अमेरिका से अनाज और दूध मंगवा रही मोदी सरकार! विदेशी इंपोर्ट पर पीयूष गोयल ने दिया जवाब Wikimedia
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अमेरिका से अनाज और दूध मंगवा रही मोदी सरकार! विदेशी इंपोर्ट पर पीयूष गोयल ने दिया जवाब

अमेरिका-भारत के संबंधों में सुधार की घोषणा करते हुए दोनों देश के प्रमुखों ने अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की है। इसी बीच किसानों की चिंता अपने उत्पाद को लेकर बढ़ने लगी थी।

Author : Pradeep Yadav
Reviewed By : Mayank Kumar

  • 6 फरवरी 2026 को घोषित अंतरिम व्यापार समझौते में सरकार ने किसानों के हित सुरक्षित रखने का दावा किया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार दुग्ध उत्पाद, फल-सब्ज़ी, मसाले, तिलहन, आलू, लहसुन, मक्का, सोयाबीन, आटा, पोल्ट्री, नारियल (खोपरा) और तंबाकू को समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों पर नकारात्मक असर न पड़े।

  • जहाँ अमेरिका ने कहा कि भारत ने अपने कृषि बाज़ार खोले हैं, वहीं भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील कृषि उत्पाद संरक्षित हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते को दोनों देशों के हित में बताया, जबकि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

  • कांग्रेस और राहुल गांधी ने समझौते का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी दबाव में आकर किसानों के हितों से समझौता कर रहे हैं। राहुल गांधी ने अडानी पर अमेरिका में चल रहे केस का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार अडानी को बचाने के लिए यह डील कर रही है।

अमेरिका-भारत के संबंधों में सुधार की घोषणा करते हुए दोनों देश के प्रमुखों ने अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की है। इसी बीच किसानों की चिंता अपने उत्पाद को लेकर बढ़ने लगी थी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इन सारे बातों से सम्बंधित सवालों का जवाब दिया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय किसानों के प्रमुख फसलों को समझौते से बाहर रखा गया है। उन्होंने भारत, अमेरिका व्यापर समझौते का वर्णन करते हुए बताया कि व्यापार समझौते में दुग्ध उत्पादों, फलों, सब्जियों, मसालों और अन्य अनाजों को संरक्षित किया गया है।

भारत-अमेरिका समझौता

काफी लम्बे समय तक टैरिफ संघर्ष के पश्चात् यह घोषणा दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए की गई। इस अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Framework) की घोषणा, 6 फरवरी 2026 को दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए किया। यह एक अस्थायी रूपरेखा है जो आगे एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तैयारी की दिशा में कदम है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रम्प (Trump) ने इस समझौते की घोषणा करते हुए यह कहा कि भारत अब रूस से तेल नहीं बल्कि वेनेज़ुएला से तेल खरीदेगा। वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के हितों के लिए महत्वपूर्ण बताया और समझौते का स्वागत किया। हालांकि रूस के मामले पर भारत की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है कि भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं खरीदेगा।

समझौते में किसानों के लिए क्या

केंद्रीय मंत्री प्यूष गोयल ने कहा, इस समझौते में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह प्रावधान किया गया है कि तिलहन, आलू, मसाला, लहसुन, मक्का, सोयाबीन, आटा के साथ सभी प्रकार के फूल-पत्ती से जुड़े उत्पाद को समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। मंत्री के मुताबिक अमेरिका (America), पोल्ट्री व चिकन से जुड़े सामान का बड़ा सप्लायर देश है। अमेरिका अपने इन सामानों को भारत में निर्यात करने की कोशिश कर रहा था परन्तु भारत में अमेरिका से इन सामानों का आयात नहीं किया जाएगा। अमेरिका को इनकी बिक्री की इजाजत मिल जाती तो घरेलू पोल्ट्री उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था।

वहीं दूसरी तरफ चाय और दक्षिण भारत के किसानों को राहत का इशारा करते हुए बताया कि नारियल गरी जिसे खोपरा कहा जाता है, को भी समझौते से दूर रखा गया है। तंबाकू को इस समझौते से बाहर रखा गया है।

अमेरिका (America) के कृषि मंत्रालय की तरफ से यह बयान जारी किया गया था कि भारत ने अमेरिकी कृषि पदार्थों के लिए अपने बाजार खोल दिए हैं और अब अमेरिका से कई कृषि आइटम भारत में निर्यात हो सकेंगे।

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भारत में समझौते का विरोध

भारत (India) में विपक्ष के द्वारा इस समझौते का विरोध किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने इस समझौते को लेकर कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) घबराए हुए हैं। जो ट्रेड डील चार महीने से रुका हुआ था, उस डील पर नरेंद्र मोदी ने हस्ताक्षर कर दिया है। नरेंद्र मोदी ने किस मज़बूरी में ये हस्ताक्षर किया है ये बात सिर्फ मैं और प्रधानमंत्री जानते हैं। नरेंद्र मोदी पर दबाव है। नरेंद्र मोदी की छवि का गुब्बारा फुट सकता था।

उन्होंने कहा कि प्रधामंत्री ने इस देश के किसानों के खून पसीने को बेच दिया है। प्रधानमंत्री पर दबाव का ज़िक्र करते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि अडानी पर एक केस दर्ज़ है जो प्रधानमंत्री मोदी के वित्तीय संरचना का हिस्सा है।

बता दें की पिछले कुछ सालों से राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने लगातार मोदी और अडानी के संबंधों को राजनीति का मुद्दा बनाया है। अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) ने अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और कुछ अन्य के खिलाफ रिश्वत, धोखाधड़ी और प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन के मामले में सिविल/फौजदारी मुकदमा दर्ज किया है। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने भारत के सरकारी अधिकारियों को लाखों डॉलर की रिश्वत दिया था जिससे सोलर ऊर्जा से संबंधित ठेकों को प्रभावित कर सकें, और अमेरिकी निवेशकों को दुविधा भरी जानकारी उनके द्वारा दी गई।

राहुल गाँधी का कहना है कि मोदी, अडानी को बचाने की कोशिश कर रहें है, इसी का परिणाम है कि देशभर के किसानों की मेहनत का सौदा, मोदी ने ट्रम्प के हाथों में कर दिया।