अमेरिका में गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है। द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग ने लगभग यह तय कर लिया है कि उनके मुकदमे को वापस लिया जा सकता है।  files
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मोदी-ट्रंप के बीच सीक्रेट डील ! अडानी केस बंद होने की खबर पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, यहाँ जानिए पूरा मामला

अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक और सिविल धोखाधड़ी के मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सबूतों की कमी के चलते मामले इसी सप्ताह खारिज हो सकते हैं। भारत में इस पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है; विपक्ष इसे मोदी-ट्रंप के बीच एक गुप्त समझौता बता रहा है।

Author : Pradeep Yadav

अमेरिका में गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है। द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग ने लगभग यह तय कर लिया है कि उनके मुकदमे को वापस लिया जा सकता है। यह मामला जैसे ही प्रकाश में आया है, भारत में इसको लेकर बहुत सारी प्रतिक्रियाएं सामने निकलकर आ रही हैं। 

बता दें कि ब्लूमबर्ग  ने भी सूत्रों के आधार पर बताया है कि अमेरिकी अधिकारी इस आपराधिक मामले को औपचारिक रूप से खारिज करने की घोषणा इसी सप्ताह कर सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग नवंबर 2024 में गौतम अडानी और उनके कई सहयोगियों के खिलाफ दायर समानांतर सिविल धोखाधड़ी मामले को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी वकील रॉबर्ट जिउफ्रा जूनियर के नेतृत्व में अडानी की कानूनी टीम की मुलाकात हाल ही में वॉशिंगटन में न्याय विभाग के अधिकारियों से हुई है। उन्होंने अपनी तरफ से यह दलील दी है कि अभियोजकों के पास मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत और अधिकारक्षेत्र नहीं है। 

अडानी पर क्या हैं आरोप ?

बता दें कि अमेरिका ने साल 2024 में ही अडानी की कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ प्रतिभूति धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में अभियोग दायर किया था। 

अमेरिका के न्याय विभाग (Justice Department of America) ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह के अधिकारियों ने भारत मे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े ठेका प्राप्त करने के लिए रिश्वत का सहारा लिया गया।

यह मामला न्यूयॉर्क में  20 नवंबर 2024 को न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा अनसील किया गया। प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (U.S. Securities and Exchange Commission) ने बहुत बार यह आरोप लगाया कि प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन करके निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश की गई और उनको धोखा देने का प्रयास किया गया। 

जब यह मामला प्रकाश में आया तो उस समय भारत में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई थी। विपक्षी दलों ने केंद्र की भाजपा सरकार को जमकर घेरने की  कोशिश की। आरोप यह लगाए गए कि नरेंद्र मोदी अडानी को बचाने के लिए समझौता कर रहे हैं। 

विपक्षी दलों ने इस मामले पर नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को घेरने का प्रयास किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बहुत बार इस मामले को सदन में उठाने की कोशिश करते रहे, लेकिन सदन में यह मामला उस तरीके से  नहीं उठ पाया जिस तरीके से राहुल गांधी सदन में बात रखना चाहते थे।

यह मुद्दा लोकसभा सहित अन्य राज्यों के चुनाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया। फिलहाल अडानी का यह केस अमेरिका के कोर्ट में लंबित पड़ा है।

राजनीतिक बयानबाजियाँ 

यह मामला जैसे ही प्रकाश में आया है देश की विपक्षी पार्टियों ने भाजपा और नरेंद्र मोदी को घेरना शुरू कर दिया है। काँग्रेस की तरफ से यह बयान आया है कि बीजेपी सरकार ने अमेरिका से जो डील किया था उसमें अप्रत्यक्ष तौर पर ये भी शामिल था। काँग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा है कि नरेंद्र मोदी ट्रम्प के आगे पूरी तरीके से नतमस्तक हो चुके हैं। सुप्रिया ने एपस्टिन फ़ाइल का हवाला देते कहा कि ट्रम्प के पास एपस्टिन फ़ाइल है और अडानी-मोदी के रिश्तों का पर्दाफाश न हो जाए इसके डर से मोदी ने ट्रेड डील पर सहमति दर्ज कराई है। 

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