भारत में हिंदी विवाद, दावोस में सम्मान
भारत में पढ़े सोमालिया के डिप्टी PM, हिंदी में इंटरव्यू
ट्रंप के बयान पर सोमालिया का करारा जवाब
भारत में भाषा को लेकर काफी विवाद है। खासकर हिंदी (Hindi) भाषा को लेकर। इसको लेकर हर कोई बंटा हुआ है। शायद यही कारण है कि अनुमान के मुताबिक भारत में कुल 14 राज्यों का गठन भाषा के आधार पर हुआ है। 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम (States Reorganisation Act) लागू हुआ, जिसके तहत राज्यों की सीमाएँ मुख्य रूप से भाषाई पहचान को ध्यान में रखकर तय की गईं।
वहीं, 1965 के दौर में भाषा को लेकर पहली लड़ाई हुई। तमिल जनता और द्रविड़ दलों ने हिंदी (Hindi) को एकमात्र भाषा बनाने को लेकर खूब विरोध किया। हालांकि, संविधान निर्माता बी आर अंबेडकर (BR Ambedkar) ने अनुच्छेद 343 में इसका जिक्र किया है। इसमें लिखा है कि संघ की राजभाषा हिंदी (देवनागरी लिपि में) होगी और अंकों का रूप अंतरराष्ट्रीय होगा।
इसके खंड 2 में बी आर अंबेडकर (BR Ambedkar) ने लिखा कि संविधान लागू होने के 15 साल तक संघ के सभी शासकीय कार्यो में अंग्रेजी भाषा का उपयोग जारी रहेगा। वहीं, इसके खंड 3 में यह जिक्र है कि संसद चाहे, तो अंग्रेजी को जारी रख सकती है।
यही वजह है कि हमारे देश की कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है। क्यों? क्योंकि हम किसी एक चीज पर सहमत ही नहीं हैं। हालांकि, इसके ठीक उलट विदेशों में हिंदी (Hindi) भाषा के प्रति प्रेम काफी बढ़ रहा है और इसका मुख्य उदाहरण सोमालिया (Somalia) के उपप्रधानमंत्री सलाह अहमद जामा (Salah Ahmad Jama) हैं, जो इस समय काफी चर्चा में हैं। नामचीन न्यूज चैनल इंडिया टुडे को उन्होंने हिंदी में इंटरव्यू दिया है, उसकी हम चर्चा करेंगे और साथ ही इसपर भी चर्चा करेंगे कि डोनाल्ड ट्रंप के कारण सोमालिया देश क्यों ट्रेंड में बना हुआ है।
1971 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum – WEF) की स्थापना हुई थी, जो एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका काम दुनिया के बड़े नेताओं, उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है और इसका मुख्यालय जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है। इस संगठन की स्थापना करने वाले क्लॉस श्वाब (Klaus Schwab) हैं, जो खुद एक प्रसिद्ध जर्मन अर्थशास्त्री और इंजीनियर हैं।
दावोस में 19 से 23 जनवरी 2026 तक वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum – WEF) की 56वीं वार्षिक बैठक आयोजित हुई थी। इस दौरान सोमालिया के उपप्रधानमंत्री सलाह अहमद जामा भी वहां मौजूद थे। बता दें कि सोमालिया (Somalia) अफ्रीका (Africa) महाद्वीप में स्थित एक देश है।
ऐसे में WEF के बैठक के दौरान उपप्रधानमंत्री सलाह अहमद जामा (Salah Ahmad Jama) ने इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) को एक इंटरव्यू दिया। कमाल की बात ये रही कि उन्होंने हिंदी में इंटरव्यू दिया। अपनी हिंदी से उन्होंने सरदेसाई को चौंका दिया। उन्होंने बिना किसी गलत उच्चारण के भारतीय की तरह हिंदी बोली।
जामा ने कहा, ''सरदेसाई साहब, हमें तो बहुत खुशी होती है कि आपने हमें यह मौका दिया है, कि इंडिया टुडे में हम आज मेहमान बन गए हैं और इस मौके पर हम पूरे हिंदुस्तान से बात करना चाहेंगे।'' सरदेसाई ने इसपर कहा कि "हिंदी में, वाह!!"
