'सीरियल किलर' ('Serial killer') यह शब्द अक्सर हम टीवी सीरियल या फिर फिल्मों में सुनते हैं। असल में सीरियल किलर एक मानसिक रोगी होता है जिनकी सोच और मानसिकता को समझ पाना एक आम इंसान के लिए बेहद मुश्किल होता है। कोई अपने मतलब के लिए, कोई मजे के लिए तो कोई किसी बदले की आग में सीरियल किलर बन जाता है।
भारत में भी समय-समय पर ऐसे कई सीरियल किलर 'सीरियल किलर' ('Serial killer') सामने आए हैं, जिन्होंने अपनी हैवानियत से पूरे देश को दहला दिया। इन्हीं में से एक नाम है ‘सायनाइड मोहन’, जिसकी कहानी पर आधारित वेब सीरीज़ ‘दहाड़’ में दिखाई गई है। सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा स्टारर यह सीरीज़ Amazon Prime पर रिलीज़ हो चुकी है और लोगों के बीच खूब चर्चा में रही है।
आज हम आपको भारत के 11 ऐसे खतरनाक सीरियल किलर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी सच्ची कहानियाँ जानकर आपकी रूह कांप उठेगी और आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि इंसान इतना निर्दयी कैसे हो सकता है।
मोहन कुमार, जिसे ‘सायनाइड मोहन’ (Cyanide Mohan) कहा जाता है, ने 2003–2009 के बीच भारत के कर्नाटक और केरल में लगभग 20 महिलाओं को भरोसा दिला कर मार डाला। वह महिलाओं से दोस्ती कर उन्हें शादी का वादा करता और उनसे शारीरिक संबंध बनाता। अगले दिन वह उन्हें गर्भनिरोधक गोली देने का बहाना बनाकर साइनाइड से भरी गोली खिला देता, जिससे उनकी मौत हो जाती थी। इसके बाद वह उनकी जेवरात और कीमती सामान लेकर भाग जाता था। मोहन को अक्टूबर 2009 में मंगलुरु के पास गिरफ्तार किया गया। उसके पास से कई मोबाइल फोन, साइनाइड की गोलियाँ और पीड़ितों के जेवरात बरामद हुए, जिससे आरोप सिद्ध हुए। उसके खिलाफ बलात्कार, हत्या, धोखाधड़ी और अन्य मामलों में मुकदमे चलाए गए। उसे दिसंबर 2013 में मृत्यु दंड सुनाया गया था, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।
देवेंद्र शर्मा (Devendra Sharma), जिन्हें ‘Dr. Death’ कहा जाता है, एक आयुर्वेदिक डॉक्टर थे जिन पर टैक्सी और ट्रक ड्राइवरों की हत्या का आरोप है। पुलिस के अनुसार 2002–2004 के बीच वह और उसके साथी ड्राइवरों को फर्जी ट्रिप का झांसा देकर मारते, फिर उनके वाहनों को ग्रे मार्केट में बेचते थे। शवों को कासगंज, उत्तर प्रदेश में मगरमच्छों से भरे नहर में फेंक दिया जाता था ताकि सबूत न मिलें। उसका आपराधिक इतिहास हत्या, अपहरण, लूट और अवैध अंग प्रत्यारोपण रैकेट तक फैला हुआ था और उसने अधिक से अधिक 50 से 100 मौतों में शामिल रहने की बात भी मानी थी। उसे 7 मामलों में उम्रकैद और एक मामले में 2008 को मृत्युदंड सुनाया गया|
निठारी कांड (Nithari case) 2005–2006 में नोएडा के निठारी गांव में सामने आया जब एक घर के पास बच्चों और महिलाओं की कंकाल और खोपड़ियाँ मिलीं, जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई। सीबीआई जांच में पाया गया कि घर के मालिक मोहीन्दर सिंह पंढेर (Mohinder Singh Pandher) और उनके घरेलू मददगार सुरेंद्र कोली (Surendra Kohli) पर बच्चों और महिलाओं को फिरौती में लुभा कर घर ले जाकर बलात्कार और हत्या करने के आरोप लगे थे। पुलिस को ढेरों हड्डियाँ ड्रेन के आसपास से मिलीं। कोली ने कुछ मामलों में बलात्कार और हत्या का स्वीकरण भी किया था। दोनों को प्रारंभ में मृत्यु दंड दिया गया, लेकिन बाद में उच्च अदालत में सबूतों और प्रक्रिया की कमी के कारण फैसले में बदलाव हुआ। यह मामला भारत के सबसे भयानक अपराधों में से एक माना जाता है।
