अमेरिकी न्याय विभाग से जुड़े दस्तावेज़ों (Epstein Files) में जेफरी एपस्टीन द्वारा वैश्विक नेताओं से संपर्क की कोशिशों का ज़िक्र है, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम 1005 बार आया है।
इन फाइल्स में नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह जैसे भारतीय नेताओं का उल्लेख संदर्भ के रूप में किया गया है, न कि किसी अपराध या सीधे आरोप के तौर पर।
जेफरी एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिगों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोप लगे थे; 2019 में गिरफ्तारी के बाद उसकी जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
एपस्टीन फाइल (Epstein Files) ने तो दुनिया में तहलका मचा दिया है। जेफरी एपस्टीन (jeffrey epstein) की मौत 10 अगस्त 2019 को हुई थी लेकिन उसकी मौत के बाद कई नामचीन हस्तियां इसकी चपेट में आ रही हैं। क्या मनोरंजन जगत, क्या व्यवसाए जगत और क्या राजनीति जगत? हर क्षेत्र के दिग्गज इस दलदल में फंसते जा रहे हैं।
भारत से भी कई नेताओं के नाम इसमें देखने को मिले हैं। इसमें नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और हरदीप सिंह पूरी (Hardeep Singh Puri) जैसे नेताओं का नाम शामिल है। अब इसी बीच इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के जिगरी दोस्त का नाम भी शामिल है। मोदी के दोस्त का 1005 बार नाम लिया गया है। क्या है पूरा मामला इसे समझते हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलते हैं, तो एक शब्द का अक्सर इस्तेमाल करते हैं और वो है पुतिन उनके दोस्त है। अब उनके इसी दोस्त का नाम एपस्टीन फाइल (Epstein Files) में आ गया है। इस फाइल में यह बताया गया है कि जेफरी एपस्टीन रूस के शीर्ष नेताओं, यहां तक कि पुतिन से भी मिलने की कोशिश में था। उसने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov), संयुक्त राष्ट्र में रूस के पूर्व राजदूत विताली चुर्किन (Vitaly Churkin) तक से बात करने की कोशिश की थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जून 2018 में एपस्टीन ने नॉर्वे के वरिष्ठ नेता थोर्ब्यॉर्न यागलैंड (Thorbyrn Ågland) को एक ईमेल लिखा था, जिसमे उसने कहा था कि वो पुतिन से बात करना चाहता है। एपस्टीन ने आगे लिखा कि वो विताली चुर्किन के जरिए रूस से बात करना चाहता है।
अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) की ओर से जारी दस्तावेज, जिसे एपस्टीन फाइल (Epstein Files) कहा जा रहा है, उसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम कम से कम 1005 बार लिया गया है। इसमें जो दस्तावेज है, वो ज्यादातर न्यूज रिपोर्ट्स की क्लिपिंग हैं। साथ ही इसमें जो इमेल्स है, उससे यह संकेत मिलते हैं कि जेफरी एपस्टीन खुद को एक जियोपॉलिटिकल पावर प्लेयर के रूप में दुनिया के सामने रखना चाहता था।
यागलैंड के जरिये उसने यह भी सन्देश देने की कोशिश की कि वो रूस को पश्चिम देशों से निवेश दिलवा सकता है। हालांकि, दस्तावेज में यह कहीं पुष्टि नहीं की गई है कि पुतिन और एपस्टीन की कभी मुलाकात हुई है। इमेल्स में दावा जरूर है कि पुतिन की तरफ से उसे मिलने का न्योता मिला था, लेकिन इसका कोई आधिकारिक साक्ष्य नहीं है। वैसे इन दस्तावेजों से यह तो साफ़ है कि जेफरी एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति से मिलने की पूरी कोशिश में था।
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गौरतलब है कि एपस्टीन फाइल (Epstein Files) में जैसे ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम सामने आया, उसके बाद रूस की तरफ से प्रतिक्रिया भी सामने आ गई। एपस्टीन पर यह आरोप भी लगा कि वो रूस का जासूस है। इसी पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा, "एपस्टीन के रूसी जासूस होने की बात को किसी भी तरह से लिया जा सकता है, लेकिन इसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। मुझे इस बात पर कई चुटकुले सुनाने का मन कर रहा है, लेकिन आइए हम अपना समय बर्बाद नहीं करते हैं।''
बता दें कि जिस प्रकार से एपस्टीन की रूस और पूर्वी यूरोप के अन्य हिस्सों में दिलचस्पी ले रहा था, उससे ये अब कयास लगाए जाने लगे हैं कि वो रूस का ही कोई एजेंट था।
आपको बता दें कि भारत से पीएम मोदी, राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह के नाम का भी जिक्र इस फाइल में है। इस फाइल के अनुसार एपस्टीन ने कहा है कि राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी के बीच बहुत ज्यादा अंतर है। यही कारण है कि नरेंद्र मोदी को देश में भारी बहुमत हासिल हुआ था।
राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) के बारे में कहा गया है कि वो राजनीतिक रूप से परिपक्व नहीं थे। वहीं मनमोहन सिंह के बारे में बताया गया है कि देश के लिए एक ऐसा नेता थे जो काफी गंभीर रहते थे। वैश्विक राजनीति में काफी कुछ योगदान रहा है। सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) को फाइल में कांग्रेस पार्टी बॉस बताया गया है।
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जेफरी एपस्टीन (jeffrey epstein) का जन्म 20 जनवरी 1953 को ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क में एपस्टीन का जन्म हुआ था और वो करियर की शुरुआत में एक शिक्षक था। 1976 में जब उसकी नौकरी गई, तब वित्तीय क्षेत्र में उतरा और बेयर स्टर्न्स में काम करने लगा। इसके बाद वो अरबपतियों का टैक्स और संपत्ति सलाहकार बन गया और खूब पैसे कमाने शुरू कर दिए।
2005 में पहली बार उसपर एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण का आरोप लगा। जाँच में पता चला कि उसने दर्जनों नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया है। 2008 में कोर्ट ने उसे 18 महीने कैद की सजा सुनाई। वहीं, जुलाई 2019 में FBI ने उसे 'चाइल्ड सेक्स ट्रैफिकिंग' के गंभीर आरोपों में फिर से गिरफ्तार किया लेकिन ट्रायल शुरू होता, उससे पहले ही 10 अगस्त 2019 को मैनहट्टन जेल में उसकी संदिग्ध तरिके से मौत हो गई। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया।