11531 करोड़ के मालिक नरेंद्र मोदी, फिर भी लोगों को नहीं मिलेगी पीएम केयर फंड की जानकारी, PMO का सख्त निर्देश AI Generated
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11531 करोड़ के मालिक नरेंद्र मोदी, फिर भी लोगों को नहीं मिलेगी पीएम केयर फंड की जानकारी, PMO का सख्त निर्देश

पीएमओ से सीधा निर्देश है कि संसद में कोई भी सदस्य पीएम केयर फंड से जुड़ा सवाल नहीं पूछ सकता है। इस पर कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि ये सीधे तौर पर तानाशाही है।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • पीएम केयर फंड पर विवाद: कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार पीएम केयर फंड का हिसाब सार्वजनिक नहीं करना चाहती और संसद में इससे जुड़े सवाल पूछने पर रोक लगा दी गई है, जिसे विपक्ष तानाशाही करार दे रहा है।

  • पीएम केयर फंड की संरचना: यह फंड मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास के रूप में शुरू किया गया था, जिसके ट्रस्टी प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री और वित्तमंत्री हैं; यह न तो RTI के दायरे में आता है और न ही संसद में इस पर सवाल पूछे जा सकते हैं।

  • राजनीतिक टकराव और जवाबदेही का सवाल: विपक्ष का कहना है कि सरकार संसद और जनता के प्रति जवाबदेही से बच रही है, जबकि सरकार का पक्ष नियमों और ट्रस्ट की प्रकृति पर आधारित है; इससे संसदीय लोकतंत्र और पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।

संसद में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तकरार थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहुल गाँधी ने संसद में जनरल नरवणे की किताब का ज़िक्र करके पूरे देश के राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। वहीं अब कांग्रेस पार्टी ने केंद्र में भाजपा (BJP) सरकार पर एक नया आरोप लगा दिया है। यह आरोप प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष (Prime Minister's Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) से सम्बंधित है। बता दें कि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष को संक्षेप में पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) भी कहते हैं।

इस फंड को साल 2020 में कोरोना (COVID-19) आपदा के समय शुरू किया गया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पीएम केयर फंड का हिसाब भाजपा सरकार नहीं देना चाहती है। पीएमओ से सीधा निर्देश है कि संसद में कोई भी सदस्य पीएम केयर फंड (Prime Minister's Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) से जुड़ा सवाल नहीं पूछ सकता है। इस पर कांग्रेस ने भाजपा (BJP) पर आरोप लगाया है कि ये सीधे तौर पर तानाशाही है। जनप्रतिनिधियों को संसद में सवाल पूछने से रोका जा रहा है।

क्या है पीएम केयर फंड और कौन हैं इसके ट्रस्टी

साल 2020 के मार्च महीने में कोरोना (COVID-19) आपदा के समय पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) की शुरुआत की गई थी। कोरोना महामारी के समय पूरा विश्व परेशान था। पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) शुरू करने के पीछे का उद्देश्य कोरोना महामारी से लड़ने में देश को आर्थिक मदद देना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के पहल पर इसके शुरुआत की घोषणा की गई थी। देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने और गरीबों को कोरोना महामारी में आर्थिक मदद हेतु इस फंड की शुरुआत एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास (Public Charitable Trust) के रूप में की गई थी। यह ट्रस्ट 27 मार्च 2020 को ही नई दिल्ली (New Delhi) में पंजीकृत किया गया था। पीएम केयर्स फंड की वेबसाइट पर उपलब्ध 2022-23 की अंतिम प्रकाशित रसीद-भुगतान रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2023 के अंत तक इस फंड में 6,283.7 करोड़ रुपये की शेष राशि थी।

यह एक ट्रस्ट की तरह है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इनके साथ इसके अन्य सदस्यों की सूची में गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री भी शामिल हैं। यही लोग मिलकर निर्धारित करते हैं की ट्रस्ट का पैसा कब, कैसे और कहाँ लगाना है।

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क्यों हो रहा विवाद

बता दें कि पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास (Public Charitable Trust) के रूप में काम करता है। यह न तो RTI के अंतर्गत आता है और न ही इससे सम्बंधित कोई सवाल संसद में पूछा जा सकता है।

आरटीआई (RTI) के तहत सवाल केवल सार्वजनिक प्राधिकरण (Public Authority) से ही पूछा जा सकता है। सूचना के अधिकार अधिनियम (2005) के अनुसार, सार्वजनिक प्राधिकरण के अंतर्गत वे संस्थाएं आती हैं जिनका संचालन सरकार से जुड़ा हुआ हो या सरकार द्वारा स्थापित हो या सरकारी कार्य करने वाली गैर-सरकारी संस्थाएं (NGO) इत्यादि।

पीएम केयर फंड के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पीएमओ की तरफ से लोकसभा सचिवालय को सीधा निर्देश है कि पीएम केयर फंड(PM CARES Fund), पीएम राष्ट्रीय राहत कोष (Prime Minister's National Relief Fund) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से सम्बंधित कोई भी सवाल संसद में नहीं पूछा जाना चाहिए। बता दें कि एक जानकारी के अनुसार तीनों फंड का सम्मिलित बैंक बैलेंस ₹ 11531 करोड़ हैं। लोकसभा के नियम 41(2)(8) और 41 (2 )(17) के अनुसार लोकसभा में ऐसे विषयों पर सवाल नहीं किये जा सकते जिनसे सरकार का सीधे तौर पर कोई सरोकार नहीं हो।

विपक्ष का सरकार पर हमला

कांग्रेस (Congress) ने अपने ऑफिसियल X पर कहा है कि संसद में देश के जनप्रतिनिधि जनता की तरफ से सवाल पूछने हेतु जाते हैं। ऐसा क्या कारण है कि केंद्र की मोदी सरकार सवाल पूछने से रोक रही है। केंद्र की मोदी सरकार देश की जनता से क्या छिपाना चाहती है। कांग्रेस ने आगे सवाल किया है कि क्या देश की संसद अब केवल मोदी की मनमर्जी से चलेगा ? ये सरासर तानाशाही है, देश की संसद का अपमान है। पीएम मोदी (PM Modi) देश के लाखों-करोड़ों रूपए का हिसाब क्यों नहीं देना चाहते हैं ? देश की जनता से क्या छुपाना चाहते हैं नरेंद्र मोदी।

बता दें जब से नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं विपक्ष यह आरोप लगाता रहा है कि सरकार देश में तानाशाही लाना चाहती है। पिछले लोकसभा चुनाव में विपक्ष की तरफ से संविधान पर खतरे का मुद्दा बनाया गया। देश में जब-जब चुनाव होते हैं कोई न कोई मुद्दा उभरकर सामने आ ही जाता है। लेकिन संसदीय, लोकतांत्रिक प्रणाली में सरकार की जवाबदेही को सुनिश्चित करना जनता के लिए भलाई होती है। अगर सरकार की जवाबदेही तय नहीं होगी तो फिर सरकार की लोकतांत्रिक व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।