चार्ल्स शोभराज (Charles Sobhraj), जिसे ‘बिकनी किलर’ (Bikini Killer) के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है, ने 1975–1976 के बीच दक्षिणपूर्व एशिया में कई विदेशी यात्रियों की हत्या की थी। वह अक्सर यूरोपीय और अमेरिकी पर्यटकों को दोस्त बनाकर अपना शिकार बनाता, उन्हें नशीली दवाइयाँ देकर कमजोर करता और फिर हत्या कर उनका सामान लूट लेता था। एक हत्या में पटाया, थाईलैंड के समुद्र तट पर बिकिनी पहने महिला की लाश मिलने के कारण उसे यह नाम मिला। शोभराज ने कई देशों में फरार रहते हुए जालसाज़ी, हत्या, ज़हरीली दवाइयाँ देना और चोरी जैसे अपराध किए। उसे 1976 में भारत में गिरफ्तार किया गया और तिहाड़ जेल में सज़ा काटनी पड़ी, फिर बाद में नेपाल में भी उम्रकैद हुई। इसके कई मामलों में उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।
दरबारा सिंह भारत का कुख्यात सीरियल बेबी किलर (Serial Baby Killer) था, जिसने अप्रैल से अक्टूबर 2004 के बीच पंजाब के जालंधर और कपूरथला में 23 बच्चों को अगवा किया, जिनमें से 15 लड़कियाँ और 2 लड़के को उसने हत्या और सेक्सुअली असॉल्ट करने की बात कबूल की। वह मासूम बच्चों को टॉफियाँ और मिठाई देकर लुभाता और फिर उन्हें अलग जगह ले जाकर यौन हिंसा के बाद गला काट देता था। पुलिस ने कई शवों को Rayya-Khadoor Sahib रोड के पास बरामद किया। शुरुआती मामलों में उसे मृत्युदंड सुनाया गया, लेकिन बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सज़ा आजीवन कारावास में बदल दी। वह 6 जून 2018 को पैटियाला सेंट्रल जेल में इलाज के दौरान मर गया। उसके परिवार ने उसके शव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
ठग बेहराम (Thug Behram) 18वीं-19वीं सदी में भारत के सबसे कुख्यात सीरियल किलरों में से एक था, जो ठगगी गिरोह का नेता था। वह 1790 से 1840 के बीच यात्रियों, व्यापारियों और तीर्थयात्रियों को रूमाल (rumāl) से गला घोंटकर मारने के लिए जाने जाता था। उसकी गिरफ्तारी से पहले उसके नाम पर 931 से अधिक हत्या की गई मानी जाती हैं, हालांकि केवल कुछ मामलों की पुष्टि हुई थी। वह अपने साथियों के साथ रास्तों पर घूमता और काफिलों में घुलकर मौका पाकर हत्या और लूट को अंजाम देता था। उसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। अंत में 1840 में उसे फांसी की सजा दी गई थी।
केडी केम्पम्मा, जिसे ‘साइनाइड मल्लिका’ ('Cyanide Mallika') कहा जाता है, भारत की पहली महिला सीरियल किलर थीं। वह 1999 से 2007 तक लगभग छह महिलाओं को मौत के घाट उतार चुकी हैं। अपनी पीड़िताओं को वह मंदिरों के आस-पास लुभाती, उनके साथ दोस्ती कर उन्हें विशेष पूजा और ‘पवित्र जल’ का वादा करती थी। फिर वह उन्हें साइनाइड मिलाया पानी पिलाकर जहर दे देती और जैसे ही वे बेहोश हो जातीं, उनके सोने-चांदी के गहने और धन छीन लेती थी। उसके शिकार अधिकांश अकेली या परेशान महिलाएं थीं, जो उसे पवित्र मान बैठीं। पुलिस ने 31 दिसंबर 2007 को उसे गिरफ्तार किया जब वह अपने शिकारों के गहने बेचने की कोशिश कर रही थी। उसे शुरुआत में मृत्यु दंड सुनाया गया था, लेकिन बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।
