प्रकृति ने हमें ऐसे कई पेड़-पौधे दिए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए रामबाण साबित होते हैं। इन्हीं में से एक है नीलबड़ी, जो दिखने में जामुन की तरह होती है, लेकिन इसमें मौजूद औषधीय गुण शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचा सकते हैं।
यह एक औषधीय झाड़ीनुमा पौधा है, जिसके फल, जड़ और पत्तियों का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। इसकी शाखाएं पीली और भूरी होती हैं। वहीं, इसकी पत्तियां हरी, अंडाकार या आयताकार होती हैं, जिनकी लंबाई 3-5 सेमी और चौड़ाई 2-3 सेमी होती है। फूलों के बाद इसमें छोटे-छोटे गोल फल लगते हैं, जो 4-6 मिमी के होते हैं। ये फल पहले हरे होते हैं और पकने पर नीले-काले हो जाते हैं, जिनमें बैंगनी गूदा और 8-15 छोटे त्रिकोणीय बीज होते हैं। इसके ताजे या सूखे भागों को अर्क बनाकर इस्तेमाल किया जाता है।
यह विशेष रूप से दक्षिण एशिया में पाया जाता है, जो सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। इसका वैज्ञानिक नाम 'फिलैंथस रेटिकुलैटस' है और वैज्ञानिक अध्ययनों ने भी इसके एंटीवायरल, एंटीमाइक्रोबियल और सूजन-रोधी गुणों की पुष्टि की है।
आयुर्वेद में नीलबड़ी (Neelbadi in Ayurveda) को कफ और वात दोष को शांत करने वाली एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी माना गया है। उनके अनुसार, यह मुख्य रूप से लिवर के स्वास्थ्य, बालों की देखभाल, चर्म रोगों और दर्द निवारक के रूप में कारगर है। इसके काढ़े से लिवर विषैले पदार्थों से मुक्त होता है और पत्तियां सफेद बालों को काला करने में मदद करती हैं।
सुश्रुत संहिता (Sushruta Samhita) के अनुसार, नीलबड़ी को अधोभागहर-गण (विरेचक) में शामिल किया गया है, जो मुख्य रूप से कफ-पित्त विकारों के इलाज में उपयोग किया जाता है। यह पाइल्स, पेट से संबंधित समस्याएं, बीमारियों और वात के उपचार में फायदेमंद है।
वहीं, इसके पत्ते बालों के लिए भी लाभकारी हैं। कहा जाता है कि ताजे पत्तों का रस या पेस्ट नारियल तेल के साथ लगाने से बाल काले, मजबूत और घने होते हैं, तथा सफेद बालों की समस्या कम होती है।
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)