डेनमार्क में अज़ान को लेकर एक निर्णय आया है। सोशल डेमोक्रेट्स सरकार ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर होने वाली अज़ान को रोकने के लिए एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है। देश के आप्रवासन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने साफ कहा कि डेनमार्क में अज़ान के लिए कोई जगह नहीं है।  
अंतर्राष्ट्रीय

क्या डेनमार्क में बंद होने जा रही है अज़ान? सरकार के नए कदम से मचा बवाल

सवाल उठ रहे हैं कि क्या डेनमार्क में अब अज़ान पर पूरी तरह बैन लगने जा रहा है? सोशल डेमोक्रेट्स सरकार ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर होने वाली अज़ान को रोकने के लिए एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है।

Author : Pradeep Yadav

डेनमार्क में अज़ान को लेकर एक निर्णय आया है। निर्णय में बताया गया है कि अज़ान पर अब धीरे-धीरे नकेल कसी जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या डेनमार्क में अब अज़ान पर पूरी तरह बैन लगने जा रहा है? सोशल डेमोक्रेट्स सरकार ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर होने वाली अज़ान को रोकने के लिए एक बड़ा कानूनी कदम उठाया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, साल 2020 और 2025 की असफल कोशिशों के बाद, जून 2026 में डेनमार्क सरकार ने तीसरी बार राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध की तैयारी शुरू की है। देश के आप्रवासन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने साफ कहा कि डेनमार्क में अज़ान के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने बयान दिया कि डेनमार्क में घूमते समय ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप पाकिस्तान के इस्लामाबाद में घूम रहे हैं।

डेनमार्क का संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता देता है। इसलिए कानूनी विशेषज्ञों की एक टीम जांच कर रही है कि संविधान को तोड़े बिना लाउडस्पीकर पर बैन कैसे लगाया जाए। इसके साथ ही सरकार ने हाल ही में स्कूलों में बने प्रार्थना कक्षों (Prayer Rooms) को भी बंद करने का नया कानून पास किया है।

वहीं, अज़ान के इतिहास पर नज़र डालें, तो शुरुआत से अज़ान केवल मानव आवाज़ में दी जाती थी, लेकिन 1936 में सिंगापुर की सुल्तान मस्जिद से लाउडस्पीकर का चलन शुरू हुआ। शुरुआत में कई पारंपरिक मौलवियों ने इसका कड़ा विरोध किया और इसे 'शैतान की आवाज़' तक कह दिया था। हालांकि, आधुनिक शोर के बीच आवाज़ दूर तक पहुँचाने के लिए बाद में इसे अपना लिया गया।

भारत में भी ध्वनि प्रदूषण और राजनीतिक कारणों से इस पर प्रतिबंध की माँग उठती रही है, जिस पर अदालतों ने फैसला दिया कि अज़ान धार्मिक अधिकार है, लेकिन लाउडस्पीकर इसका अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

क्या होती है अज़ान?

अज़ान इस्लाम में नमाज के लिए दिया जाने वाला आह्वान है। इसके माध्यम से यह बताया जाता है कि नमाज का वक्त हो गया है। इस्लाम में दिन में पांच बार नमाज का रिवाज है। इसलिए अज़ान देने से लोगों को ध्यान रहता है कि नमाज का वक्त आ गया है। बहुत सारे देशों में अज़ान के लिए लाउडस्पीकर का सहारा लिया जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि अज़ान के वक्त लाउडस्पीकर का सहारा ध्वनि प्रदूषण का कारण बनता है।

वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि समय और स्थान की जरूरत को देखते हुए कभी-कभी अज़ान के लिए लाउडस्पीकर का प्रयोग अनावश्यक प्रतीत होता है। डेनमार्क की वर्तमान सरकार का मानना है कि देश संविधान से चलता है। सबको अपने धर्म को मानने की आजादी है लेकिन डेनमार्क और पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अंतर है।

डेनमार्क में इस्लामाबाद नहीं हो सकता है, इसका ख्याल रखना भी जरूरी है। बता दें डेनमार्क में लगभग 2.7 लाख मुस्लिम आबादी रहती है। हालांकि सरकार का यह फैसला कितना सफल होता है, यह भविष्य में देखा जाना बाकी है।

यह भी पढ़ें :