21 मई 2026 को पीओके (PoK) के मुज़फ़्फ़राबाद में अज्ञात हमलावरों ने पुलवामा हमले के मुख्य साजिशकर्ता और अल-बद्र के कमांडर हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या कर दी। भारत सरकार द्वारा 2022 में आतंकी घोषित बुरहान कश्मीर में युवाओं की भर्ती और हथियारों की सप्लाई करता था। उसका खात्मा सीमा पार आतंकी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है।
21 मई 2026 को पुलवामा हमले का साजिशकर्ता आतंकी हमजा बुरहान मारा गया। 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आत्मघाती हमले से आतंकी हमजा बुरहान का संबंध था। हमजा बुरहान को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में मारा गया है। सूत्रों के मुताबिक, 21 मई 2026 को PoK के मुज़फ़्फ़राबाद में अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके आतंकी हमजा बुरहान को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद से PoK में तनाव बढ़ गया है।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) द्वारा कड़ी सुरक्षा में काम कर रहे हमजा पर मुज़फ़्फ़राबाद के गोजरा इलाके में एक स्कूल के बाहर घात लगाकर हमला किया गया। बाइक पर सवार हमलावरों ने उस पर कई राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें से तीन गोलियां हमजा के सिर में लगीं। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और हमजा को रावलपिंडी के संयुक्त सैन्य अस्पताल (CMH) में एयरलिफ्ट किया गया, जहां बाद में उसने दम तोड़ दिया।
हमजा का भारत विरोधी गतिविधियों का लंबा इतिहास रहा है और उसने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को उग्रवाद और कट्टरपंथ की ओर धकेलने में अहम भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का निवासी हमजा, साल 2017 में वैध दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान गया और अल-बद्र आतंकी संगठन में शामिल हो गया। बाद में वह संगठन का ऑपरेशनल कमांडर बन गया और जम्मू-कश्मीर में उग्रवादियों की भर्ती और हथियारों की आपूर्ति की देखरेख करने लगा। उस पर पाकिस्तान की आईएसआई से भी करीबी संबंध होने का आरोप है।
भारत सरकार ने साल 2022 में उसे आतंकवादी घोषित किया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बुरहान पुलवामा और कश्मीर के अन्य हिस्सों में आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार मुख्य व्यक्तियों में से एक था। उसने युवाओं को उकसाने और भर्ती करने के लिए सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया और आतंकी विचारधारा को फैलाया। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में हुई यह हत्या आतंकी संगठनों और सीमा पार से हो रही उनकी गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है।
पुलवामा हमला 14 फरवरी, 2019 को हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ (CRPF) कर्मियों को ले जा रहे सैन्य काफिले को एक वाहन में सवार हमलावर ने निशाना बनाया था। भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए इस घातक आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस भयावह घटना ने पूरे मुल्क को झकझोर दिया था और भारतीय जवानों के प्रति विश्व के अलग-अलग कोने में गहरी सहानुभूति देखने को मिली थी।
14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का एक बड़ा काफिला गुजर रहा था। इस काफिले में लगभग 78 बसें थीं, जिनमें 2500 से अधिक जवान सवार थे। दोपहर के करीब 3:15 बजे, जब यह काफिला पुलवामा जिले के अवंतीपोरा के पास लाटूमोड नामक स्थान पर पहुंचा, तभी विपरीत दिशा से आ रही एक संदिग्ध कार काफिले में शामिल एक बस से टकरा गई। उस कार में सैकड़ों किलोग्राम विस्फोटक (IED) लदा हुआ था। टक्कर होते ही एक जोरदार धमाका हुआ, जिसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। इस आत्मघाती हमले में भारत माता के 40 वीर सपूतों ने अपनी जान गंवा दी। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस कायरतापूर्ण हमले की जिम्मेदारी ली थी।
इस हमले के बाद पूरे भारत में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और सुरक्षा बलों को पूरी स्वतंत्रता दे दी गई है। हमले के ठीक 12 दिन बाद, यानी 26 फरवरी 2019 की रात को भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक किया।
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