होली भारत का एक प्रमुख हिंदू त्योहार है Sora Ai
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लठमार से फूलों तक...एक त्योहार, 11 अंदाज़! जानिए भारत की सबसे अनोखी होली परंपराएँ

होली भारत का एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसे फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। कहा जाता है कि होली बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक है।

Author : Sarita Prasad

होली भारत का एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जिसे फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। कहा जाता है कि होली (Holi) बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, भाईचारे और नई शुरुआत का प्रतीक है। होली से ठीक एक दिन पहले “होलिका दहन” (Holika Dahan) होता है, जिसमें लकड़ियाँ जलाकर बुराई के नाश का संदेश दिया जाता है। होली का इतिहास प्रह्लाद और होलिका से जुड़ा है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त प्रह्लाद जो भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के भक्त थे, उन्हें मारने के लिए प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे आग में न जलने का वरदान था। लेकिन जब होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, तो वह स्वयं जल गई और प्रह्लाद बच गए। इसी घटना की याद में होलिका दहन किया जाता है। वैसे तो भारत विविधताओं का देश है, यहां अलग-अलग शहरों में अलग तरीके से होली और होलिका दहन मनाई जाती है। तो आइए जानतें है कि भारत के कौन से शहर होली को कैसे मनाया जाता है।

1. लठमार होली, उत्तर प्रदेश

लठमार होली, उत्तर प्रदेश

बरसाना और नंदगाव में लठमार होली (Lath Maar Holi) बहुत प्रसिद्ध है। यह होली भगवान कृष्णा और राधा की कथा से जुड़ी है। माना जाता है कि कृष्ण जी राधा जी को छेड़ने बरसाना जाते थे। उसी परंपरा के अनुसार यहाँ की महिलाएँ पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से खुद को बचाते हैं। इस दौरान फाग गीत गाए जाते हैं और पूरा वातावरण हँसी-मजाक से भरा होता है। लोग दूर-दूर से इसे देखने आते हैं।

2. फूलों की होली, वृंदावन (उत्तर प्रदेश)

2. फूलों की होली, वृंदावन (उत्तर प्रदेश)

वृंदावन में फूलों की होली (Fulo ki Holi) विशेष रूप से मंदिरों में खेली जाती है। यहाँ रंगों की जगह फूलों की पंखुड़ियों से होली खेली जाती है। भक्त भगवान कृष्ण पर और एक-दूसरे पर फूल बरसाते हैं। पूरा वातावरण भक्ति गीतों और भजनों से गूंजता रहता है। यह होली शांति, प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। सिर्फ़ भारत के कोने कोने से ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में इसे देखने आते हैं।

3. फगुआ होली, बिहार

फगुआ होली, बिहार

बिहार की होली को फगुआ (Fagua) कहा जाता है। यहाँ लोग ढोलक और मंजीरे के साथ फगुआ गीत गाकर मनाते हैं। गाँवों में एक खास ख़ुशियों की लहर देखने को मिलती है। लोग रंग-गुलाल लगाते हैं और पारंपरिक पकवान जैसे गुजिया और ठेकुआ बनाते हैं। होलिका दहन के समय लोग नई फसल की बालियाँ आग में भूनकर खाते हैं। आपको बता दें कि यह सिर्फ़ रंगों का नहीं बल्कि कृषि संस्कृति से जुड़ा त्योहार भी है।

4.दोल यात्रा, पश्चिम बंगाल

दोल यात्रा, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की होली को दोल यात्रा (Daul Yatra) या दोल पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन खासकर कोलकाता तथा शांतिनिकेतन में बहुत प्रसिद्ध है। यह होली भगवान कृष्णा और राधा की भक्ति से जुड़ी हुई है। इस दिन मंदिरों में राधा-कृष्ण की मूर्तियों को सजे हुए झूले (दोल) में बैठाकर शोभायात्रा निकाली जाती है। भक्त अबीर-गुलाल चढ़ाते हैं, भजन-कीर्तन और नाच करते हैं। आपको बता दें कि रबीन्द्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन में इसे “बसंत उत्सव” के रूप में शुरू किया था, जहाँ छात्र पीले या केसरिया वस्त्र पहनकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। दोल यात्रा की विशेषता यह है कि यहाँ होली शांति, सादगी और भक्ति भाव से मनाई जाती है। रंगों के साथ संगीत, नृत्य और बसंत ऋतु का स्वागत इस उत्सव को खास बनाता है।

5.होला मोहल्ला, पंजाब

होला मोहल्ला, पंजाब

पंजाब में मनाया जाने वाला होला मोहल्ला (Hola Mohalla) सिखों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो होली के अगले दिन से शुरू होता है। इसका मुख्य आयोजन आनंदपुर साहिब में होता है। इस परंपरा की शुरुआत गुरु गोविंद सिंह जी ने वर्ष 1701 में की थी। इसका उद्देश्य सिखों को शारीरिक रूप से मजबूत, साहसी और युद्ध कौशल में निपुण बनाना था। होला मोहल्ला के दौरान बड़े-बड़े जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें सिख योद्धा घुड़सवारी, तलवारबाज़ी, भाला चलाना और अन्य मार्शल आर्ट का प्रदर्शन करते हैं। गुरुद्वारों में कीर्तन, पाठ और अरदास होती है। साथ ही, विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है, जहाँ सभी लोगों को मुफ्त भोजन भी कराया जाता है।

