जंग बहादुर कचौड़ी वाला (Jung Bahadur Kachori Wala) X
जीवन शैली

कचालू की चटनी और उड़द दाल का जादू... दिल्ली में यहाँ की कचौड़ी का जवाब नहीं, पूरी दुनिया है दीवानी

दिल्ली सिर्फ अपनी भीड़, ट्रैफिक और ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब स्ट्रीट फूड के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। यहां की गलियों में घुली खुशबू ऐसी होती है, जो चलते-चलते भी आपको रुकने पर मजबूर कर दे।

Author : Sarita Prasad

दिल्ली सिर्फ अपनी भीड़, ट्रैफिक और ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लाजवाब स्ट्रीट फूड के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। यहां की गलियों में घुली खुशबू ऐसी होती है, जो चलते-चलते भी आपको रुकने पर मजबूर कर दे। इन्हीं के बीच एक नाम सालों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है और वो है जंग बहादुर कचौड़ी वाला (Jung Bahadur Kachori Wala)।

कहते हैं कि इस जगह का स्वाद सिर्फ आम लोगों का ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार (Akshay Kumar) का भी फेवरेट रहा है। क्योंकि ये दुकान उनके ननिहाल के पास है, और बचपन में वो यहां की गरमा-गरम कचौड़ी का मजा ले चुके हैं। जैसे ही कड़ाही से निकली सुनहरी, करारी कचौड़ी पर खट्टी-तीखी कचालू की चटनी डाली जाती है, उसका नजारा ही दिल जीत लेता है। पहला कौर लेते ही ऐसा लगता है जैसे स्वाद और यादों का परफेक्ट मेल हो गया हो। यही वजह है कि यहां की कचौड़ी सिर्फ एक डिश नहीं, बल्कि एक एहसास बन चुकी है जिसे लोग एक बार नहीं, बार-बार जीना चाहते हैं।

जंग बहादुर कचौड़ी वाला

जंग बहादुर कचौड़ी वाला (Jung Bahadur Kachori Wala)

जंग बहादुर कचौड़ी वाला (Jung Bahadur Kachori Wala) की कहानी शुरू होती है जंग बहादुर जी से, जिन्होंने लगभग 1940-1950 के दशक में इस स्वाद की नींव रखी। उस समय उनके पास न बड़ी दुकान थी, न ज्यादा पैसे बस एक छोटा-सा ठेला और कुछ अलग करने का जज़्बा था। कहा जाता है कि जंग बहादुर जी को बचपन से ही खाना बनाने का शौक था, और वो चाहते थे कि लोग कम पैसों में भी अच्छा और स्वादिष्ट खाना खा सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने कचौड़ी बनाना शुरू किया। शुरुआत में वो खुद ही दाल पीसते, मसाले तैयार करते और सुबह-सुबह ताज़ी कचौड़ी बनाकर बेचते थे। उनकी बनाई कचौड़ी का स्वाद इतना जबरदस्त था कि लोग दूर-दूर से आने लगे। खास बात यह है कि उनके नाम की तरह ही उनकी कचौड़ी भी “जंगदार” है हल्की तीखी, मसालेदार और अंदर से भरपूर फ्लेवर वाली। सबसे खास बात ये थी कि उन्होंने कभी स्वाद और क्वालिटी से समझौता नहीं किया। वही पारंपरिक रेसिपी आज भी इस दुकान की पहचान है, जिसे उनका परिवार आगे बढ़ा रहा है।

जेब हल्की, लेकिन स्वाद फुल ऑन!

पुरानी दिल्ली की गली में चांदनी चौक में बसा ‘जंग बहादुर कचौड़ी वाला’ (Jung Bahadur Kachori Wala) ये छोटी-सी दुकान ढूंढने में भले थोड़ा टाइम लगे, लेकिन जैसे ही आप वहां पहुंचते हैं, खुशबू ही आपको बता देती है आप सही जगह आ गए हैं।

यहां पहुंचना भी आसान और सस्ता है। अगर आप मेट्रो से आते हैं, तो चांदनी चौक या चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन (Chawri Bazar Metro Station) तक का किराया ₹10–₹40 के बीच पड़ता है। वहां से रिक्शा लेंगे तो ₹20–₹50 में सीधा दुकान तक पहुंच जाएंगे, या फिर 5–10 मिनट पैदल चलकर भी असली दिल्ली का मजा ले सकते हैं। अब सबसे जरूरी बात खाने का खर्च! यहां की गरमा-गरम कचौड़ी सिर्फ ₹30–₹60 में मिलती है, जिसमें मसालेदार आलू की सब्जी और खट्टी-तीखी कचालू चटनी फ्री में मिलती है। अगर आप एक्स्ट्रा चटनी या सब्जी लेते हैं, तो ₹10–₹20 और जोड़ लीजिए। मतलब कुल ₹100–₹150 में आपका पूरा फूड एक्सपीरियंस तैयार कम पैसे में फुल स्वाद और यादगार सफर!

