केंद्रीय बजट 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी, किसी एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लगातार 9 बजट पेश करने वाली वह पहली वित्त मंत्री बनेंगी।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: बजट से जुड़े दस्तावेज़ों के लीक होने से रोकने के लिए संसद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।
लंबी तैयारी प्रक्रिया: केंद्रीय बजट की तैयारी सितंबर से शुरू होकर कई चरणों से गुजरती है, जिसमें मंत्रालयों से खर्च का अनुमान, विशेषज्ञों से चर्चा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद फरवरी में बजट को संसद में पेश किया जाता है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी। निर्मला सीतारमण किसी एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लगातार 9 बजट पेश करने वाली पहली वित्तमंत्री बनेंगी। बजट को लेकर संसद की चाक-चौबंद को बढ़ा दिया गया है। किसी भी हालत में बजट से सम्बंधित कोई दस्तावेज़ लीक न हो इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है।
बता दें कि बजट आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और प्रस्तावित व्ययों (Estimated receipts and proposed expenditure) का विवरण है, यानी यह अवधि 1 अप्रैल (April) से लेकर आगामी वर्ष के 31 मार्च (March) तक चलती है। यह एक व्यापक वित्तीय योजना के रूप में कार्य करता है जो सरकार की आर्थिक रणनीति और नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाती है। बजट केंद्र सरकार (Central Government) और राज्य सरकारों (State Government) द्वारा प्रतिवर्ष तैयार और अधिनियमित किया जाता है। केंद्र सरकार के बजट को केंद्रीय बजट कहा जाता है और राज्य सरकार के बजट को राज्य बजट कहा जाता है।
केंद्रीय बजट(Union Budget) को तैयार करने में एक लम्बा समय लगता है। जिसमें एक चरणबद्ध प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसे में बजट को तैयार करने में किस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसकी तैयारी सितम्बर माह के पहले सप्ताह शुरू होती है और एक लम्बी प्रक्रिया के पश्चात् फरवरी माह के पहले सप्ताह में पेश किया जाता है। इसके चरणों को आसान भाषा में कुछ इस प्रकार समझ सकते हैं-
पहला चरण
पहले चरण में नए वित्त वर्ष के लिए अनुमानित खर्च की जानकारी केंद्रीय मंत्रालयों, केंद्रशासित प्रदेशों,राज्यों, सैन्य बलों, सभी प्रकार के विभागों सहित अन्य संस्थाओं से ली जाती है।
दूसरा चरण
दूसरे चरण में आर्थिक मामलों और राजस्व से जुड़े विभाग व्यापारियों नागरिक समाज, अर्थशास्त्रियों, किसानों,आर्थिक मामलों और राजस्व से जुड़े विभाग व्यापारियों आदि लोगों से चर्चा करते हैं।
तीसरा चरण
तीसरे चरण में विभागों से आमदनी और खर्च का ब्यौरा तैयार किया जाता है। इस आधार पर सरकार आने वाले वर्ष में आय और व्यय से सम्बंधित लेखा-जोखा तैयार करती है। इस चरण में अर्थशास्त्रियों, बैंकरों इत्यादि से चर्चा करके कर (Tax) में छूट से सम्बंधित मामले तैयार करती है। जिससे आर्थिक सहायता पर विचार किया जा सके।
चौथा चरण
चौथे चरण में बजट से सम्बंधित भाषण को तैयार किया जाता है। यह भाषण वित्तमंत्री सदन में पढ़ते हैं। यहाँ बजट लगभग बनकर तैयार हो चुका होता है। हालंकि इस मामले पर वित्तमंत्री अपने तरफ़ से फैसला करते हैं। यह पूरा काम अधिकारियों और कर्मचारियों के एक बड़े समूह द्वारा किया जाता है।
पांचवा चरण
यह बजट तैयारी का अंतिम चरण होता है। पांचवे चरण में बजट को सदन में पेश किया जाता है। वित्तमंत्री के सदन में बजट पेश करने से पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट की मीटिंग होती है फिर उसके पश्चात् वित्तमंत्री द्वारा सदन में बजट के प्रारूप को पेश किया जाता है।
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं (Elobal Economic Uncertainties) के दौर में पेश होने वाले इस बजट से सुधारवादी कदमों के जरिये विकास को गति मिलने की काफी उम्मीदें हैं। बता दें कि मोरारजी देसाई (Morarji Desai) ने सर्वाधिक 10 बजट पेश किया है। सीतारमण (Sitharaman) इस बार 9 वां बजट पेश करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (Morarji Desai) के 10 बजट (Budget) के कुल रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच जाएंगी।
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