अमेरिका के इतिहास में लगभग 32 ब्रोकन एरो घटनाएँ हुई हैं, जिनमें परमाणु हथियार खो गए या दुर्घटनाग्रस्त हुए। इनमें से 6 हथियार आज तक नहीं मिले, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
1958 में टाइबी द्वीप के पास एक B-47 विमान से Mark-15 हाइड्रोजन बम गिरकर खो गया। यह बम नागासाकी पर गिराए गए फैट मैन से लगभग 190 गुना अधिक शक्तिशाली माना जाता है। 1966 में भूमध्य सागर के पास में दो अमेरिकी विमानों की टक्कर में B-28 थर्मोन्यूक्लियर बम समुद्र में गिर गए। इनमें से एक भी बम आज तक नहीं मिला।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह चिंता जताई जा रही है कि अमेरिका के खोए हुए परमाणु हथियार कहीं किसी अन्य देश (जैसे ईरान) के हाथ न लग गए हों, जबकि ईरान के सैन्य प्रमुख अमीर हातमी ने रहस्यमयी मिसाइलों और हथियारों की बात कही है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर संदेह बढ़ गया है।
अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ शुरू हुए संघर्ष पर विराम लगने की कोई आशा की किरण दिखाई नहीं दे रही है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का अफगानिस्तान के साथ संघर्ष बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है।
रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच पहले से ही मामला आगे बढ़ा हुआ है। ऐसा लग रहा है कि दुनिया एक बार पुनः विश्वयुद्ध की तरफ बढ़ रही है। जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर अमेरिकी परमाणु बम गिरने के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध का समापन हुआ था। लेकिन कई बार ऐसा मौका आया है जब अमेरिका स्वयं के परमाणु बम को खो चुका है।
इस बार ईरान के साथ शुरू हुए संघर्ष में कहीं ईरान के हाथ अमेरिका का परमाणु हथियार न लग जाए। अमेरिका के साथ ऐसा पहले लगभग 32 बार हो चुका है जब परमाणु हथियारों को अमेरिका द्वारा खोया गया है। लगभग सभी मामलों को संभाल लिया गया है लेकिन 6 ऐसे मामले हैं जिसका पता अमेरिका खुद नहीं लगा सका है। अमेरिका में इन घटनाओं को ब्रोकन एरो नाम दिया गया है।
द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रोकन एरो के कुल 32 मामलों में से 6 ऐसे मामले हैं जिनमें अमेरिका के परमाणु हथियार अभी तक नहीं मिले हैं
साल 1958 की बात है जब अमेरिका (America)में टाइबी द्वीप के पास एक पूरी तरह से हथियारों से लैस बी-47 विमान, जो मार्क 15 हाइड्रोजन बम से लैस था अचानक विमान कहीं टक्कर खा गया और बम खो गया। अमेरिका ने बाद में कहा कि वह बम नकली था। बाद में अमेरिकी नौसेना ने भी बहुत प्रयास किया परंतु कुछ खास नहीं पता चल सका।
बता दें कि मार्क-15 हाइड्रोजन बम, फैट मैन बम से लगभग 190 गुना अधिक विनाशकारी था। फैट मैन बम जापान के नागासाकी शहर पर अमेरिका द्वारा साल 1945 में गिराया गया था। इससे पूरे शहर सहित जापान में बहुत तबाही हुई थी।
साल 1966 की बात है जब भूमध्य सागर के ऊपर अमेरिका के ही दो लड़ाकू विमान आपस में टकरा गए थे। इसी दौरान अमेरिका में बना बी-28 थर्मोन्यूक्लियर बम सागर में ही खो गया इसके साथ ही उसका वार हेड भी खो गया था। मिरर यूएस की रिपोर्ट के मुताबिक, भूमध्य सागर में खो चुके कुल चार बी-28 थर्मोन्यूक्लियर बमों में से तीन का पता लग चुका था लेकिन चौथे का पता आज तक नहीं चल सका है।
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एक तरफ अमेरिका के ब्रोकन एरो घटनाओं ने फिर से पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अमेरिका के खोए हुए परमाणु हथियार अगर सही में परमाणु हथियार थे तो वह किसके पास हैं। दरअसल, ईरान के सैन्य प्रमुख अमीर हातमी (Amir Hatami) ने कहा है कि अमेरिका के खिलाफ अभी तक केवल साधारण मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अमेरिका सहित पूरी दुनिया को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि ईरान के पास किस तरीके के हथियार हैं या किस तरीके के मिसाइलों का भंडार है।
एक तरफ अमेरिका यह बोल रहा है कि ईरान छुपकर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में लगा हुआ था। दूसरी तरफ ईरान (Iran) के सैन्य प्रमुख अमीर हतामी (Amir Hatami) ने रहस्यमयी मिसाइलों और हथियारों की बात कर दी है। इससे यह संदेह होता है कि कहीं अमेरिका के जो परमाणु हथियार खो गए हैं, वह ईरान के हाथ तो नहीं लग गए हैं! अगर अमेरिका के परमाणु हथियार ईरान के हाथ लग चुके हैं, तो फिर आने वाले समय में एक भयावह युद्ध का साक्षी पूरी दुनिया को होना पड़ सकता है।
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