प्रकृति का अनमोल उपहार है शहतूत, स्वाद के साथ देता है सेहत का वरदान IANS
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प्रकृति का अनमोल उपहार है शहतूत, स्वाद के साथ देता है सेहत का वरदान

आयुर्वेद में शहतूत की छाल, फल और जड़ को गुणों का खजाना माना गया है। सदियों में उनका इस्तेमाल कई रोगों में होता आया है, जैसे खांसी, बुखार और डायबिटीज।

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गर्मियों की शुरुआत के साथ रसीले फल भी बाजार में आने लगते हैं। तरबूज और खरबूज के साथ शहतूत भी मार्च और अप्रैल के महीने में ही आता है, लेकिन खास बात यह है कि यह एक सीमित समय के लिए आता है।

शहतूत को अन्य भाषाओं में 'तूत' या 'मलबेरी' के नाम से भी जाना जाता है। शहतूत के स्वाद के बारे में सभी बात करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना है? यह पेड़ अपनी रसीली फलियों, पत्तियों और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।

आयुर्वेद में शहतूत की छाल, फल और जड़ को गुणों का खजाना माना गया है। सदियों में उनका इस्तेमाल कई रोगों में होता आया है, जैसे खांसी, बुखार और डायबिटीज। शहतूत के रसीले फल विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और पाचन में मदद करते हैं। इसे आयुर्वेद में पित्तवातशामक माना गया है, जो रक्त को शुद्ध करने में भी मददगार है। इसका स्वाद मीठा और खट्टा दोनों होता है,जो शरीर में बढ़ रहे वात को संतुलित करने में सहायक है।

इसकी छाल का काढ़ा और चूर्ण भी कई रोगों में लाभदायक होता है, हालांकि सेवन से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

शहतूत के फल में एंटी-एजिंग गुण मौजूद होते हैं, जो बढ़ती उम्र के असर को कम करता है और झुर्रियों को आने से रोकता है। अगर चेहरे पर दाग-धब्बे और रूखापन रहता है, तब भी फल का सेवन करना लाभकारी होगा। यह चेहरे को नई चमक देगा और आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। भरपूर विटामिन 'ए' का सोर्स होने की वजह से यह आंखों की रोशनी को बढ़ाता है।

शहतूत में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण (Mulberry has antibacterial and antifungal properties) भी होते हैं, जो त्वचा को बाहरी संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं। यह एक्जिमा-सोरायसिस जैसे रोगों में भी दवा की तरह काम करते हैं। इसके साथ ही शहतूत में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, तो इसका सेवन मधुमेह के रोगी भी कर सकते हैं। यह रक्त में शर्करा की मात्रा को संतुलित रखता है और इसमें आयरन की मात्रा भी अधिक होती है। शरीर में रक्त की पूर्ति और एनीमिया से बचने के लिए इसका सेवन रोजाना किया जा सकता है।

(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)