राज्य सभा (Rajya Sabha) द्वारा गुरुवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) (Andhra Pradesh Reorganization) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया। यह महत्वपूर्ण विधेयक अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में वैधानिक मान्यता प्रदान करने के लिए है। यह विधेयक इस संबंध में आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव को कानूनी आधार भी प्रदान करता है। लोकसभा द्वारा इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। विधेयक पारित होने से पूर्व सदन में इस पर चर्चा आयोजित की गई।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस संशोधन के माध्यम से यह प्रावधान किया जा रहा है कि निर्दिष्ट अवधि के समाप्त होने के पश्चात आंध्र प्रदेश राज्य की राजधानी अमरावती होगी। साथ ही, अधिनियम में एक स्पष्ट स्पष्टीकरण जोड़ा जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि अमरावती को ही राज्य की वैधानिक राजधानी के रूप में मान्यता प्राप्त हो। इसके अतिरिक्त, आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा 28 मार्च को पारित संकल्प को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भी यह संशोधन आवश्यक है। इससे अमरावती का नाम राज्य की राजधानी के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा और किसी प्रकार की विधिक शंका या विवाद की स्थिति नहीं रहेगी।
उन्होंने कहा कि एक स्पष्ट और स्थिर राजधानी किसी भी राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता आती है, निर्णय लेने की प्रक्रिया सुदृढ़ होती है और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आती है। अमरावती को वैधानिक रूप से राजधानी का दर्जा मिलने से राज्य में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बुनियादी ढांचे का विकास तीव्र गति से होगा और समग्र आर्थिक प्रगति को बल मिलेगा।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार आंध्र प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए पूर्णत प्रतिबद्ध है। यह संशोधन विधेयक ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आंध्र प्रदेश को विकास की मुख्यधारा में और सशक्त बनाएगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपने विचार रखने वाले सभी संसद सदस्यों का आभार भी व्यक्त किया। सदन में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर व्यापक और सारगर्भित चर्चा हुई है। सभी सदस्यों ने राज्य के हित, उसके भविष्य और विकास को ध्यान में रखते हुए अपने सुझाव दिए हैं।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि जैसा कि विदित है, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत राज्य के पुनर्गठन के समय राजधानी के संबंध में प्रावधान किए गए थे। उस समय यह व्यवस्था की गई थी कि हैदराबाद एक निश्चित अवधि तक संयुक्त राजधानी के रूप में कार्य करेगा और उसके बाद आंध्र प्रदेश के लिए एक नई राजधानी विकसित की जाएगी, लेकिन अधिनियम में स्थायी राजधानी के संबंध में स्पष्ट वैधानिक उल्लेख नहीं था, जिसके कारण समय-समय पर व्याख्यात्मक और प्रशासनिक अस्पष्टता उत्पन्न हुई।
इसी क्रम में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अमरावती को राज्य की राजधानी के रूप में नामित किया। इसके बाद राज्य में राजधानी के विषय पर विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श होता रहा। हाल ही में, आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि अमरावती को आंध्र प्रदेश की वैधानिक राजधानी का दर्जा प्रदान करने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाएं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और उनके विधायी निर्णयों का पूर्ण सम्मान करती है। आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित इस प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए ही यह संशोधन विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य आंध्र प्रदेश की राजधानी के संबंध में विद्यमान किसी भी प्रकार की वैधानिक अस्पष्टता को दूर करना और स्थिति को स्पष्ट तथा स्थिर बनाना है।
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)