पश्चिम बंगाल सहित पाँच राज्यों के चुनावी नतीजे के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव-2027 पर सबकी निगाहें टिकी हैं। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार पूर्ण बहुमत से बनी थी। भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे। सरकार बनने के बाद से लगातार ये आरोप लगते जा रहे हैं कि पंजाब में अपराध और भ्रष्टाचार ने व्यापक स्तर पर पाँव पसार लिया है। पंजाब सरकार में कुछ ऐसे मंत्री रहे हैं जिनके ऊपर घोटाले का आरोप है
घोटाला करने वालों की सूची में सबसे पहला नाम पंजाब के जालंधर सेंट्रल से आम आदमी पार्टी के विधायक रमन अरोड़ा का है। रमन अरोड़ा ने स्थानीय व्यापारियों को फर्जी नोटिस का हवाला देकर उनसे करोड़ों रुपए वसूले थे। बाद में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (Punjab Vigilance Bureau) ने कार्रवाई करते हुए 12 मई 2025 को रमन अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया।
पंजाब में अमरगढ़ से विधायक जसवंत सिंह गज्जनमाजरा को प्रवर्तन निदेशालय ने 6 नवंबर 2023 को गिरफ्तार कर लिया था। जसवंत सिंह गज्जनमाजरा के ऊपर 41 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप था। जसवंत सिंह गज्जनमाजरा की कंपनी तारा कॉर्पोरेशन लिमिटेड इस धोखाधड़ी में शामिल थी। 5 नवंबर 2024 को जसवंत सिंह गज्जनमाजरा रिहा कर दिए गए।
भटिंडा ग्रामीण से विधायक अमित रतन कोटफट्टा ने एक सरपंच से रिश्वत मांगा कि उसके गाँव का विकास करना है। इस कार्य हेतु विधायक ने पाँच लाख रुपए रिश्वत मांगी। इस मामले में बाद में कोटफट्टा पर कार्रवाई हुई।
साल 2022 में आम आदमी पार्टी सत्ता में आई। डॉ विजय सिंगला स्वास्थ्य मंत्री थे। विजय सिंगला ने दो महीने के भीतर एक शख्स से 16 करोड़ रुपए रिश्वत के रूप में मांग चुका था। हालांकि वह बाद में रंगे हाथों पकड़ा गया। भगवंत मान एक तरफ यह कहते हैं कि उनकी सरकार जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। लेकिन ये घोटाले सरकार को आईना दिखाते हैं।
21 मार्च 2026 की बात है, गगनजीत सिंह रंधावा ने आत्म हत्या कर ली थी। इसका कारण बताया गया कि पंजाब में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर लालजीत सिंह भुल्लर ने, राज्य के वेयर हाउस विभाग ने ट्रांसपोर्ट टेंडर निकाले थे। उस समय मंत्री भुल्लर ने अपने ही पिता के नाम से टेंडर के लिए आवेदन करवाया था लेकिन भुल्लर के पिता के पक्ष में टेंडर नहीं गया। गगनजीत सिंह रंधावा जो कि उसी विभाग का विभाग का जिला प्रबंधक था, को मंत्री भुल्लर के आवास पर बुलाया गया।
गगनजीत सिंह रंधावा के कनपटी पर पिस्तौल सटाकर उसके साथ जोर जबरदस्ती की गई। उसे दबाव में रखकर और परिवार का डर दिखाकर यह बात कबूल करवाया गया कि उसने टेंडर पास करने के बदले 10-10 लाख रुपए लिए हैं। इस पूरी घटना का वीडियो भी बनवाया गया। वीडियो में यही दिखाई दिया कि गगनजीत सिंह रंधावा से यह कहलवाया गया कि उसने 10 लाख रुपए की रिश्वत ली है।
लालजीत सिंह भुल्लर ने इसके बाद अलग-अलग समय पर गगनजीत सिंह रंधावा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। यह प्रताड़ना इतनी असहनीय हो गई कि उस आदमी के लिए जीना मुश्किल हो गया और उसने आत्महत्या कर ली।
इन लोगों के अलावा हरमीत सिंह पठानमाजरा (Harmeet Singh Pathanmajra) के ऊपर बलात्कार का आरोप लग चुका है। वहीं फौजा सिंह सरारी (Fauja Singh Sarari) के ऊपर आरोप लगे कि उन्होंने ठेकेदारों से जबरदस्ती पैसा वसूल करने की कोशिश की।
लालचंद कटारूचक (Lal Chand Kataruchak) सिंह के ऊपर ये आरोप लगे कि उन्होंने एक युवक को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ढेर सारा पैसा वसूल किए। हाल ही में विपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब विधानसभा में शराब पीकर नशे में पहुंचे थे। एक मुख्यमंत्री के तौर भगवंत मान का यह कृत्य सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा गया। इसी तरीके से कुलदीप सिंह धालीवाल (Kuldeep Singh Dhaliwal) के ऊपर आरोप लगे कि वो जिस विभाग के के मंत्री थे वह मंत्रालय अस्तित्व में ही नहीं था। 2025 में इस घोटाले का खुलासा हुआ।
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ये सारे लोग आम आदमी पार्टी से जुड़े नेता हैं। पंजाब में भगत सिंह का नाम लेकर इनलोगों ने पंजाबियों का दिल जीता और बदले में आम जनता को भ्रष्टाचार का कूड़ा दे दिया। इस पूरे मामले पर भारतीय लिबरल पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डॉ मुनीश कुमार रायज़ादा ने आम आदमी पार्टी पर तगड़ा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति बदलने और ईमानदार शासन देने का दावा किया था। लेकिन आज वही पार्टी देश की सबसे भ्रष्ट और अवसरवादी राजनीति का चेहरा बन चुकी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली यह पार्टी आज भ्रष्ट नेताओं का अड्डा बन गई है।
दिल्ली की जनता से किए गए बड़े-बड़े वादे आज भी अधूरे पड़े हैं। पिछले 10 वर्षों में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को विकास की दिशा देने के बजाय समस्याओं, अव्यवस्था और बदहाल व्यवस्था के दलदल में धकेल दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रदूषण, पानी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केवल प्रचार किया गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी जनता के सामने है।
पंजाब की सरकार अब पंजाब की नहीं रही, बल्कि दिल्ली के रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली बन चुकी है — जहाँ फैसले जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि सत्ता बचाने और भ्रष्टाचार छिपाने के लिए लिए जाते हैं।
दुखद है कि जिस पंजाब ने बदलाव की उम्मीद में वोट दिया था, आज वही जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। शराब नीति से लेकर सत्ता के दुरुपयोग तक, हर मोर्चे पर आम आदमी पार्टी ने लोगों का विश्वास तोड़ा है।
अरविंद केजरीवाल जिस राजनीति को बदलने आए थे, आज उनकी ही राजनीति लूट, झूठ और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है। पंजाब की जनता अब समझ चुकी है कि “ईमानदार राजनीति” केवल एक छलावा था।
2027 में पंजाब की जनता आम आदमी पार्टी को उसके झूठ, भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का जवाब देगी। जनता का विश्वास पूरी तरह टूट चुका है, और आने वाले चुनाव में पंजाब की जनता इन्हें बुरी तरह हराकर सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।
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