रमन राघव, जिसे ‘साइको रमन’ (Psycho Raman) भी कहा जाता है, 1960 के दशक में मुंबई की झुग्गी-झोपड़ी और फुटपाथों पर रहने वाले गरीब लोगों के बीच खौफ़ का नाम बन गया था। वह रात के समय लाठी या भारी वस्तु से हमला करके सो रहे लोगों को मौत के घाट उतारता था। पुलिस को पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने 23 से 41 लोगों को मार डाला था, जिसमें पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शामिल थे। पीड़ितों के पास से वह सामान भी ले लेता था। राघव की मानसिक स्थिति को जांच में सिज़ोफ्रेनिया पाया गया, जिसके कारण उसकी मृत्यु दंड सजा बाद में आजीवन कारावास में बदल दी गई। वह 1995 में जेल में किडनी फेल्योर से मृत हो गया।
एम. जयशंकर, जिसे ‘Psycho Shankar’ के नाम से जाना गया, 2008 से 2011 के बीच तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में महिला-लोगों के साथ बलात्कार और हत्या करने वाला एक कुख्यात अपराधी था। वह एक ट्रक ड्राइवर था और अकेली महिलाओं, खासकर सड़क किनारे या दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाली महिलाओं को निशाना बनाता था। पुलिस के मुताबिक वह लगभग 30 बलात्कार और 15 हत्याओं में शामिल था, और कई अन्य मामलों में भी आरोपों का सामना कर रहा था। जयशंकर को 2009 में गिरफ्तार किया गया और बाद में बेंगलुरु सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 2013 में वह एक बार जेल से भेद कर भाग निकला और फिर पकड़ा गया। उसके मानसिक स्वास्थ्य पर संदेह जताया गया और 2018 में जेल में आत्महत्या कर ली।
रेणुका शिंदे और सीमा गावित (Renuka Shinde and Seema Gavit) भारत की कुख्यात सीरियल किलर बहनें हैं, जिन्होंने 1990 से 1996 के बीच महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में लगभग 13 छोटे बच्चों का अपहरण किया और उनमें से कई की हत्या की। उन्होंने इन बच्चों को पहले भीख मंगवाने और चोरी कराने में इस्तेमाल किया, लेकिन जब बच्चे रोते या सहयोग नहीं करते थे, तो उन्हें बेरहमी से मार दिया जाता था। कुछ बच्चों के सिर को भारी वस्तु से पटककर या पानी में डुबोकर मौत के घाट उतारा गया। कोल्हापुर सत्र न्यायालय ने 2001 में इन्हें बच्चों का अपहरण और हत्याओं के लिए फांसी की सजा सुनाई। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया, और दोनों बहनें आज भी जेल में हैं।
अक्कू यादव (Akku Yadav), जिनका असली नाम भरत कालीचरण यादव था, नागपुर (महाराष्ट्र) के कस्तूरबा नगर इलाके में लंबे समय तक बलात्कार, हत्या, लूट और आतंक फैलाने वाला कुख्यात अपराधी था। वह 1991 से 2004 तक कम से कम 40 से अधिक महिलाओं और लड़कियों को बार-बार बलात्कार का शिकार बनाता था और कई मामलों में घर में घुसकर लूट भी करता था। पुलिस पर आरोप था कि वह भ्रष्टाचार और रिश्वत के चलते उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती थी। जब 13 अगस्त 2004 को उसे कोर्ट में पेश किया गया, तो लगभग 200 महिलाएं हथियार लेकर पहुंची और उसने कई वर्षों तक उनके साथ किए अत्याचारों का बदला लेते हुए उसे लिंच कर मार दिया; उसे कम से कम 70 बार चाकू से घोंटा गया और लाल मिर्च भी डाली गई। कई लोगों ने बताया कि एक महिला ने उसके लिंग को भी काट दिया था।