सलाह अहमद जामा (Salah Ahmad Jama) की हिंदी सुनने के बाद राजदीप सरदेसाई ने उनसे पूछ ही लिया कि उन्होंने ये भाषा सीखी कैसे? इसपर उप प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने भारत में कई साल पढ़ाई की थी।
जामा ने बताया कि उन्होंने पुणे, महाराष्ट्र; हैदराबाद (जो उस समय आंध्र प्रदेश का हिस्सा था और अब तेलंगाना है) और दिल्ली में रहकर पढ़ाई की है। उन्होंने भारत में बिताए अपने जीवन के कुछ बेहतरीन दिनों को याद करते हुए कहा कि सोमालिया और भारत के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने दोनों देशों को गहरे सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों वाला पड़ोसी बताया।
इस इंटरव्यू में सोमालिया (Somalia) के उपप्रधानमंत्री सलाह अहमद जामा (Salah Ahmad Jama) ने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को भी करारा जवाब दिया। जामा ने कहा, ''विशाल चुनौतियों के बावजूद सोमालिया अपार संभावनाओं और समृद्धि वाला एक सक्षम देश है। सोमालिया की कहानी को अक्सर नकारात्मक दृष्टिकोण से ही पेश किया जाता है। हम केवल बुरी बातें ही सुनते रहते हैं। हम अपनी कहानी सुनाएंगे आपको।"
फिर उनसे सोमालिया (Somalia) के लोगों की बुद्धिमत्ता पर सवाल हुआ, तो उन्होंने कहा, ''आलोचक अक्सर आरोप लगाते हैं कि सोमालियाई लोगों का आईक्यू (IQ) कम होता है। उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे भारत में सोमालिया छात्रों को पढ़ाने वाले भारतीय प्रोफेसरों से उनकी बुद्धिमत्ता और क्षमताओं के बारे में पूछें। सोमालिया के राष्ट्रपति ने भारत में पढ़ाई की है, जो दोनों देशों के बीच गहरे शैक्षिक संबंधों को उजागर करता है।''
बता दें कि दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमालिया देश पर भद्दी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि ये देश अव्यवस्थित, गंदी, और अपराध से भरा हुआ है। इसे दुनिया के सबसे खराब देशों में से एक माना जाता है। साथ ही वहां से आए प्रवासियों को "कचरा" कहा था।
वहीं, दावोस में जब बैठक चल रही थी, तब ट्रंप ने एक बार फिर सोमालिया के लोगों पर टिप्पणी की। विदेशी नेताओं और कॉर्पोरेट अधिकारियों को सम्बोधित किया और इस दौरान सोमालिया के निवासी से जुड़े एक कथित धोखाधड़ी मामले का जिक्र किया।
ट्रंप ने कहा, “क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं? सोमालिया के लोग हमारी सोच से कहीं ज़्यादा बुद्धिमान निकले। मैं हमेशा कहता हूँ कि ये कम बुद्धि वाले लोग हैं। ये लोग मिनेसोटा में जाकर इतना सारा पैसा कैसे चुरा लेते हैं?”
अमेरिकी राष्ट्रपति के इसी बयान पर सलाह अहमद जामा ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
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'अंकल सैम' यानी अमेरिका और सोमालिया (Somalia) का रिश्ता बड़ा अजीब है। वर्तमान समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के चिढ़े होने का कारण है "अमेरिका फर्स्ट" पॉलिसी और सुरक्षा को लेकर उनकी सख्त सोच। अमेरिका में सोमालिया के हज़ार से ज्यादा लोग शरणार्थी के रूप में रह रहे थे लेकिन जब से डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं। वो इसको लेकर थोड़े सख्त हो गए हैं। उन्होंने सोमालिया के नागरिकों के लिए TPS (Temporary Protected Status) खत्म कर दिया है, जिसका मतलब है कि वहां के हजारों लोगों को अब अमेरिका छोड़कर वापस जाना होगा।
साथ ही उनका यह भी कहना है कि वहां से लोग अमेरिका आते हैं और सरकारी मदद (Welfare) का गलत फायदा उठाते हैं। करोड़ों डॉलर का फ्रॉड कर रहे हैं। इस मामले पर उनका अमेरिकी संसद की सदस्य इल्हान उमर, जो सोमालिया मूल की हैं, उनसे अक्सर बहस होता है। उन्हें सोमालिया की खराब स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता हैं। ट्रंप सोमालिया को एक "बर्बाद देश" मानते हैं जहाँ कानून और व्यवस्था नहीं है। उनका तर्क है कि वहां से आने वाले लोगों के साथ आतंकवादी भी अमेरिका आ सकते हैं।
सोमालिया (Somalia) में 'अल-शबाब' नाम का एक खतरनाक आतंकी संगठन है। अमेरिका (America) अपनी सेना और ड्रोन हमलों के जरिए वहां इन आतंकियों को खत्म करने में सोमालिया की मदद करता रहा है। 2008 में अमेरिका ने इस संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित किया था। विचार करने वाली चीज है कि जहाँ अमेरिका ने सोमलिया की मदद की है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप वहां के लोगों को पसंद नहीं करते हैं।
इसलिए हमने ऊपर कहा था कि अमेरिका और सोमालिया का रिश्ता अजीब है। वहीं, मौजूदा जानकारी के मुताबिक ट्रंप सरकार ने सोमालिया की सरकार को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोक दी है। उनके मुताबिक सोमालिया के अधिकारी अनाज और राहत सामग्री की चोरी कर रहे हैं।
सोमालिया (Somalia) में अमेरिका (America) का थोड़ा सा स्वार्थ जरूर छिपा है। जैसे अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका आतंकवाद मिटाने के इरादे से घुसा था, यहाँ भी अमेरिका पूरी तरह से तो नहीं, लेकिन हल्के फुल्के तरीके से सोमालिया पर अपनी छाप छोड़ता है। शुरुआत 1992 में मानवीय सहायता (भूखमरी रोकने) के लिए "ऑपरेशन रिस्टोर होप" से हुई थी लेकिन धीरे-धीरे ये ल-शबाब के खिलाफ आतंकवाद विरोधी मिशन में बदल गया।
साल 2006 में सोमालिया में 'इस्लामिक कोर्ट्स यूनियन' (ICU) का शासन था। ये संगठन अल-कायदा का करीबी माना जाता था। ऐसे में अमेरिका ने पड़ोसी देश इथियोपिया को सोमालिया पर हमला करने के लिए उकसाया और समर्थन दिया। इसके लिए अमेरिका ने इथियोपिया को हथियार तक दिए और हमला करने में मदद की।
वहीं, रणनीति दृष्टिकोण से देखें, तो सोमालिया (Somalia) अमेरिका (America) के लिए जरूरी भी है क्योंकि ये देश समुद्र के किनारे एक ऐसी जगह पर है जहाँ से दुनिया का बहुत सारा व्यापार होता है और अमेरिका ये कभी नहीं चाहेगा कि यहाँ चीन अपना कब्जा जमा लें। इसलिए अमेरिका ना चाहते हुए भी सोमालिया पर नज़रें गड़ाए बैठा हैं।