजाने को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
जांच में सामने आया कि रिश्वत का यह काला धन हैदराबाद में कई गुप्त ठिकानों पर कैश के रूप में इकट्ठा किया गया और फिर सिंडिकेट के कैश हैंडलर्स द्वारा इसे ठिकाने लगाया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक 1,048.45 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल (रिश्वत के पैसे का रास्ता) का पर्दाफाश कर दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा है, साल 2019 से पहले आंध्र प्रदेश में शराब की खरीद और बिक्री बेहद पारदर्शी और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए होती थी, जिसके तहत हर एक शराब के बोतल को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाता थी। परंतु, साल 2019 के बाद बनी जगनमोहन रेड्डी की नई सरकार ने इस पारदर्शी व्यवस्था को जानबूझकर हटा दिया।
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प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पूरे किए गए इस अभियान के बाद पूरे आंध्र प्रदेश की सियासत फिर से गरमा गई है। जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाई एस आर सी पी का कहना है कि इस पूरे मामले को बेवजह राजनीति का मुद्दा बनाया जा रहा है।
जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि वर्तमान सरकार जानबूझकर इस तरीके के मामले मीडिया में ला रही है जिससे असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। रेड्डी ने कहा कि उनकी छवि को बेवजह धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। चंद्रबाबू नायडू के पास अपनी सरकार का हिसाब जनता को देने के लिए कुछ नहीं है। रेड्डी ने सारे आरोपों को बेबुनियाद और प्रतिशोध का मामला बताया।
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