6.रंग पंचमी, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में रंग पंचमी होली

महाराष्ट्र में रंग पंचमी (Rang Panchami) होली के पाँच दिन बाद मनाई जाती है। यह त्योहार फाल्गुन मास की पंचमी तिथि को आता है। माना जाता है कि इस दिन रंग खेलने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माहौल शुद्ध होता है। महाराष्ट्र के कई शहरों में इसे बड़े उत्साह से मनाया जाता है। खासकर मुम्बई और अन्य जगह में लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं। इस दिन लोग सड़कों पर निकलकर ढोल-ताशों के साथ नाचते-गाते हैं। बच्चे और बड़े सभी पानी के रंगों और पिचकारी से होली खेलते हैं। रंग पंचमी की विशेषता यह है कि यह पूरी तरह रंगों का उत्सव है। इसमें खुशी, मेल-जोल और भाईचारे का भाव दिखाई देता है। यह त्योहार समाज में प्रेम और एकता का संदेश देता है।

7. शिग्मो, गोवा

शिग्मो नाम का वसंत उत्सव गोवा में मनाया जाता हैं।

शिग्मो (Shigmo) नाम का वसंत उत्सव गोवा में मनाया जाता हैं। यह त्योहार खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन पणजी और अन्य शहरों में भी इसकी झांकियाँ और परेड निकाली जाती हैं। शिग्मो वसंत ऋतु के आगमन और अच्छी फसल की खुशी में मनाया जाता है। यह गोवा की लोक संस्कृति और परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस दौरान लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर लोकनृत्य और लोकगीत प्रस्तुत करते हैं। सड़कों पर रंग-बिरंगी झांकियाँ निकाली जाती हैं, जिनमें पौराणिक कथाओं और स्थानीय इतिहास को दर्शाया जाता है। कुछ स्थानों पर हल्के रंगों से भी होली खेली जाती है।

8.याओसांग, मणिपुर

याओसांग, मणिपुर

मणिपुर में होली को याओसांग कहा जाता है। यह त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा से शुरू होकर पाँच दिनों तक मनाया जाता है। याओसांग मणिपुर के मैतेई समुदाय का प्रमुख उत्सव है। यह त्योहार भगवान कृष्णा की भक्ति और वसंत ऋतु के स्वागत से जुड़ा है। इस उत्सव की शुरुआत छोटे-से झोपड़ी जैसे ढांचे को जलाने से होती है, जो बुराई के अंत का प्रतीक है। इसके बाद बच्चे और युवा घर-घर जाकर दान इकट्ठा करते हैं, जिसे “नाकथेंग” कहा जाता है। शाम को प्रसिद्ध लोकनृत्य “थाबल चोंगबा” किया जाता है, जिसमें युवा गोल घेरा बनाकर चांदनी रात में एंजॉय करते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और पूजा भी होती है। इस उत्सव में रंग खेलने के साथ-साथ खेलकूद प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं। यह त्योहार मणिपुर की संस्कृति, एकता और खुशी का प्रतीक है।

9.खड़ी होली, उत्तराखंड

खड़ी होली, उत्तराखंड

उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में मनाई जाने वाली खड़ी होली एक सांस्कृतिक होली है। यह होली बसंत ऋतु के आगमन की खुशी में मनाई जाती है और इसका संबंध भगवान कृष्णा की भक्ति से भी जुड़ा है। यह त्योहार फाल्गुन मास में शुरू होकर कई दिनों तक चलता है। खड़ी होली में लोग किसी मंदिर या खुले आंगन में इकट्ठा होते हैं और पारंपरिक होली गीत गाते हैं, इसलिए इसे “खड़ी होली” कहा जाता है। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की मधुर धुन पर गीत गाया जाता है। इसमें रंगों का प्रयोग बहुत कम होता है लेकिन लोग काफी एंजॉय करते हैं।

10.मंजुली होली – असम

मंजुली होली – असम

असम के माजुली द्वीप में मनाई जाने वाली होली को मंजुली होली या “फाकुवा” भी कहा जाता है। यह उत्सव फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। मंजुली विश्व का प्रसिद्ध नदी द्वीप है और यहाँ वैष्णव संप्रदाय की परंपरा बहुत मजबूत है। मंजुली होली की विशेषता इसका आध्यात्मिक वातावरण, सादगी और सांस्कृतिक परंपरा है। यह त्योहार भक्ति, एकता और असम की समृद्ध लोक संस्कृति का सुंदर प्रतीक है।

11. धुलंडी, हरियाणा

धुलंडी, हरियाणा

हरियाणा में होली के अगले दिन मनाई जाने वाली होली को धुलंडी कहा जाता है। यह फाल्गुन पूर्णिमा के बाद वाले दिन बड़े उत्साह से मनाई जाती है। धुलंडी का संबंध होलिका दहन के बाद खुशियों और रंगों के उत्सव से है। इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी मनाते हैं और आपसी रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। हरियाणा में धुलंडी खासतौर पर पारिवारिक मज़ाक और परंपराओं के लिए जानी जाती है। कई जगहों पर भाभी अपने देवर को रंग लगाकर मजाक करती हैं, जिसे हंसी-खुशी की परंपरा माना जाता है। [SP/MK]