अक्षय कुमार की यादें और “जंगदार” स्वाद का तड़का

दिलचस्प बात यह है कि यह दुकान बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के ननिहाल के पास स्थित है।

दिलचस्प बात यह है कि यह दुकान बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार (Akshay Kumar) के ननिहाल के पास स्थित है। उन्होंने कई इंटरव्यू में बताया है कि बचपन में वह यहां की कचौड़ी खाने आया करते थे। अक्षय कुमार (Akshay Kumar) ने इस जगह के स्वाद की तारीफ करते हुए कहा है कि “ऐसा स्वाद कहीं और नहीं मिलता, ये बिल्कुल बचपन की यादों जैसा है।” अब बात करें यहां की कचौड़ी की तो इसका स्वाद सच में इसके नाम जैसा ही “जंगदार” है। उड़द दाल को रातभर भिगोकर उसमें देसी मसाले मिलाए जाते हैं, फिर आटे की लोई में भरकर धीमी आंच पर तला जाता है। बाहर से करारी और अंदर से मसालेदार हर बाइट में अलग ही मजा आता है। लेकिन असली जादू तब होता है, जब उस पर कचालू की खट्टी-तीखी चटनी डाली जाती है। पहला कौर लेते ही हल्की-सी जलन, आंखों में आंसू और जुबान पर तीखापन लेकिन यकीन मानिए, इसी में इसका असली मजा छुपा है। जब तक प्लेट खत्म न हो जाए, दिल को सुकून ही नहीं मिलता!

सिर्फ कचौड़ी नहीं, पूरा मेन्यू है लाजवाब!

हालांकि यहां की पहचान कचौड़ी है, लेकिन इस दुकान का मेन्यू सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं है। यहां आपको गरमा-गरम आलू की सब्जी मिलती है, जो हल्की तीखी, मसालेदार और देसी फ्लेवर से भरपूर होती है कचौड़ी के साथ इसका कॉम्बिनेशन कमाल का लगता है। इसके अलावा यहां समोसा भी मिलता है, जो बाहर से कुरकुरा और अंदर से मसालेदार आलू की फिलिंग के साथ आता है, जिसकी कीमत लगभग ₹20–₹30 होती है। अगर आप चटपटा खाने के शौकीन हैं, तो यहां की चाट जरूर ट्राय करें। खट्टी-मीठी चटनी, मसाले और ताजी सामग्री का ऐसा बैलेंस मिलता है कि हर बाइट मजेदार लगती है, जिसकी कीमत करीब ₹40–₹60 होती है। कभी-कभी यहां मीठे पकवान भी मिल जाते हैं, जो ₹30–₹50 के बीच होते हैं। सबसे खास बात यहां हर चीज ताजा बनती है, बिना किसी दिखावे के, सिर्फ असली स्वाद के साथ, जो सीधे दिल तक पहुंचता है।

एक बार खाओ, बार-बार आओ!

जंग बहादुर कचौड़ी वाला की असली ताकत सिर्फ इसकी कचौड़ी नहीं, बल्कि उसका वही पुराना जादुई स्वाद है जो सालों बाद भी जरा सा भी नहीं बदला। एक बार जो यहां खा ले, वो खुद को दोबारा आने से रोक ही नहीं पाता। यही वजह है कि यहां हर वक्त भीड़ लगी रहती है। लोग लाइन में खड़े होकर भी इंतजार करने को तैयार रहते हैं। गरमा-गरम कचौड़ी, ऊपर से तीखी चटनी और साथ में देसी अंदाज़ ये कॉम्बिनेशन दिल और दिमाग दोनों में बस जाता है। दुकान भले ही छोटी और साधारण हो, लेकिन स्वाद इतना दमदार है कि बड़े-बड़े रेस्टोरेंट भी फीके लगते हैं। अगर असली दिल्ली का स्वाद चखना है, तो यहां आना बनता है! [SP/MK]