पाकिस्तान के हाथ से निकल जाएगा बलूचिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ का कबूलनामा AI Generated
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पाकिस्तान के हाथ से निकल जाएगा बलूचिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ का कबूलनामा

पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने 2 फरवरी 2026 को पाकिस्तान की संसद मजलिस-ए-शूरा में अपने भाषण के दौरान जब बलूचिस्तान का ज़िक्र किया तो एक बार फिर से वैश्विक राजनीति में खलबली मच गई है।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के मजलिस-ए-शूरा में दिए बयान ने हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने माना कि बलूचिस्तान पर पाकिस्तान की पकड़ कमजोर हो रही है और बलूच विद्रोही संगठन तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत होते जा रहे हैं।

  • बलूचिस्तान का इतिहास प्राचीन सभ्यताओं, कलात रियासत की स्वायत्तता और ब्रिटिश संरक्षण से जुड़ा रहा है; 1948 में पाकिस्तान में इसके जबरन विलय को बलूच आज भी अपने संघर्ष की जड़ मानते हैं।

  • अलगाव की मांग के पीछे राजनीतिक हाशिए पर धकेलना और सैन्य कार्रवाई जैसे कारण हैं; इसी वजह से 1948, 1958, 1963, 1973 और 2004 में बड़े आंदोलन हुए, जिन्हें BLA, BRA और BLF जैसे संगठनों ने आगे बढ़ाया।

पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने 2 फरवरी 2026 को पाकिस्तान की संसद मजलिस-ए-शूरा में अपने भाषण के दौरान जब बलूचिस्तान का ज़िक्र किया तो एक बार फिर से वैश्विक राजनीति में खलबली मच गई है। वैश्विक राजनीति में पकिस्तान का फिलहाल कोई दाल नहीं गल रहा है। बलूचिस्तान स्तान, जो कि पाकिस्तान का हिस्सा है, पकिस्तान के लिए एक सिरदर्द बना हुआ है। इस बीच पाकिस्तान के रक्षामंत्री के बयानों ने सबको चौंका दिया है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल पाकिस्तान की संसद मजलिस-ए-शूरा (Majlis-e-Shoora) में ख्वाजा आसिफ ने (Khawaja Muhammad) अपने भाषण के दौरान कहा है कि पाकिस्तान के हाथ से बलूचिस्तान निकल रहा है। अब बलूचिस्तान पर पाकिस्तान का नियंत्रण कमजोर होता जा रहा है। उनका कहना था कि बलूच आर्मी पाकिस्तान की सेना से भी अधिक हाईटेक हो गई है। बलूच सेना में हर एक विद्रोही लगभग 20,000 डॉलर के पूरे कॉम्बैट गियर पैकेज से सुसज्जित है। ख्वाजा आसिफ का कहना है कि पाकिस्तानी सेना को और मज़बूत करने की जरुरत है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के विषय पर बोलते हुए ख्वाजा आसिफ बलूचिस्तान के अंदर उठ रहे पाकिस्तान के प्रति विद्रोह और विद्रोह से जुड़े संगठन इत्यादि का ज़िक्र कर रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने बलूचिस्तान आर्मी के बारे में बताया।

क्या है बलुचिस्तान का इतिहास ?

बलूचिस्तान का इतिहास काफी पुराना रहा है। बलूचिस्तान में सिंधु सभ्यता से सम्बंधित केंद्र है जो इसकी प्राचीनता को दर्शाते हैं। मध्यकाल में यह क्षेत्र कभी फ़ारसी साम्राज्य, कभी सिकंदर महान, और बाद में अरब शासकों के अधीन रहा। 7वीं और 8वीं सदी में यहाँ इस्लाम पहुँचा। बदलते समय के साथ बलूच जनजातियाँ मज़बूत हुईं और यहाँ पर स्थानीय शासन उभरा। 17वीं सदी में कलात रियासत (Khanate of Kalat) की स्थापना हुई थी।

इसे औपचारिक रूप से 1666 ई. के आस-पास मीर अहमद ख़ान कलात ने इसकी स्थापना की थी। इसे ही बलूच लोग अपना ऐतिहासिक स्वतंत्र राज्य मानते हैं। 1876 में ब्रिटिश काल में ‘खान ऑफ कालात’ के साथ एक संधि कर बलूचिस्तान को एक रियासत के रूप में अधीनस्थ बना लिया था। यह रियासत भारतीय उपमहाद्वीप के नक्शे पर स्थित थी और इसे ब्रिटिश इंडिया की संरक्षित स्टेट माना जाता था। यह क्षेत्र वैसे तो स्वतंत्र रूप से शासित था परन्तु इसकी विदेश नीति और सुरक्षा पर ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण था।

बलूचिस्तान क्यों पकिस्तान से अलग होना चाहता है ?

भारत जिस समय ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ाद हुआ उस समय बलूचिस्तान ने अपने आपको एक अलग राष्ट्र घोषित किया था। कुछ समय पश्चात् मार्च 1948 में पाकिस्तान (Pakistan) के तत्कालीन राष्ट्राध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) ने सैन्य हस्तक्षेप करके बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा बना लिया। हालांकि बलूचिस्तान ने इस विलय को सहमति से नहीं हुआ है। उनका मानना है कि यह विलय ज़बरदस्ती हुआ है। वहीं दूसरी तरफ़ बलूचिस्तान के बलूच नेताओं का मानना है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग केंद्र ने किया है। परन्तु पाकिस्तान की राजनीति में बलूचिस्तान के लोगों को हाशिये पर रख दिया गया है।

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बलूचिस्तान में उठ चुके हैं विरोध के स्वर

वैसे तो बलूचिस्तान में समय समय पर विरोध के स्वर उठते रहे हैं। लेकिन बड़े आंदोलनों की बात की जाए तो उसमें 1948 में , 1958, 1963 में शेर मोहम्मद मर्री के नेतृत्व में गुरिल्ला युद्ध, 1973 में नवाब अकबर बुगती, खैर बख्श मर्री जैसे नेताओं की अगुवाई में और 2004 के आंदोलनों का ज़िक्र पहले किया जाता है। बलूचिस्तान (Baluchistan) में इस तरीके के आंदोलनों को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूच रिपब्लिकन आर्मी (BRA), तथा बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) इत्यादि प्रकार के संगठनों द्वारा संचालित किया जाता है।