गुस्सा पर अगर कंट्रोल न किया जाए तो यह लंबे समय में दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर की समस्या और मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।  riverbend counselling
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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक गुस्सा, इन उपायों से करें कंट्रोल

गुस्सा पर अगर कंट्रोल न किया जाए तो यह लंबे समय में दिल की बीमारियों, ब्लड प्रेशर की समस्या और मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।

Author : IANS

क्रोध इंसानी भावना का हिस्सा है; यह कभी-कभी आपके अंदर हिम्मत भरता है, तो कभी गुस्से के अनियंत्रित होने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।

आयुर्वेद में भी गुस्सा कफ और पित्त के असंतुलन का संकेत माना गया है, जो तन और मन दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए अचानक गुस्सा आने पर तुरंत कुछ उपाय करना जरूरी है, ताकि इसे नियंत्रित किया जा सके।

जब गुस्सा आता है, तो आपका मस्तिष्क और शरीर दोनों तनाव में आ जाते हैं। ऐसे में दिल तेजी से धड़कने लगता है। इस स्थिति में सबसे पहला और आसान तरीका है सांस पर ध्यान देना। अपनी आंखें बंद करें और लंबी, गहरी सांस लें।

विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि सांस पर नियंत्रण नर्वस सिस्टम को शांत करता है। इसके लिए चार सेकंड के लिए सांस अंदर लें, सात सेकंड तक रोकें और आठ सेकंड में धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया से आपका मस्तिष्क अपने इमोशनल मोड से लॉजिकल मोड में आता है, जिससे गुस्सा कम होता है और आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं।

गुस्सा आने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे में एक गिलास ठंडा पानी धीरे-धीरे पीना लाभकारी साबित होता है। यह न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि मस्तिष्क को भी शांत करता है। आयुर्वेद में भी पानी के सेवन को मन और शरीर को संतुलित करने वाला माना गया है।

गुस्से की स्थिति में तुरंत बहस या प्रतिक्रिया करने के बजाय वहां से थोड़ी दूरी बनाना सबसे असरदार उपाय है। पांच मिनट के लिए मौन धारण करना और किसी शांत जगह पर जाना गुस्से की तीव्रता को कम करने में मदद करता है। यह दूरी आपको स्थिति को बेहतर तरीके से समझने और नियंत्रित प्रतिक्रिया देने का अवसर देती है।

आयुर्वेद में गुस्सा को शांत करने के लिए हल्दी, अश्वगंधा और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियों की सलाह दी जाती है। तुलसी के पत्ते चबाने या तुलसी की चाय पीने से मन शांत होता है। हल्दी दूध भी मानसिक शांति बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है। इसके अलावा, योग और ध्यान करना भी गुस्से को नियंत्रित करने में मददगार है। नियमित प्राणायाम, खासकर अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे अभ्यास नर्वस सिस्टम को संतुलित करते हैं और पित्त की तीव्रता कम करते हैं।

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