नार्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल ने यह फैसला सुनाया है कि अडानी की कंपनी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं में फंसी कंपनी है इसलिए अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी को निवेश न करने वाली कंपनियों की सूची में डाला जा रहा है। X
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अडानी की कंपनी पर लगा भ्रष्टाचार का आरोप, इस देश ने वेल्थ फंड निवेश सूची से निकाला बाहर

नार्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल ने यह फैसला सुनाया है कि अडानी की कंपनी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं में फंसी कंपनी है, इसलिए अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी को निवेश न करने वाली कंपनियों की सूची में डाला जा रहा है।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • नॉर्वे के सरकारी संप्रभु संपत्ति कोष गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड को अपनी निवेश न करने वाली कंपनियों (बहिष्करण सूची) में शामिल कर दिया है।

  • 15 मई 2024 को अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड को भी इसी कोष ने अपनी बहिष्करण सूची में डाला था। यानी अडानी समूह के खिलाफ यह पहली ऐसी कार्रवाई नहीं है।

  • अमेरिका में गौतम अडानी और सागर अडानी पर प्रतिभूति धोखाधड़ी और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। मामला अभी अमेरिका के अदालत में लंबित है।

अडानी की कंपनी को नार्वे में करारा झटका मिला है। नार्वे ने अडानी ग्रीन एनर्जी को निवेश न करने वाली कंपनियों की सूची में डाल दिया है। इसका कारण यह बताया गया है कि अडानी ग्रीन एनर्जी वित्तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार में संलिप्त कंपनी है। यह  खबर अडानी ग्रुप को बड़ा झटका दे गया।

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, नार्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (Government Pension Fund Global) ने यह फैसला सुनाया है कि अडानी की कंपनी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं में फंसी कंपनी है इसलिए अडानी ग्रीन एनर्जी (Adani Green Energy Limited) कंपनी को निवेश न करने वाली कंपनियों की सूची में डाला जा रहा है।

हालांकि इस फंड का प्रबंधन करने वाली कंपनी ने ऐसा कोई विस्तृत सबूत पेश नहीं किया है कि किन कारणों से अडानी की कंपनी को सूची में शामिल किया जा रहा है लेकिन भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। 

अदानी ग्रुप पर यह पहला आरोप नहीं है 

नार्वे की गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (Government Pension Fund Global) ने जिस तरीके से अडानी की कंपनी को निवेश न करने वाली कंपनियों की सूची में शामिल किया है यह पहली बार नहीं है।

इसके पहले अडानी को साल  2024 में तब झटका लगा था जब उनकी कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (Adani Ports and Special Economic Zone Limited) को 15 मई 2024 सूची में शामिल किया गया था।

हाल के घटनाक्रम के बारे में गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (Government Pension Fund Global) के प्रवक्ता ने कुछ भी विशेष कहने से परहेज किया है। 

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अमेरिका में लंबित है अडानी का मामला 

अडानी ग्रुप के खिलाफ अमेरिका में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा केस अभी लंबित पड़ा है। इस मामले में अभी तक कुछ खास फैसला नहीं आया है।

बता दें कि अमेरिका ने साल 2024 में ही अडानी की कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ प्रतिभूति धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अभियोग दायर किया था। 

अमेरिका के न्याय विभाग (Justice Department of America) ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह के अधिकारियों ने भारत मे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े ठेका प्राप्त करने के लिए रिश्वत का सहारा लिया गया।

यह मामला न्यूयॉर्क में  20 नवंबर 2024 को न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा अनसील किया गया। 

प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (U.S. Securities and Exchange Commission) ने बहुत बार यह आरोप लगाया कि प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन करके निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश की गई और उनको धोखा देने का प्रयास किया गया। 

जब यह मामला प्रकाश में आया तो उस समय भारत में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई थी। विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार को जमकर घेरने की  कोशिश की। आरोप यह लगाए गए कि नरेंद्र मोदी अडानी को बचाने के लिए समझौता कर रहे हैं। 

विपक्षी दलों ने इस मामले पर नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को घेरने का प्रयास किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बहुत बार इस मामले को सदन में उठाने की कोशिश करते रहे, लेकिन सदन में यह मामला उस तरीके से  नहीं उठ पाया जिस तरीके से राहुल गांधी सदन में बात रखना चाहते थे।

यह मुद्दा लोकसभा सहित अन्य राज्यों के चुनाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया। फिलहाल अदानी का यह केस अमेरिका के कोर्ट में लंबित पड़ा है।