मलेशिया सरकार ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कड़ा प्रतिबंध लागू कर दिया है। 2024 से प्रक्रियाधीन इस फैसले के तहत बिना लाइसेंस प्लेटफॉर्म्स पर रोक और फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब जैसे मंचों को नाबालिग अकाउंट्स ब्लॉक करने का आदेश दिया गया। उद्देश्य युवाओं को भ्रामक व हानिकारक कंटेंट, साइबरबुलिंग और स्क्रीन लत से बचाना है।
मलेशिया में सोशल मीडिया पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। मलेशिया की सरकार ने यह ऐतिहासिक फैसला इसलिए किया है ताकि देश के युवाओं को दिशाहीन होने से बचाया जा सके और एक नवीन प्रबुद्ध वर्ग तैयार करने वाली समृद्ध परंपरा हमेशा बनी रहे। वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और आज के समय में युवाओं का अधिकतम समय इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ही खर्च हो रहा है। इसी बढ़ते चलन को रोकने के लिए मलेशिया में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाली बात काफी समय से चर्चा में थी, जिस पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
सरकार ने अब यह अंतिम फैसला लिया है कि 16 वर्ष की आयु तक के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा ऐसे सभी अकाउंट्स को ब्लॉक करने की बात कही गई है, जिनके यूजर्स की आयु 16 वर्ष से कम है। आपको बता दें कि यह पूरा मामला साल 2024 से ही प्रक्रियाधीन था। अगस्त 2024 से इसके लिए एक नई लाइसेंसिंग प्रक्रिया (Regulatory Framework) शुरू की गई थी। इसके बाद, 1 जनवरी 2025 से मलेशियाई संचार और मल्टीमीडिया आयोग (MCMC) ने नए दिशा-निर्देश जारी किए। इन दिशा-निर्देशों के तहत बिना लाइसेंस वाले प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया और सभी टेक कंपनियों को यह सख्त आदेश दिया गया कि वे 16 साल से कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट्स को खुद ट्रैक करके ब्लॉक करें।
इस नए नियम के दायरे में वे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आने वाले हैं जिनके यूजर्स की संख्या करोड़ों में है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ऊपर ये नियम कड़ाई से लागू किए गए हैं। मलेशिया सरकार का कहना है कि इस कदम से बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री और साइबरबुलिंग जैसी गंभीर समस्याओं पर नियंत्रण स्थापित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
वैश्वीकरण के इस दौर में आज पूरी दुनिया एक 'ग्रामसभा' (Global Village) का रूप धारण करती जा रही है। खबरों को महज कुछ ही क्षणों में दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने में सुगमता से पहुंचाया जा रहा है। निःसंदेह इसका बहुत बड़ा फायदा मिला है। लेकिन पिछले कुछ समय में बहुत सारे ऐसे गंभीर मामले सामने निकलकर आए हैं, जिनसे सोशल मीडिया के प्रयोग को सीमित करने की मांग लगातार उठने लगी। आजकल सोशल मीडिया पर बहुत सारी खराब, अनावश्यक और हानिकारक सामग्रियों की एक बाढ़ सी आ गई है, जिसका सीधा नकारात्मक असर समाज पर देखने को मिल रहा है। बहुत सारे भ्रामक ऑनलाइन कंटेंट की वजह से बच्चों के मन पर इसका बेहद बुरा प्रभाव पड़ रहा है। चूंकि किसी भी राष्ट्र में बच्चे वहां के भविष्य की सबसे अमूल्य विरासत होते हैं, इसलिए मलेशिया में उनके संरक्षण के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
रील्स और शॉर्ट्स के इस दौर में बच्चों के सोचने-समझने की क्षमता (Attention Span) बहुत कम हो गई है। घंटों तक एक ही जगह बैठकर स्क्रीन को स्क्रॉल करने की लत के कारण बच्चों में मोटापे की समस्या, आंखों की कमजोरी, अनिद्रा (Insomnia) और शारीरिक निष्क्रियता तेजी से बढ़ी है। इसके कारण उनका ध्यान खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों से पूरी तरह हट गया था।
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