आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के पद से फिसलकर 6वें स्थान पर आ गया है। ब्रिटेन (UK)भारत को पीछे छोड़ते हुए पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है।
भारत को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहा जाता था। अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में भारत का स्थान नीचे खिसक चुका है और भारत अब चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है। यह बात आईएमएफ़ की रिपोर्ट के आधार पर सामने निकलकर आ रही है। ब्रिटेन ने भारत को पीछे छोड़ते हुए पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का खिताब अपने नाम कर लिया है।
आईएमएफ़ की रिपोर्ट-2026 ने पूरी दुनिया के अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग को फिर से बताया है। इस रिपोर्ट में भारत दो पायदान नीचे खिसक गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान और ब्रिटेन के बाद भारत 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके पहले भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मानी जा रही थी। भारत के नीचे खिसकने का कारण यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। दूसरी तरफ ब्रिटिश पौंड पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। यही कारण है कि ब्रिटेन भारत से आगे निकल गया।
भारत ने अपने जीडीपी के बेस ईयर को भी बदल दिया था। भारत ने अपने जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। यही वजह था कि भारत के अर्थव्यवस्था में परिवर्तन का मामला सामने आया है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बहुत सारे भाषणों में इस बात का जिक्र किया है कि भारत एक बार फिर से विश्व गुरु बनेगा। मोदी जब 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे उस समय से ही कहते आ रहे हैं कि 21 वीं सदी भारत का है। उनके बहुत सारे भाषणों में यह बात झलकती रही है। कुछ समय के लिए भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना तो लोगों को लगने लगा था कि भारत अब विश्व का नेतृत्व करेगा परंतु आईएमएफ़ की रिपोर्ट में भारत का इस तरीके से पीछे जाना एक बार फिर विश्व गुरु बनने में संदेह पैदा कर रहा है। वहीं ईरान, अमेरिका और इस्राइल युद्ध में भारत की तरफ से मोदी ने जो कदम उठाया है वह भी सवालिया निशान खड़ा करता है। हालांकि भारत के बारे में आईएमएफ़ की तरफ से यह अनुमान लगाया गया है कि भारत आने वाले वर्ष 2027 में लंबी छलांग लगा सकता है और ब्रिटेन एवं जापान को पीछे छोड़ सकता है।
भारत एशिया में बड़ी क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभर रहा है। चीन एशिया में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि अमेरिका एशिया में चीन को प्रतिसंतुलित करने के लिए भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और भारत के संबंध पहले की तुलना में मजबूत भी हुए हैं। हालांकि कुछ विवाद समय-समय पर सामने निकलकर आए हैं। इसके साथ ही भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने के लिए लुक ईस्ट पॉलिसी को एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बदल दिया और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश की है ताकि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सके।
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